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बढ़ते NPA के कारण RBI की बैंक ऑफ इंडिया पर नजर, लिया ‘करेक्टिव एक्‍शन’

नई दिल्‍ली। लगातार बढ़ते एनपीए को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) को आगाह किया है और उसके खिलाफ करेक्टिव एक्‍शन लिया है। आरबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया के फ्रेश लोन और डिविडेंड डिस्ट्रिब्‍यूशन पर भी रोक लगा दी है। बीओआई ने बुधवार को यह जानकारी स्‍टॉक एक्‍सचेंज को दी।

 

स्‍टॉक एक्‍सचेंज का दी जानकारी

स्‍टॉक एक्‍सचेंज को लिखे पत्र में बीओआई ने कहा है आरबीआई ने उसे करेक्टिव एक्‍शन फ्रेमवर्क के तहत रखा है और रिस्‍क बेस्‍ड सुपरविजन मॉडल के तहत उसका सुपरविजन किया जा रहा है।

 

क्‍या है कारण

बीओआई ने कहा कि नेट एनपीए में बढ़ने, इनसेफिशिएंट सीईटी1 के कैपिटल और नेगेटिव आरओए (रिटर्न ऑन एसेट) के कारण यह कदम उठाए गए हैं। इस एक्‍शन से बैंक के रिस्‍क मैनेजमेंट, एसेट क्‍वालिटी, प्रॉफिट, एफिशिएंसी में ओवरऑल इंप्रूवमेंट होगा।

 

एसेट क्‍वालिटी खराब

बैंक ने बताया कि मार्च 2017 में समाप्‍त हुए साल में बैंक की एसेट क्‍वालिटी खराब रही। बैंक के ग्रोस एनपीए पिछले साल 13.07 फीसदी था, जो मार्च 2017 में 13.22 फीसदी तक पहुंच गया। हालांकि नेट एनपीए में इंप्रूवमेंट हुआ और 7.79 से घटकर 6.90 फीसदी पर पहुंच गया।

 

घटने लगा एनपीए

साल 2017-18 के सितंबर के दूसरे क्‍वार्टर में एसेट क्‍वालिटी में इम्‍प्रूवमेंट हुआ और ग्रॉस एनपीए में कमी रिकॉर्ड की गई। पिछले साल सितंबर के दूसरे क्‍वार्टर में ग्रोस एनपीए 13.45 था, जो घटकर 12.62 फीसदी पर पहुंच गया। नेट एनपीए में भी सुधार हुआ और 7.56 फीसदी से घटकर 6.47 फीसदी पहुंच गया।

बैंक के मुताबिक, ग्रॉस एनपीए सितंबर 2017 में 49306.90 करोड़ था, जो पिछले साल 52261.95 करोड़ था।

 

अन्‍य बैंकों पर भी हुई कार्रवाई

आरबीआई ने इसी तरह का एक्‍शन कई अन्‍य पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों के खिलाफ भी उठाया है, जिसमें आईडीबीआई, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक शामिल हैं। 

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