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खास खबर: प्राइवेट बैंकों का दामन भी नहीं रहा साफ, कितना कारगर होगा पीएसयू बैंकों का निजीकरण

विजय माल्या, नीरव मोदी का फ्रॉड, पीएसयू बैंकों का 10 लाख करोड़ से ज्यादा एनपीए, सीएमडी से लेकर क्लर्क तक सीबीआई जांच के

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नई दिल्‍ली। विजय माल्या, नीरव मोदी का फ्रॉड, पीएसयू बैंकों का 10 लाख करोड़ से ज्यादा एनपीए, सीएमडी से लेकर क्लर्क तक सीबीआई जांच के घेरे में, ये ऐसे फैक्टस हैं आज पब्लिक सेक्टर बैंक की पहचान गए है। बीमारी इतनी बढ़ गई है कि अब इसकी दवा केवल प्राइवेटाजेशन को माना जा रहा है। लेकिन क्या यह दवा कारगर होगी, वह भी तब जब देश के दो प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंक के मुखिया पर भी सवाल उठ गए हैं। चाहे आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर हो या फिर एक्सिस बैंक की एमडी एंड सीईओ शिखा शर्मा। इनकी भूमिका जिस तरह सामने आई है, उससे प्राइवेट बैंकों को पाक-साफ नहीं कहा जा सकता है। ऐस में सवाल यह है कि क्‍या पीएसयू बैंकों के निजीकरण से समस्‍या का समाधान होगा। 

 

पीएसयू बैंकों का क्‍यों हो निजीकरण 


 नीति निर्माताओं और कॉरपोरेट का एक वर्ग पीएसयू बैंकों के निजीकरण को समय की जरूरत बता रहा है। वित्‍त मंत्रालय के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यन पीएसयू बैंकों  के निजीकरण की वकालत कर चुके हैं। वहीं हाल में नीति आयोग के पूर्व अध्‍यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने भी भारतीय स्‍टेट बैंक को छोड़ कर बाकी पीएसयू बैंकों का निजीकरण करने की बात कही है। इसके अलावा इकोनॉमिस्‍ट भी पीएसयू बैंकों में काम काज का सुधारने के लिए निजीकरण ही एक मात्र विकल्‍प बता रहे हैं। इकोनामिस्‍ट पई पनिन्‍दकर ने moneybhaskar.com को बताया कि पीएसयू बैंकों में सरकारी हस्‍तक्षेप काफी ज्‍यादा है। इन बैंकों का काम काज सुधारने के लिए निजीकरण करना एक सही कदम होगा। इससे काफी फायदा होगा। पनिन्‍दकर का कहना है कि बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण इंदिरा गांधी का राजनीतिक कदम था। इससे आम जनता को कोई खास फायदा नहीं हुआ। इन्‍फोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पई ने भी अरविंद पनगढ़िया के विचारों से सहमति जताई है। उनका कहना है कि पीएसयू बैंकों को अपने काम काज में स्‍वतंत्र रहने की जरूरत है। मौजूदा समय में समस्‍या मालिक को लेकर है जो पीएसयू बैंकों को दक्षता के साथ काम नहीं करने दे रहा है। 

 

 

पीएसयू बैंकों का क्‍यों न हो निजीकरण 

 

