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दिल्‍ली मेरठ एक्‍सप्रेस-वे हुआ दो साल लेट, अब 2020 में पूरा होगा प्रोजेक्ट

दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेस-वे का काम दो साल लेट चल रहा है

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नई दिल्‍ली। देश के पहले हाई ब्रिड एनुयटी मोड पर बन रहे दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेस-वे का काम दो साल लेट चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्‍ट का काम अब मार्च 2018 तक पूरा होने का दावा किया गया था, लेकिन अब सरकार का दावा है कि पूरा प्रोजेक्‍ट मार्च 2020 तक पूरा हो जाएगा। हालांकि निजामुद्दीन से यूपी बॉर्डर तक के पहले पैकेज का काम जनवरी 2018 तक पूरा होने की बात कही गई है।
 
क्‍या है नया दावा
दरअसल, रोड एंड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर नितिन गडकरी ने मंगलवार को एनएन-24 का दौरा किया। हालांकि यह दौरा दिल्‍ली के उस पार्ट में किया गया है, जहां काम लगभग 74 फीसदी पूरा हो गया है। इसके बाद गडकरी ने दावा किया कि पैकेज वन (निजामुद्दीन से यूपी बॉर्डर) का काम जनवरी 2018 तक पूरा हो जाएगा। जबकि यह काम 30 महीने में पूरा होना था, बावजूद इसके इस प्रोजेक्‍ट के रिकॉर्ड 14 महीने में पूरा होने की उम्‍मीद है।
 
2020 तक पूरा होगा प्रोजेक्‍ट
इसके बाद मिनिस्‍ट्री की ओर से एक प्रोजेक्‍ट नोट उपलब्‍ध कराया गया। यह पूरा प्रोजेक्‍ट चार हिस्‍सों (पैकेज) में बंटा है। दूसरा पैकेज (यूपी बॉर्डर से डासना) के प्रोजेक्‍ट की कम्‍प्‍लीशन की डेट मई 2020 है, जबकि एक हिस्‍से की बिड तक पूरी नहीं हो पाई है। बावजूद इसके दावा किया जा रहा है कि 2020 तक प्रोजेक्‍ट पूरा हो जाएगा।
प्रोजेक्‍ट
कम्‍प्‍लीशन डेट
निजामुद्दीन से यूपी बॉर्डर
जनवरी 2018
यूपी बॉर्डर से डासना
मई 2020
डासना से हापुड़
जून 2019
डासना से मेरठ
टेंडर के 18 माह बाद
 
दूसरे पैकेज पर अब हुआ काम शुरू
इस प्रोजेक्‍ट के दूसरे पैकेज को लेकर काफी विवाद हुआ। दिलचस्‍प बात यह है कि यह प्रोजेक्‍ट उसी हिस्‍से में शामिल है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास किया था। यानी कि यूपी बॉर्डर से डासना के बीच नोएडा में प्रधानमंत्री ने दिल्‍ली–मेरठ एक्‍सप्रेस-वे का शिलान्‍यास पत्‍थर रखा था। जबकि उस समय तक इस पैकेज का टेंडर नहीं हुआ था और उसके बाद कई बार टेंडर कैंसिल हुआ। अब जाकर नवंबर 2017 में इस प्रोजेक्‍ट पर काम शुरू हो पाया है। 
 
7 साल पहले बनी थी योजना 
दिल्‍ली से मेरठ की दूरी को कम करने के लिए यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 में एक्‍सप्रेस वे बनाने का निर्णय लिया था और नेशनल हाइवे अथॉरिटी को इसका काम सौंपा गया था। हाइवे अथॉरिटी ने लगभग दो साल बाद डीपीआर तैयार की। एनएचएआई के मुताबिक, वर्ष 2012 में तैयार किए डीपीआर में इस एक्‍सप्रेस वे पर 5500 करोड़ रुपए के खर्च का आकलन किया गया था, लेकिन यूपीए सरकार की अन्‍य योजनाओं की तरह यह योजना भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई। लेकिन दिसंबर 2015 में यह प्रोजेक्‍ट शुरू हुआ तो इसकी प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 7500 करोड़ रुपए पहुंच चुकी थी।
 
इन पर गिरी थी पीएम की गाज
प्रोजेक्‍ट के शिलान्‍यास के बावजूद काम में देरी से प्रधानमंत्री बहुत नाराज हुए थे और नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के चेयरमैन राघव चंद्रा को हटा दिया गया। उनकी जगह वाईएस मलिक को चेयरमैन बनाया गया। 
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