Home » Personal Finance » Property » UpdateDevelopers appreciate govt decision on Unitech - यूनिटेक के फैसले का डेवलपर्स ने किया स्‍वागत

​यूनिटेक के बाद जेपी, आम्रपाली पर होम बायर्स की नजर, पूरे देश में 11 लाख फ्लैट्स हैं अटके

यूनिटेक का मैनेजमेंट अपना हाथ में लेने के सरकार के फैसले से होम बायर्स काफी खुश हैं

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नई दिल्‍ली। रियल एस्‍टेट कंपनी यूनिटेक का मैनेजमेंट अपना हाथ में लेने के सरकार के फैसले से जहां होम बायर्स काफी खुश हैं, वहीं डेवलपर्स का कहना है कि इस फैसले से उन डेवलपर्स पर दबाव बढ़ेगा, जो होम बायर्स से पैसा लेने के बावजूद उनके घर नहीं दे रहे हैं। डेवलपर्स के मुताबिक, सरकार और एनसीएलटी का यह फैसला सेक्‍टर को मजबूती देगा और सेक्‍टर पर बायर्स का विश्‍वास बढ़ेगा। इस समय देश भर में लगभग 11 लाख फ्लैट्स ऐसे हैं, जो अटके हुए हैं और उनके बायर्स परेशान हैं। 

 

क्‍या है मामला 
शुक्रवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सरकार को यह अधिकार दे दिया कि वह यूनिटेक के बोर्ड में अपने डायरेक्टर्स नियुक्त करें। सरकार को 10 डायरेक्टर्स के नाम 20 दिसंबर तक सबमिट करने हैं। दो सदस्यों वाली एनसीएलटी बेंच ने यह निर्देश दिया। साथ ही, यह भी कहा कि कंपनी के मौजूदा डायरेक्टर्स न तो कंपनी के और न ही पर्सनल एसेट्स बेच सकते हैं। इसके पहले सरकार ने एनसीएलटी में कंपनी का कंट्रोल लेने के लिए याचिका दायर की थी। कंपनी मैनेजमेंट पर खरीददारों से जुटाए गए फंड का मिसयूज करने का आरोप है। 

 

जेपी और आम्रपाली पर नजर 
यूनिटेक पर आए इस ऐतिहासिक फैसले से यूनिटेक के होम बायर्स के बाद जेपी और आम्रपाली सबसे अधिक खुश हैं। इन बायर्स का कहना है कि अब सरकार को जेपी और आम्रपाली का मैनेजमेंट भी अपने हाथ में लेना चाहिए। इससे बायर्स को उनके घर मिल जाएंगे। दोनों डेवलपर्स के बायर्स इस सिलसिले में अगले सप्‍ताह सरकार को अपना-अपना रिप्रजेंटेशन देंगे। 

 

क्‍या चाहते हैं यूनिटेक के बायर्स 
एसोसिएशन ऑफ यूनिटेक होम बायर्स एंड एफडी कस्‍टमर्स के प्रेसिडेंट विवेक त्‍यागी ने moneybhaskar.com से कहा कि सरकार ने बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक 90 फीसदी होम बायर्स अपना पैसा रिफंड चाहते थे, लेकिन अब हमें लगता है कि हमें हमारे फ्लैट मिल जाएंगे। उन्‍होंने बताया कि हम अगले सप्‍ताह फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली से मिलेंगे और इस फैसले के लिए धन्‍यवाद देने के साथ-साथ उनसे अपील करेंगे कि यूनिटेक की मैनेजमेंट बोर्ड में बायर्स के भी दो-तीन सदस्‍यों को शामिल किया जाए। 

 

बायर्स की उम्‍मीद बढ़ी 
एनसीएलटी में रियल एस्‍टेट डेवलपर जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड का भी मामला चल रहा है। इंडिपेंडेंट रिजोल्‍यूवशन प्रोफेशनल (आईआरपी) इस मामले का समाधान कर रहे हैं। अब जेपी के बायर्स को भी उम्‍मीद जगी है कि सरकार उनके मामले में भी आगे आएगी। जेपी बायर्स एसोसिएशन से जुड़े एस.के. पुरी ने कहा कि जेपी के बायर्स मिलकर अगले सप्‍ताह कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्‍ट्री व फाइनेंस मिनिस्‍ट्री जाकर अपील करेंगे कि सरकार जेपी के प्रोजेक्‍ट्स भी अपने हाथ में लेकर हमें हमारे घर दिलाए। 

 

सेक्‍टर पर पड़ेगा अच्‍छा असर 
नेशनल रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट कॉउंसिल (नारेडको) के उपाध्‍यक्ष गौरव जैन ने moneybhaskar.com से कहा कि यह अच्‍छा फैसला है। इससे बेशक डेवलपर्स पर अपने प्रोजेक्‍ट्स पूरा करने का दबाव बढ़ेगा, लेकिन इससे बायर्स का रियल एस्‍टेट सेक्‍टर पर विश्‍वास बढ़ेगा, जिसका फायदा सेक्‍टर को मिलेगा। 

 

11 लाख फ्लैट्स हैं डिले 
अलग-अलग रिपोर्ट्स बताती है कि 11 लाख से अधिक फ्लैट्स ऐसे हैं, जो अधूरे पड़े हैं। डेवलपर्स अपने प्रोजेक्‍ट्स पूरे नहीं कर पा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि डेवलपर्स ने होम बायर्स से लिया पैसा दूसरे प्रोजेक्‍ट्स में लगाते चले गए, जिस कारण मार्केट में सुस्‍ती आने के बाद उनके पास पैसा खत्‍म हो गया और उनके सारे प्रोजेक्‍ट्स अटक गए हैं। पिछले दिनों केंद्र की ओर से बॉम्‍बे हाईकोर्ट को बताया गया था कि अकेले मुंबई में 5.5 लाख फ्लैट्स अधूरे हैं। इसी तरह दिल्‍ली-एनसीआर में लगभग 4 लाख फ्लैट्स अधूरे हैं। उम्‍मीद जताई जा रही है कि यूनिटेक के मामले में सरकार द्वारा उठाए गए अब तक सबसे सख्‍त कदम से डेवलपर्स अपने इन प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करने के लिए पुरजोर कोशिश में जुट जाएंगे। 

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