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कॉरपोरेट फ्रॉड 3 साल में सबसे ज्यादा, SFIO ने इस पीरियड में निपटाए 60% मामले

मोदी सरकार के कार्यकाल में कॉरपोरेट फ्रॉड के मामले काफी तेजी से बढ़े है

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के कार्यकाल में कॉरपोरेट फ्रॉड के मामले काफी तेजी से बढ़े है। साल 2014-15 से लेकर 2016-17 के बीच में सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑर्गनाइजेशन (SFIO) ने 186 मामलों की जांच की है। जो कि पिछले 15 साल में उसके द्वारा जांच किए गए कुल मामलों का करीब 60 फीसदी है। यानी कॉरपोरेट फ्रॉड के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। साथ ही इस तरह के मामलों के आगे और तेजी से बढ़ने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार जांच एजेंसी की कोशिश है कि ज्यादातर पर जल्द से जल्द निपटाएं जाएं।

 
कैसे बढ़े मामले
 
सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑर्गनाइजेशन (SFIO)से moneybhaskar.com को मिली जानकारी के अनुसार 2003-04 से लेकर 2016-17 तक ऑर्गनाइजेशन ने 312 मामलों की जांच की है। इसमें से 186 मामले 2014-15 से लेकर 2016-17 के बीच के हैं। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से कॉरपोरेट फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े है। इसकी एक वजह सरकार का सख्त एक्शन भी है। अधिकारी के अनुसार साथ ही ऑर्गनाइजेशन की एफिशिएंसी भी बढ़ी है जिसके कारण जांच से तेजी से की जा रही है। जिसका असर डाटा में दिख रहा है।
 
साल कितने मामले की हुई जांच
2003-04 1
2004-05 3
2005-06 8
2006-07 17
2007-08 1
2008-09 7
2009-10 12
2010-11 13
2011-12 20
2012-13 22
2013-14 22
2014-15 39
2015-16 60
2016-17 87

 
 
 
पीएनबीए जैसे फ्रॉड क्यों नहीं पकड़ता SFIO
 
आईसीएआई के पूर्व चेयरमैन अमरजीत चोपड़ा के अनुसार इन डाटा से साफ है कि कॉरपोरेट फ्रॉड के मामले बढ़े है। इसकी वजह यह भी हो सकती है सरकार की सख्ती के कारण अब एक्शन ज्यादा हो रहे हैं। हालांकि मेरा मानना है कि अभी SFIO ज्यादातर छोटे मामले ही सामने ला पाता है। पीएनबी जैसे फ्रॉड को रोकने के लिए उसके पास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। ऐसे में जरुरी है कि सरकार SFIO को ज्यादा पॉवर दे। साथ ही उसके लिए संसाधन  भी बढ़ाए। जिसमें टेक्निकल से लेकर दूसरे संसाधन जरुरी है। इसके लिए SFIO को आउटसोर्सिंग स्ट्रैटेजी पर भी काम करना चाहिए।
 
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