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शेयर बाजार में तेजी ने बिगाड़ा बैंकों का बिजनेस, म्‍युचुअल फंड से ज्‍यादा पैसे जुटा रही हैं कंपनियां

स्टॉक मार्केट की रिकॉर्ड ऊंचाई ने कॉरपोरेट्स के पैसे जुटाने के तरीकों को ही उलट दिया है।

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नई दिल्ली. स्टॉक मार्केट की रिकॉर्ड ऊंचाई ने कॉरपोरेट्स के पैसे जुटाने के तरीकों को ही उलट दिया है। कॉरपोरेट्स अब बैंक की जगह दूसरे ओपेन मार्केट सोर्स से पूंजी जुटाने पर फोकस कर रहे हैं। इस बात का खुलासा आरबीआई की एक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, म्युचुअल फंड कॉरपोरेट की पहली पसंद इस समय है। जिनके जरिए वह काफी पूंजी जुटा रहे हैं।

 
कॉरपोरेट्स ने साल साल 2017 में करीब 14500 अरब रुपए नॉन बैंकिंग सोर्स से जुटाएं हैं। जो कि उनके द्वारा जुटाई गई कुल पूंजी का 61.6 फीसदी है। कॉरपोरेट ने इसी के तहत डेट म्युचुअल फंड का पूंजी जुटाने में प्रमुख रुप से यूज किया है। जिसकी म्युचुअल फंड के टोटल एयूएम में 40 फीसदी तक हिस्सेदारी पहुंच गई है।
 

क्या कहते हैं आंकड़े?

आरबीआई द्वारा कॉरपोरेट द्वारा कर्ज लेने के पैटर्न पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार साल पिछले कॉरपोरेट द्वारा पूंजी जुटाने का तरीका पूरी तरह से रिवर्स हो गया है। पिछले 6 साल के आंकड़ों को देखा जाय, तो ज्यादातर समय कॉरपोरेट बैंकों से ज्यादा कर्ज लेते रहे हैं। पिछले 6 साल में कॉरपोरेट द्वारा लिए गए कर्ज में बैंकों की हिस्सेदारी 55 फीसदी के करीब रही है। जो कि अब 40 फीसदी से भी नीचे आ गई है। साल 2017 में यह बैंकों की हिस्सेदारी गिरकर 38.4 फीसदी रह गई है।
 
साल नॉन बैंक शेयर (फीसदी) बैंक शेयर (फीसदी)
2010-11 43.7 56.3
2011-12 44.3 55.7
2012-13 51.7 48.3
2013-14 46.0 54.0
2014-15 54.5 45.5
2015-16 47.7 52.3
2016-17 61.6 38.4
 

(स्रोत: RBI)

 
म्युचुअल फंड पर बड़ा भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट्स ने स्टॉक मार्केट की तेजी का फायदा उठाते हुए म्युचुअल फंड पर ज्यादा दांव लगाया है। अप्रैल 2015 से सितंबर 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार डेट म्युचुअल फंड में कॉरपोरेट डेट की हिस्सेदारी बड़ी तेजी से बढ़ी है। अप्रैल 2015 में जहां टोटल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में कॉरपोरेट डेट की हिस्सेदारी 10 फीसदी के करीब थी, अब सितंबर 2017 तक बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गई है।
 

बैंकिंग सिस्टम के लिए रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों की घटती क्रेडिट ग्रोथ आने वाले दिनों में एक नया चैलेंज खड़ा कर सकती है। उसके अनुसार अगर बैंक म्युचुअल फंड इंडस्ट्री से मुकाबला करेंगे, तो उन्हें अपने क्रेडिट पैटर्न और उसके तरीकों में बदलाव करना होगा। जो उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में जरुरत है कि फाइनेंशियल सिस्टम में ऐसे स्ट्रक्चल रिफॉर्म किए जाए जिससे बैंकिंग सिस्टम के साथ-साथ कॉरपोरेट बांड सिस्टम डेवलप हो सके।
 
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