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रेरा के 2 साल: होम बायर्स के काम नहीं आ रहा कानून, रिपोर्ट में खुलासा

बिल्‍डर्स पर अंकुश लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाया गया रेरा होम बायर्स के काम नहीं आ रहा है

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 नई दिल्‍ली। बिल्‍डर्स पर अंकुश लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाया गया रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी एक्‍ट-2016 (रेरा) होम बायर्स के काम नहीं आ रहा है। दो साल बाद भी राज्‍यों में यह कानून लागू तक नहीं हो पाया है। केवल महाराष्‍ट्र को छोड़ दें तो किसी भी राज्‍य में बिल्‍डर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि अब तक आठ राज्‍यों में तो रूल्‍स तक नहीं बन पाए हैं, जबकि 25 राज्‍यों में परमानेंट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी तक नहीं है। एक्‍ट के दो साल पूरे होने पर प्रॉपर्टी रिसर्च एजेंसी नाइट फ्रेंक ने व्‍हाइट पेपर जारी कर कहा है कि रेरा का मुख्‍य मकसद रियल एस्‍टेट मार्केट के प्रति बायर्स के सेंटिमेंट में सुधार लाना था, लेकिन अभी सेंटिमेंट में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है। 

 

महाराष्‍ट्र बना उदाहरण 
अपनी रिसर्च में नाइट फ्रेंक ने कहा है कि केवल महाराष्‍ट्र रियल एस्‍टेट एक्‍ट को ढंग से लागू किया गया है। यही वजह है कि अब तक लगभग 25 हजार बिल्‍डर्स ने रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी में रजिस्‍ट्रेशन कराया है, इसमें से 62 फीसदी महाराष्‍ट्र से हैं। महारेरा ( महाराष्‍ट्र रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी) ने अब तक 1000 से अधिक केसों का निपटारा कर दिया है। अथॉरिटी ने पहला फैसला सितंबर 2017 में सुनाया था। इनमें से ज्‍यादा फैसले शिकायत दर्ज होने के 30 दिन के भीतर सुनाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महारेरा के फैसलों की वजह से महाराष्‍ट्र में बायर्स सेंटिमेंट में सुधार होता दिख रहा है। क्‍योंकि लगभग 78 फीसदी फैसले कंज्‍यूमर के फेवर में गए हैं। 

 

इन राज्‍यों में रूल्‍स तक नहीं बने 
रेरा अथॉरिटी तो दूर 8 राज्‍यों ने एक्‍ट के रूल्‍स तक नहीं बनाए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल है। 

 

परमानेंट अथॉरिटी तक नहीं 
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्‍ट में प्रावधान किया गया था कि 1 मई 2017 से जम्‍मू कश्‍मीर को छोड़कर सभी राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी काम करना शुरू कर देगी, लेकिन एक साल बाद भी अब तक केवल 3 राज्‍यों परमानेंट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन पाई है। इनमें महाराष्‍ट्र, मध्‍यप्रदेश व पंजाब शामिल है। बाकी राज्‍यों में एंटरिम अथॉरिटी से काम चलाया जा रहा है। 

 

अपीलेट ट्रिब्‍यूनल भी नहीं 
रिपोर्ट बताती है कि केवल 10 राज्‍यों और 5 केंद्र शासित राज्‍यों में ही अपीलेट ट्रिब्‍यूनल बनाए गए हैं। 

 

पेनल्‍टी लगाने की सिफारिश 
नाइट फ्रेंक ने रिपोर्ट में केंद्र से सिफारिश की है कि वह इस कानून को लाभ बायर्स तक पहुंचाना चाहती है तो कानून को लागू न करने वाले राज्‍यों पर पेनल्‍टी लगाए। 

 

कब क्‍या हुआ 

10 मार्च 2016 : राज्‍यसभा ने रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन बिल को मंजूरी दी 
15 मार्च 2016 : लोकसभा से भी बिल पास हो गया। 
25 मार्च 2016 : राष्‍ट्रपति ने एक्‍ट को मंजूरी दी 
26 मार्च 2016 : एक्‍ट की अधिसूचना जारी की गई 
1 मार्च 2016 : सेक्‍शन 2, 20 से 39, 41 से 58, 71 से 78 और 81 से 92 नोटिफाई किए गए
1 मार्च 2017 : शेष सभी सेक्‍शन नोटिफाई के साथ ही एक्‍ट लागू हो गया। 
राज्‍यों के लिए तय थी डेडलाइन 
एक्‍ट में प्रोविजन किया गया था कि एक्‍ट को तय समय में लागू किया जाएगा। जैसे कि - 
31 अक्‍टूबर 2016 : सभी राज्‍यों को एक्‍ट के रूल्‍स नोटिफाई करने होंगे। 
31 अक्‍टूबर 2016 : सभी राज्‍यों को एग्रीमेंट ऑफ सेल के रूल्‍स भी नोटिफाई करने होंगे। 
30 अप्रैल 2017 : सभी राज्‍यों में रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन जाएगी। 
30 अप्रैल 2017 : सभी राज्‍यों में अपीलेट ट्रिब्‍यूनल बन जाएगा। 

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