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मोदी देना चाहते हैं 'जहां झुग्‍गी-वहीं मकान', पर गुजरात को छोड़कर दूसरे राज्‍यों ने बनाई दूरी

मोदी सरकार शहरों में जहां झुग्‍गी-वहीं मकान बनाना चाहती है, लेकिन राज्‍य सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं हैं

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नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोदी सरकार शहरों में 'जहां झुग्‍गी-वहीं मकान' बनाना चाहती है, लेकिन राज्‍य सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। अब तक केवल गुजरात को छोड़कर किसी भी राज्‍य ने ऐसे प्रोजेक्‍ट तैयार नहीं किए हैं। राज्‍य सरकारों का सारा फोकस अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स और बेनिफिशियरी लेड कंस्‍ट्रक्‍शन पर है। इसके चलते केंद्र ने राज्‍यों से कहा है कि वे शहरों को स्‍लम मुक्‍त करने के लिए झुग्‍गी वासियों को पक्‍के मकान बना कर दें। 

 

क्‍या है यह योजना 
प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) के तहत चार कैटेगिरी में मकान बनाए जा रहे हैं। इनमें से एक कैटेगिरी है, आईएसएसआर। इसका मकसद शहरों को स्‍लम मुक्‍त करना है। इन-सिटू स्‍लम रिहेबलिटेशन (आईएसएसआर) के तहत स्‍लम बस्तियों में रह रहे लोगों को वहीं पर पक्‍के मकान दिए जाते हैं। स्‍लम बस्‍ती चाहे सरकारी जमीन पर बसी हो या प्राइवेट लैंड पर। उस जगह पर रह रहे झुग्‍गी वासियों को कुछ दिनों के लिए अस्‍थायी तौर पर कहीं और बसाया जाता है और वहां डेवलपर द्वारा पक्‍के मकान बनाए जाते हैं, जिसे बाद में झुग्‍गी वासियों को सौंप दिए जाते हैं, जबकि डेवलपर को एक्‍सट्रा एफएआर दिया जाता है। साथ ही, 1 लाख रुपए प्रति घर भी केंद्र सरकार द्वारा डेवलपर को दिया जाता है। एक्‍सट्रा एफएआर को डेवलपर अपने हिसाब से डेवलप करके बेच सकता है। 

 

गुजरात में बन रहे हैं ऐसे प्रोजेक्‍ट 
मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि आईएसएसआर के तहत केवल गुजरात में प्रोजेक्‍ट बन रहे हैं। पिछले दिनों हुई सेंट्रल सेंक्‍शनिंग एंड मॉनीटरिंग कमेटी (सीएसएमसी) की बैठक में गुजरात की ओर से दो शहरों में 14105 घर बनाने के लिए 42 प्रोजेक्‍ट्स का प्रपोजल रखा गया। बैठक में इन प्रपोजल को मंजूरी दे दी गई और निर्णय लिया गया कि गुजरात को जल्‍द ही केंद्रीय सहायता की पहली किस्‍त का 40 फीसदी हिस्‍सा (56.42 करोड़ रुपये) जारी कर दिया जाएगा। 

 

शेष राज्‍यों ने नहीं बनाए प्रपोजल 
अधिकारी के मुताबिक, गुजरात के अलावा किसी भी दूसरे राज्‍य ने अब तक केंद्र के समक्ष आईएसएसआर प्रोजेक्‍ट्स का प्रपोजल जमा नहीं कराया है। महाराष्‍ट्र ने काफी पहले 2356 घरों का एक प्रोजेक्‍ट तैयार किया था, लेकिन उसके बाद से महाराष्‍ट्र भी ऐसे प्रोजेक्‍ट नहीं बना रहा है। इसके चलते बैठक में राज्‍यों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने राज्‍य में आईएसएसआर प्रोजेक्‍ट्स के प्रपोजल तैयार करें। बल्कि प्राइवेट डेवलपर्स को आगे आने के लिए प्रेरित करें। 

 

यूपी में इन शहरों में है जरूरत 
बैठक में उत्‍तर प्रदेश के प्रोजेक्‍ट्स पर विशेष ध्‍यान दिया गया। इस बैठक में उत्‍तर प्रदेश के दूसरे प्रोजेक्‍ट्स को तो मंजूरी दे दी गई, लेकिन साथ ही उत्‍तर प्रदेश के हाउसिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों से कहा गया कि वे राज्‍य में आईएसएसआर प्रोजेक्‍ट्स का प्रपोजल तैयार करें। उन्‍हें बताया गया कि कानपुर, वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर जैसे शहरों में आईएसएसआर प्रोजेक्‍ट्स के लिए काफी स्‍कोप है। राज्‍य सरकार को हाउसिंग बोर्ड, डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर ऐसे प्रोजेक्‍ट्स तैयार करने चाहिए। 

 

राज्‍यों को होता है फायदा 
मिनिस्‍ट्री अधिकारियों ने कहा कि आईएसएसआर एक प्रभावशाली कंपोनेंट है, जिससे हाउसिंग फॉर ऑल और स्‍लम फ्री इंडिया जैसे मिशन को पूरा किया जा सकता है, लेकिन राज्‍य सरकारें इस ओर ध्‍यान नहीं दे रही है। जबकि इस तरह के प्रोजेक्‍ट्स राज्‍य सरकारों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। ऐसे प्रोजेक्‍ट्स के लिए महंगी जमीन की जरूरत नहीं  पड़ती। जमीन उपलब्‍ध होती है और घर बनाने के लिए डेवलपर को तैयार कर लिया जाए तो राज्‍य सरकारों को कंस्‍ट्रक्‍शन पर भी खर्च नहीं करना पड़ता। राज्‍य सरकारों का काम ऐसे प्रोजेक्‍ट्स की मॉनिटरिंग करना होता है। 

 

क्‍या है पीएमएवाई का हाल 
मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अप्रैल तक कुल 4 लाख 74 घर बन पाए हैं। जबकि 19 लाख 30 हजार 844 घरों के कंस्‍ट्रक्‍शन का काम चल रहा है। इनमें से तैयार घरों के मामले में 10 टॉप राज्‍य ये हैं। 
गुजरात : 74861 
कर्नाटक : 45493 
मध्‍यप्रदेश : 41800 
तमिलनाडु : 41130 
महाराष्‍ट्र : 38301 
पश्चिम बंगाल : 32724 
झारखंड : 28275 
आंध्रप्रदेश : 27379 
राजस्‍थान : 19242 
उत्‍तर प्रदेश : 11328 

 

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