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खास खबर: 'बिग बैंक लूट' के बाद क्‍या बैंकों की गंदगी साफ कर पाएगी सरकार

पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपए का फ्रॉड सामने आने के बाद जैसे जैसे जांच एजेंसियों और सरकार ने इस मामले में एक्‍श

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नई दिल्‍ली। पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपए का फ्रॉड सामने आने के बाद जैसे जैसे जांच एजेंसियों और सरकार ने इस मामले में एक्‍शन को लेकर तेजी दिखाई। उसी तेजी के साथ बैंकिंग व्‍यवस्‍था की सड़ांध भी बाहर आने लगी है। बैंक प्रबंधन में अब ऐसे मामलों को सीबीआई को रिपोर्ट करने की होड़ लग गई है जहां उनको लगा कि लोन गलत तरीके से दिया गया है और लोन लेने वाला इसे चुकाने का इरादा नहीं रखता है।

 

अब तक जो मामले समाने आए हैं उससे यह पता चलता है कि बड़े कारोबारियों ने बैंकर्स की मिलीभगत से जरूरी मानकों को पूरा किए बिना ही हजारों करोड़ का लोन लिया और अब वे लोन नहीं चुकाना चाहते हैं। इसमें से कुछ मामलें पिछले चार पांच सालों के हैं। बैकिंग सिस्‍टम में इतने बड़े पैमाने पर लूट पहले कभी नही दिखी। इस लूट पर आम लोगों के रिएक्‍शन से चिंतित सरकार और नियामकीय संस्‍थाएं भी बैकिंग सिस्‍टम में मौजूद खामियों ओर खतरों की पहचान कर इन्‍हें दूर करने के लिए तेजी से कदम उठा रहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्‍या सरकार बैकिंग सिस्‍टम की गंदगी को दूर कर पाएगी जिससे आम आदमी का पीएसयू बैंकों में भरोसा फिर से बहाल हो। 

 

बिग बैंक लूट

 

-8.50 लाख करोड़ का एनपीए 
-माल्या, नीरव मोदी जैसे डिफॉल्टर के आगे बैंक मजबूर
-बड़े अधिकारी से लेकर छोटे बैंक अफसर लूट में शामिल
-बैंक लोन में पॉलिटिकल हस्तक्षेप के आरोप

 

क्‍या हो रहा है एक्‍शन 

 

-800 से ज्‍यादा डिफॉल्‍टर्स के मामले जा सकते हैं सीबीआई के पास 
-50 करोड़ से ज्‍यादा के लोन पर अब देनी होगी पासपोर्ट डिटेल 
-32 बैंकों के शीर्ष अधिकारियों से SFIO  कर रहा पूछताछ 
-पीएनबी बैंक फ्रॉड 13,000 करोड़ रुपए का

 

बड़े पैमाने पर होगा बैकिंग सिस्‍टम में बदलाव 

 

-बैकिंग सिस्‍टम को सुधारने पर रिजर्व बैंक और सरकार गंभीर 
-सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म करेगा रिजर्व बैंक 
-लोन देने की प्रक्रिया में होंगे बदलाव 
-करप्‍शन पूरी तरह से खत्‍म करना मुश्किल 

 

इकोनॉमिस्‍ट पई पनिंदकर ने moneybhaskar को बताया कि पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद रिजर्व बैंक और सरकार बैकिंग सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म कराने के लिए कदम उठा रहे हैं। इस मसले पर रिजर्व बैंक और सरकार का इरादा भी साफ दिखता है कि वे बैकिंग सिस्‍टम के फेल्‍योर को खत्‍म कर देंगे। हालांकि बैकिंग सिस्‍टम से करप्‍शन को पूरी तरह से खत्‍म करना संभव नहीं है। रिजर्व बैंक ने सिस्‍टम में फेल्‍योर को खत्‍म करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत अब बैंकों को भी अनफंडेड एक्टिविटीज जेसे गारंटी देने को भी कोर बिजनेस में शामिल करना होगा। 

 

लोन देने की प्रक्रिया में होंगे बदलाव 

 

पई पनिंदकर का कहना है कि आने वाले समय में बैंकिंग सिस्‍टम में बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे। इसके तहत हो सकता है कि लोन मंजूर करने की प्रक्रिया को ज्‍यादा पारदर्शी बनाया जाए। मौजूदा समय में कोई लोन मंजूर होता है तो इसको मंजूरी देने में एक या दो लोग शामिल होते हैं। अब ऐसा हो सकता है कि लोन मंजूर होने की जानकारी 7 से 8 लोगों को हो। ऐसे में गलत तरीके से लोन मंजूर होने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। 

 

लोन देने में एक आदमी का बनाया जाए जिम्‍मेदार 

 

पीएसयू और प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का कुल एनपीए 8.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। एसबीआई के पूर्व सीजीएम सुनील पंत का कहना है कि मौजूदा समय में लोन को मंजूरी देने में कमेटी एप्रोच चल रही है। इस कमेटी में चार या पांच लोग होते हैं। बाद में लोन को लेकर कोई दिक्‍कत पैदा होती है तो किसी एक आदमी को ब्‍लेम करना मुश्किल होता है। अगर यह लोन किसी एक आदमी के सिग्‍नेचर से मंजूर हो जिसे इंडीविजुअल एप्रोच कहते हैं तो वह व्‍यक्ति इस प्रक्रिया में ज्‍यादा दिमाग लगाएगा क्‍योंकि इस प्रक्रिया में उसका पर्सनल स्‍टेक है। 

इंटरनल फ्रॉड के और मामले आएंगे सामने 

 

सुनील पंत का कहना है कि पीएनबी फ्रॉड के बाद रिजर्व बैंक और सरकार जिस तरह से एक्‍शन में है। ऐसे में बैंकों में इंटरनल फ्रॉड के और मामले सामने आ सकते हैं। बैंकों में अब बड़े पैमाने पर ट्रांसफर हो रहे हैं। जब उस पर नए लोग आएंगे तो फ्रॉड के नए मामले आएंगे। निहित स्‍वार्थ की वजह से बड़े पैमाने पर बैंक कर्मी एक ही जगह पर जमे हुए थे। लेकिन रिजर्व बैंक और सरकार ने इराद दिखाया है कि वे बैंकिंग सिस्‍टम की कमियों को दूर करना चाहते हैं। इसी वजह से बड़े पैमाने पर फ्रॉड और गलत तरीके से लोन देने के मामले सामने आ रहे हैं। 

 

बिजनेस के लिए बैंकिंग की गुणवत्‍ता से किया गया समझौता 

 

पीएसयू बैंकों में बड़े कारोबारियों को गलत तरीके से लोन देने के मामले पर सुनील पंत का कहना है कि पिछले 10-15 सालों के दौरान बिजनेस बढ़ाने के लिए बैकिंग की गुणवत्‍ता से समझौता किया गया। इससे बैंकों का बिजनेस तो बढ़ गया लेकिन नतीजा अब 8.50 करोड़ से अधिक एनपीए के तौर पर सामने आ रहा है। साफ है कि बैंकों ने अनाप शनाप लोन दिए जबकि यह नहीं देखा कि प्रोजेक्‍ट आर्थिक तौर पर वहनीय है या नहीं। यानी बड़े अधिकारी से लेकर छोटे बैंक अफसर तक इस लूट में शामिल रहै हैं। बड़े कारोबारियों को लोन देने की प्रक्रिया में राजनीतिक दखल भी एक सच्‍चाई रही है। 

 

 


 

 

 

 

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