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होम बायर्स को रेरा का नहीं मिल रहा फायदा, केवल 8 राज्‍यों में ही बन पाई परमानेंट अथॉरिटी

होम बायर्स को बिल्‍डर्स से उनके घर दिलाने के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानून को लेकर राज्‍य सरकारें गंभीर नहीं हैं

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नई दिल्‍ली। होम बायर्स को बिल्‍डर्स से उनके घर दिलाने के लिए मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानून को लेकर राज्‍य सरकारें बिल्‍कुल भी गंभीर नहीं हैं। ठीक दो साल पहले 25 मार्च 2016 को राष्‍ट्रपति ने रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्‍ट (रेरा) 2016 को स्‍वीकृति दी थी, लेकिन अब तक यह एक्‍ट राज्‍यों में लागू नहीं हो पाया है। एक्‍ट 1 मई 2017 से लागू हो चुका है, लेकिन अब तक केवल 8 राज्‍यों में ही परमानेंट रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन पाई है, जबकि 3 राज्‍यों में परमानेंट अपीलेट ट्रिब्‍यूनल बना है। बायर्स संगठनों का कहना है कि राज्‍य सरकारें बिल्‍डर्स के दबाव में एक्‍ट को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। केवल महाराष्‍ट्र में ही बायर्स के शिकायतों पर कार्रवाई शुरू हुई है। 

 

कब क्‍या हुआ था ? 
बिल्‍डर्स की नकेल कसने और होम बायर्स को उनके घर दिलाने के लिए मोदी सरकार ने रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटशन एक्‍ट (रेरा) तैयार किया। 
10 मार्च 2016 : राज्‍यसभा ने रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन बिल को मंजूरी दी 
15 मार्च 2016 : लोकसभा से भी बिल पास हो गया। 
25 मार्च 2016 : राष्‍ट्रपति ने एक्‍ट को मंजूरी दी 
26 मार्च 2016 : एक्‍ट की अधिसूचना जारी की गई 
1 मार्च 2016 : सेक्‍शन 2, 20 से 39, 41 से 58, 71 से 78 और 81 से 92 नोटिफाई किए गए
1 मार्च 2017 : शेष सभी सेक्‍शन नोटिफाई के साथ ही एक्‍ट लागू हो गया। 

 

राज्‍यों के लिए तय थी डेडलाइन 
एक्‍ट में प्रोविजन किया गया था कि एक्‍ट को तय समय में लागू किया जाएगा। जैसे कि - 
31 अक्‍टूबर 2016 : सभी राज्‍यों को एक्‍ट के रूल्‍स नोटिफाई करने होंगे। 
31 अक्‍टूबर 2016 : सभी राज्‍यों को एग्रीमेंट ऑफ सेल के रूल्‍स भी नोटिफाई करने होंगे। 
30 अप्रैल 2017 : सभी राज्‍यों में रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बन जाएगी। 
30 अप्रैल 2017 : सभी राज्‍यों में अपीलेट ट्रिब्‍यूनल बन जाएगा। 

 

किन राज्‍यों में बनी परमानेंट अथॉरिटी ? 
रेरा के लिए कई सालों से लड़ाई लड़ रहे संगठन फाइट फॉर रेरा द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक केवल 8 राज्‍यों ने ही परमानेंट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बनाई है। इनमें आंध्रप्रदेश, गुजरात, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, ओडिशा, पंजाब के अलावा दो केंद्र शासित प्रदेश दादर नगर हवेली और दमन दीव में परमानेंट अथॉरिटी बन पाई है। इसके अलावा लगभग सभी राज्‍यों में एंटरिम रेग्‍युलेटर काम कर रहे हैं। 


3 राज्‍यों में बनी परमानेंट अपीलेट ट्रिब्‍यूनल 
राज्‍यों में 30 अप्रैल 2017 तक अपीलेट ट्रिब्‍यूनल बन जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल तीन राज्‍यों गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में परमानेंट अपीलेट ट्रिब्‍यूनल काम कर रहे हैं। जबकि उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्‍यप्रदेश, केरल, तेलंगाना, हिमाचल, गोवा, असम सहित सभी छोटे राज्‍यों में अब तक एंटरिम ट्रिब्‍यूनल तक नहीं नियुक्‍त किए गए हैं। शेष राज्‍यों में एंटरिम ट्रिब्‍यूनल जरूर नियुक्‍त किए गए हैं। 

 

वेब पोर्टल नहीं तो शिकायत कैसी 
एक्‍ट में स्‍पष्‍ट प्रावधान किया गया है कि हर राज्‍य में रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी की वेबसाइट बनाई जाएगी, ताकि बायर्स अपनी शिकायत ऑनलाइन कर सकें और यह चेक कर सकें कि जिस प्रोजेक्‍ट में उन्‍होंने घर बुक कराया है या कराने जा रहे हैं, वह रेरा में रजिस्‍टर है या नहीं। बावजूद इसके अभी ज्‍यादातर राज्‍यों में रेरा की वेबसाइट तक नहीं बनी है। जिन राज्‍यों में वेबसाइट काम कर रही है, उनमें आंध्रप्रदेश, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, पंजाब, राजस्‍थान, तमिलनाडु, उत्‍तर प्रदेश, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादर नगर हवेली, दमन दीव शामिल हैं। 

 

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