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TIPS: कर लीजिए इन नोटों की पहचान, कुछ दिनों बाद हो जाएंगे रद्दी

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जल्द ही 10 रुपए के सिक्‍के लॉन्‍च करने जा रहा है।

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नई दि‍ल्‍ली. नोट सभी की जेब में होते हैं। अधिकतर लोगों का बैंक में भी रोज आना-जाना होता है, लेकिन अभी तक आपने शायद इस बात पर ध्यान नहीं दिया हो। आपकी जेब में पड़े 100, 500, 1000 के पुराने(2005 से पहले के) नोट बेकार होने वाले हैं। ऐसे नोट जिनकी छपाई 2005 से पहले हुई है, आरबीआई उन्हें एक जून से बंद करने जा रहा है। ऐसे में इन नोटों की पहचान जरूरी है। हम आपको स्टेप वाइज बताएंगे कैसे इन नोटों की पहचान करें और फिर इन्हें बैंक जाकर बदल लें।
 
पहले समझते हैं बैंक इन्हें क्यों बंद कर रहा है...
 
क्यों बंद कर रहा है आरबीआई
 
रिजर्व बैंक ने 22 जनवरी 2014 को 2005 से पहले छपे नोटों को बंद करने का फैसला किया था। दरअसल, 2005 के बाद छपे नोटों में सुरक्षा से जुड़े फीचर अधिक हैं, जिससे जाली नोटों के चलन में आने से रोकने में मदद मिलती है। सुरक्षा फीचर्स को समझना भी बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगली पांच स्लाइड में हम आपको सभी फीचर्स से अवगत कराएंगे। 
 
अब समझिए कैसे होगी इन नोटों की पहचान
 
अगर आप नोटों की पहचान को लेकर चिंतित हैं तो इन्हें पहचानना बेहद आसान है। 2005 के पहले जिन नोटों की छपाई हुई है उनमें छपाई का साल नहीं लिखा होता। जबकि, 2005 के बाद छपे नोटों पर छपाई का वर्ष(ऊपर तस्वीर में) साफ दिखाई पड़ता है। नोट के पिछले हिस्से में छपाई का साल लिखा होता है। अगर आपके किसी नोट पर छपाई का वर्ष नहीं है तो उसे बदल लें।
कैसे बदलें पुराने नोट
 
पुराने नोट बदलने के लिए बैंक शाखाओं और आरबीआई के काउंटरों में जाकर लोग इन्हें बदल सकते हैं। बैंकों की सभी शाखाओं में 2005 के पहले के नोटों को बदलने की प्रक्रिया जारी है। बैंक अधिकारियों के अनुसार ऐसे नोटों के लिए लोगों को अपना अकाउंट नंबर और आइडेंटिटी प्रूफ देना होगा। यदि किसी का अकाउंट नहीं है तो इसके लिए उसे अपना एड्रेस प्रूफ देना होगा। अभी तक लगभग 150 करोड़ नोट अलग किए हैं, जिनका मूल्य तकरीबन 52,855 करोड़ रुपए है।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ें, बैंकों में बदले जा रहे हैं पुराने नोट...
 
नोटः तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
 
अकाउंट नहीं तो एड्रेस प्रूफ भी दिखाना होगा
 
ये नोट उन बैंकों से बदले जा सकते हैं, जहां ग्राहक का अकाउंट उनके यहां हो, लेकिन जिन लोगों के पास अकाउंट नहीं है उन्हें बैंक में अपना पहचान पत्र दिखाना होगा जिस पर उनके घर का पता हो। पुराने नोट बदलने के लिए बैंक शाखाओं और आरबीआई के काउंटरों में जाकर लोग इन्हें बदल सकते हैं।
 
बाजार में आएगी नई करंसी
 
आरबीआई ने सुरक्षा मानकों, नोटों में फजीर्वाड़ा रोकने, खराब मुद्रा को चलन से बाहर करने समेत विभिन्न बिंदुओं पर विचार के बाद 2005 से पहले के नोटों के स्थान पर नई करेंसी बाजार में उतारने की योजना बनाई है। इसके लिए एक जनवरी 2015 से बाजार में नए नोट उतारने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद 2005 से पहले के नोट बाजार में चलन से बाहर हो जाएंगे।
 
आगे की स्लाइड में जाने सुरक्षा से जुड़े फीचर्स के बारे में...
 
