Home » Personal Finance » Property » Update17 राज्‍यों में अंतरिम रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी 17 states have interim real estate regulatory authority

भगवान भरोसे है होम बायर्स के अधिकार, 29 में से 6 राज्‍यों में ही बनी रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी

7 माह बीतने के बाद भी अब तक केवल 6 राज्‍यों में रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन पाई है

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नई दिल्‍ली। मोदी सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खूब जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं कि बिल्‍डर्स की मनमानी रोकने और होम बायर्स को उनके अधिकार देने के लिए रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्‍ट (रेरा) लागू किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि 7 माह बीतने के बाद भी अब तक केवल 6 राज्‍यों में ही रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन पाई है। यहां त‍क कि 5 राज्‍यों में अब तक रूल्‍स तक नोटिफाई नहीं हो पाए हैं। केवल महाराष्‍ट्र को छोड़ दिया जाए तो किसी भी राज्‍य में अब तक होम बायर्स की शिकायतों पर सुनवाई शुरू नहीं हुई है। 

 

क्‍या थी डेडलाइन 
रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन एक्‍ट 2016 में किए गए प्रावधान के मुताबिक, सभी राज्‍यों में 31 अप्रैल तक रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी का गठन होना चाहिए था। अथॉरिटी को तीन माह का समय दिया गया था कि वे तीन माह के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी कर दें और 1 अगस्‍त से अथॉरिटी को काम करना शुरू करना था। सभी डेवलपर्स के लिए प्रावधान किया गया था कि वे 31 जुलाई तक अपना रजिस्‍ट्रेशन अथॉरिटी में करा लें। 

 

इन राज्‍यों में तो रूल्‍स भी नहीं बने 
31 अप्रैल तक रूल्‍स नोटिफाई हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक 5 राज्‍यों में रूल्‍स नोटिफाई नहीं हुए हैं। यहां अभी रूल्‍स के ड्राफ्ट ही बन पाए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, केरल, त्रिपुरा, वेस्‍ट बंगाल और गोवा शामिल हैं। 

 

यहां बनी है रेग्‍युलर अथॉरिटी 
कायदे से अब तक राज्‍यों में कई मामले में निपट जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक मात्र 6 राज्‍यों में ही रेग्‍युलर अथॉरिटी बन पाई है। इनमें महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, दादर नागर हवेली व दमन दीव शामिल हैं। दादर नागर हवेली और दमन दीव को महाराष्‍ट्र अथॉरिटी से जोड़ा गया है। 


17 राज्‍यों में अंतरिम अथॉरिटी 
अभी भी 17 राज्‍यों में अंतरिम अथॉरिटी से काम चलाया जा रहा है। इन अंतरिम अथॉरिटी के अधिकार सीमित हैं। ये केवल अभी डेवलपर्स के रजिस्‍ट्रेशन कर रहे हैं और बायर्स की शिकायतें ले रहे हैं। इनमें केरल, राजस्‍थान, मिजोरम, हरियाणा, दिल्‍ली, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, बिहार, उत्‍तर प्रदेश, झारखंड, आसाम, उत्‍तराखंड, गोवा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी व तेलंगाना शामिल हैं। 

 

वेबसाइट ही नहीं बनी 

रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन एक्‍ट में स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि हर अथॉरिटी की अपनी वेबसाइट होगी, ताकि डेवलपर्स अपने प्रोजेक्‍ट का ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन करा सकें और होम बायर्स अपनी शिकायत ऑनलाइन कर सकें। रेरा की वेबसाइट पर ही सभी प्रोजेक्‍ट्स की डिटेल उपलब्‍ध होगी, ताकि बायर्स घर बुक कराने से पहले वेबसाइट पर प्रोजेक्‍ट की डिटेल देख सके, लेकिन अब तक केवल 5 राज्‍यों की अथॉरिटी की वेबसाइट चल रही है। इनमें महाराष्‍ट्र, मध्‍यप्रदेश, पंजाब, उत्‍तर प्रदेश व राजस्‍थान शामिल हैं। 

 

ये राज्‍य दे रहे हैं बिल्‍डर्स को मौके 
केंद्र सरकार के कानून में स्‍पष्‍ट प्रावधान किया गया था कि ऑनगोइंग प्रोजेक्‍ट्स को 31 जुलाई तक रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा।, लेकिन राज्‍यों में बिल्‍डर्स को बार-बार मौके दिए जा रहे हैं। गुजरात सरकार ने डेवलपर्स को 30 नवंबर तक अपने प्रोजेक्‍ट रजिस्‍टर कराने का समय दिया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया गया है। 
 

राज्‍यों से नहीं मिल रहा सपोर्ट 
होम बायर्स की लड़ाई लड़ रहे संगठन फाइट फॉर रेरा के संयोजक अभय उपाध्‍याय ने http://moneybhaskar.com से कहा कि केवल महाराष्‍ट्र में ही सही मायने में रेरा लागू हो पाया है। यहां मामलों की सुनवाई भी हो रही है और कुछ मामले निपटाए भी गए हैं, शेष सभी राज्‍यों में रेरा को लेकर घोर लापरवाही बरती जा रही है। होम बायर्स निराश हैं, क्‍योंकि उन्‍हें अब तक उनके अधिकार नहीं मिल पाए हैं। 

 

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