वहीं बैंकर्स का एक वर्ग पीएसयू बैंकों के निजीकरण का विरोध कर रहा है। बैंकर्स का कहना है कि अतीत में कई प्राइवेट बैंक भी फेल हुए हैं। ऐसे में यह जरूरी नहीं है कि पीएसयू बैंकों के निजीकरण से तमाम समस्‍याएं दूर हो जाएंगी। इन बैंकर्स का कहना है कि पीएसयू बैंकों में राजनीतिक हस्‍तक्षेप खत्‍म करने और मौजूदा नियमों को सख्‍ती से लागू करने की जरूरत है। इससे पीएसयू बैंकों के काम काज में सुधार होगा। भारतीय स्‍टेट बैंक के पूर्व सीजीएम सुनील पंत का कहना है कि कई प्राइवेट बैंक फेल हो चुके हैं। ऐसे में पीएसयू बैंकों का निजीकरण एक सही कदम नहीं होगा। पीएसयू बैंकों में लोन देने के सिस्‍टम से लेकर समूचे तंत्र को ज्‍यादा जवाबदेह बनाने की जरूरत है। इसके अलावा पीएसयू बैंकों के सिस्‍टम को मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के जरिए इस तरह से अपडेट किया जाए कि पीएनबी फ्रॉड जैसी घटनाएं दोबारा न हो पाएं। वहीं पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व जीएम जीएस बिंद्रा का कहना है कि अगर एनपीए की बात करें तो प्राइवेट सेक्‍टर का कॉरपोरेट लोन में एक्‍सपोजर पीएसयू बैंकों की तुलना में काफी कम है। हालांकि अब उनका भी एनपीए बढ़ रहा है। 

 

 

पीएसयू बैंक चलाते हैं सोशल स्‍क्‍ीम 

 

इसके अलावा बड़ा सवाल यह भी है कि पीएसयू बैंक सोशल सेक्‍टर की तमाम स्‍कीमें चलाते हैं जो वित्‍तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए हैं। इन स्‍कीमों का क्‍या होगा। नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्‍यक्ष अश्विनी राणा का कहना है कि पीएसयू बैंक जन धन अकाउंट सहित तमाम सोशल स्‍क्‍ीमें चलाते हें जिससे ऐसे लोगों को बैंकिंग सुविधाएं मिल रहीं है जो अब तक इससे वंचित थे। क्‍या प्राइवेट सेक्‍टर के बैंक इस तरह की स्‍कीम चला सकते हैं। 

 


प्राइवेट बैंकों पर भी उठ रहे हैं सवाल 
 

पिछले एक दशक में प्राइवेट सेक्‍टर ने कारोबार के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंकिंग सेक्‍टर के कुल कर्ज में प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों की बाजार हिस्‍सेदारी 31 मार्च, 2017 तक 27.5 फीसदी थी। रेटिंग एजेंसी नोमुरा का कहना है कि बढ़ते एनपीए की वजह से पीएसयू बैंकों ने कर्ज देने में सख्‍ती शुरू कर दी है। ऐसे में 2020 तक बैकिंग सेक्‍टर के कुल कर्ज में प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों की हिस्‍सेदारी बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच सकती है।  लेकिन अब प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों के काम काज पर भी सवाल उठ रहे हैं। नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद करने के मामले में रिजर्व बैंक के प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों पर जुर्माना लगाया था। इस बात वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए का लोन मिलीभग से देने को लेकर आईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर और बैंक के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है। 


बैंकिंग सिस्‍टम में सुधार के लिए सरकार उठा रही है कदम 
 

-बैकिंग सिस्‍टम को सुधारने पर रिजर्व बैंक और सरकार गंभीर 
-सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म करेगा रिजर्व बैंक 
-लोन देने की प्रक्रिया में होंगे बदलाव 
-करप्‍शन पूरी तरह से खत्‍म करना मुश्किल 
 

इकोनॉमिस्‍ट पई पनिंदकर ने moneybhaskar को बताया कि पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद रिजर्व बैंक और सरकार बैकिंग सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म कराने के लिए कदम उठा रहे हैं। इस मसले पर रिजर्व बैंक और सरकार का इरादा भी साफ दिखता है कि वे बैकिंग सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म कर देंगे। हालांकि बैकिंग सिस्‍टम से करप्‍शन को पूरी तरह से खत्‍म करना संभव नहीं है। रिजर्व बैंक ने सिस्‍टम में फेल्‍योर को खत्‍म करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत अब बैंकों को भी अनफंडेड एक्टिविटीज जेसे गारंटी देने को भी कोर बिजनेस में शामिल करना होगा। 

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