वाटर मार्क
 
किसी भी नोट पर वाटर मार्क जरूर देखें। सभी असली नोटों में महात्मा गांधी की फोटो बनी है। उसी फोटो को हल्के शेड में वाटरमार्क में भी बनाया गया है। जब नोट को आप थोड़ा तीरछा करेंगे तो यह दिखाई देगा।
 
सिक्योरिटी थ्रेड
 
इसके बाद सिक्योरिटी थ्रेड पर गौर करें। नोट के बीच में यह सीधी लाइन के रूप में होता है। जिस पर हिंदी में भारत और आरबीआई लिखा होता है। नकली नोट में ये काफी मोटा दिखाई देता है और आरबीआई व भारत क्लियर नहीं होता। ज्यादातर मार्केट में इसे ही ध्यान में रखकर असली नकली की पहचान की जाती है।
 
लेटेंट इमेज
 
नोट पर गांधी जी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है, जिसमें जितने का नोट है उसकी संख्या लिखी होती है। नोट को सीधा करने पर ही यह दिखाई देती है। जबकि नकली नोट में ये इमेज उभर कर नहीं आती।
 
माइक्रोलेटरिंग
 
नोट में बनी गांधी जी की फोटो टीक बाजू में माइक्रोलेटरिंग होती है। 5 रुपए, 10 रुपए और 20 रुपए के नोट में यहां पर आरबीआई लिखा होता है। इनसे ऊपर के नोटों में नोट वेल्यू होती है। जैसे 500 रुपए के नोट में माइक्रोलेटर्स में 500 लिखा होता है। यही असली नोट की पहचान है।
 
इंटेग्लिओ प्रिंटिंग
 
नोट पर विशेष प्रकार की प्रिटिंग इंक उपयोग की जाती है। इस इंक की वजह से महात्मा गांधी की फोटो, आरबीआई की सील और प्रोमाइसिस क्लॉस, आरबीआई गवर्नर के साइन को टच करने पर यह उभरे हुए महसूस होते हैं। इन्हें हाथ से महसूस किया जा सकता है।
 
आईडेंटिफिकेशन मार्क
 
यह खास तरह का मार्क होता है जो वाटर मार्क के बाईं ओर होता है। सभी नोटों में यह अलग आकार का होता है। 20 रुपए में ये वर्टिकल रेक्टेंगल, 50 रुपए में चकोर, 100 रुपए में ट्राइएंगल, 500 रुपए में गोल और 1000 रुपए में डायमंड शेप में होता है।
 
फ्लोरेसेंस
 
नोट पर नीचे की ओर विशेष नंबर होते हैं जो कि इसकी सीरीज को दर्शाते हें। इन्हें फोरेसेंस इंक से प्रिंट किया जाता है। जब नोट को अल्ट्रा वॉइलेट लाइट में ले जाया जाता है तो ये नंबर उभर कर दिखाई देते हैं।
 
ऑप्टिकल वेरिएबल इंक
 
इस विशेष इंक का इस्तेमाल 1000 और 500 के नोट में किया गया है। नोट में बीचों बीच लिखे 500 और 1000 के अंक को प्रिंट करने में इस इंक का उपयोग किया जाता है। जब नोट फ्लैट होता है तो ये अंक हरे रंग के दिखाई देते हैं और इसके एंगल को बदलने पर इनका कलर बदल जाता है।
 
सी थ्रू रजिस्ट्रेशन
 
वाटर मार्क के साइड में यह फ्लोरल डिजाइन के रूप में होता है। यह नोट के दोनो साइड दिखाई देता है। एक साइड यह रिक्त होता है और दूसरी साइड यह भरा हुआ दिखाई देता है। इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन ध्यान से देखने पर इसे देखा जा सकता है।
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