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खास खबर: PSU बैंकों में ट्रांसफर से कितना रुकेगा फ्रॉड, 1.50 लाख हैं रडार पर

पीएसयू बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इन दिनों एक ही चर्चा है।

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नई दिल्‍ली. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुए 11 हजार करोड़ रुपए के फ्रॉड के बाद अब सरकार ट्रांसफर मोड में आ गई है। देश भर के करीब 1.5 लाख बैंक कर्मचारी पर ट्रांसफर की तलवार लटक रही है। अकेले पीएनबी में 18 हजार कर्मचारियों का अानन-फानन में ट्रांसफर किया गया है। हालांकि पब्लिक सेक्टर बैंकों में जिस तरह वर्क कल्चर को लेकर निचले स्तर तक गड़बड़ियां हो गई  है। उसमें आमूल-चूल परिवर्तन केवल ट्रांसफर के जरिए होना शायद संभव नही है। इस बात के इनपुट हमें हमारे एक्सपर्ट ने दिए हैं। हालांकि पीएनबी ने गुरुवार को जारी एक बयान में 18 हजार कर्मचारियों के ट्रांसफर की बात खारिज किया। बैंक ने कहा कि 19 फरवरी से अभी तक उसने कुल 1415 कर्मचारियों का ट्रांसफर किया है, जिसमें अधिकारी भी शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक बैंक भी तय समय से एक ही ब्रांच में जमे कर्मचारियों और अधिकारियों की लिस्‍ट को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। सभी पीएसयू बैंकों के 1.5 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी ट्रांसफर की जद में आएंगे। यह संख्‍या सभी पीएसयू बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की लगभग 20 फीसदी है। बैंकिंग इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों के एक ही स्थान पर लंबे समय तक रहने से फ्रॉड का जोखिम बढ़ जाता है। 

 

क्‍यों हो रहा हैं ट्रांसफर 

पीएनबी में 11500 करोड़ रुपए का फ्रॉड सामने आने के बाद सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने सभी बैंक कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे अधिकारी जो एक ही पोस्ट पर 3 साल से ज्यादा काम कर रहे हैं। साथ ही ऐसे कर्मचारी जो एक ही स्टेशन पर 5 साल से ज्यादा समय से जमे हैं, उनका ट्रांसफर किया जाए। पीएनबी फ्रॉड में यह सामने आया था मुख्य आरोपी गोकुलनाथ शेट्टी 7 साल से एक ही पोस्ट पर पोस्टेड था।

इसी तरह क्लर्क मनोज खरात भी तय समय से ज्यादा पीरियड में उसी जगह पर काम कर रहा था, जिस वजह से 11 हजार करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम देना आसान हो गया। आशंका है कि आने वाले समय में इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं। 

 

क्या कहना है एक्सपर्ट का

 

पूर्व बैंकर जी.एस.बिंद्रा के अनुसार बैंक कर्मचारियों का तेजी से ट्रांसफर होना एक कदम है। सरकार को इस दिशा में कुछ और ठोस कदम उठाने होंगे। जिससे कि पूरे सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन हो सके। तभी जाकर सही मकसद पूरा हो सकेगा।

 

 बैंक क्‍यों नहीं कर रहे थे नियमों का पालन 

-स्‍पेशलाइज्‍ड काम में लगे लोगों का नहीं हो रहा था ट्रांसफर 
-नए कर्मचारी की जरूरी हो जाती थी ट्रेनिंग
-कर्मचारी की सुविधा भी देखता था बैंक 
  
एक्‍सपर्ट के मुताबिक इससे क्‍या नुकसान 

- एक ही जगह या पद पर ज्‍यादा समय तक काम करने से बढ़ा फ्रॉड का जोखिम 
-  कर्मचारी द्वारा पद के दुरुपयोग की संभावना बढ़ी 

 

 ट्रांसफर को लेकर क्‍या हैं गाइडलाइंस 
-एक पद या ब्रांच में अफसर 3 साल और कर्मचारी 5 साल से ज्‍यादा होने पर ट्रांसफर 
-एक ही ब्रांच में एक सीट पर ज्‍यादा समय न रखने का है नियम 
-ब्रांच और कर्मचारियों की संख्‍या के आधार पर समय तय करने का प्रावधान 
             

कैसे होगा सुधार 

- फ्रॉड और करप्‍शन रोकने के लिए पहले से है मकैनिज्‍म 

-ट्रांसफर पर मौजूदा गाइडलाइंस को सख्‍ती से लागू करने की जरूरत 

    
       
सही से नहीं हो रहा था नियमों का पालन

भारत सरकार में सेक्रेटरी रहे केके जालान ने moneybhaskar.com को बताया कि अगर सीवीसी के फरमान के बाद इतने बड़े पैमाने पर ट्रांसफर की तैयारी हो रही है तो साफ है कि बैंक ट्रांसफर को लेकर नियमों का पालन सही ने नहीं कर रहे थे। तभी आज ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्‍या 1.50 लाख से अधिक हो रही है जो नियमों के तहत ट्रांसफर की जद में आ रहे हैं। हालांकि कुछ वाजिब कारणों से ट्रांसफर के नियमों का 100 फीसदी अनुपालन मुश्किल होता है।

 

विरोध में हैं बैंक यूनियन

वहीं बैंक कर्मचारियों के संगठन नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्‍यक्ष अश्विनी राणा इस बात से सहमत नहीं है कि बैंकों में कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर के नियम का अनुपालन नहीं होता है। उनका कहना है कि हर साल मई, जून और जुलाई में 3 साल और 5 साल का समय पूरा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर होता है। इसके अलावा प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों का ट्रांसफर भी होता है। उनका कहना है कि कुछ स्‍पेशलाइज्‍ड काम होते हैं उसमें लगे कर्मचारियों में ट्रांसफर के नियमों के 100 फीसदी अनुपालन नहीं हो पाता है।

 

एक पद पर जमे रहने से बढ़ता है फ्रॉड का जोखिम

पंजाब एंड सिंध बैंक के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि अब मौजूदा माहौल में बैंकों को ट्रांसफर को लेकर पहले से मौजूद गाइडलाइंस को सख्‍ती से लागू करना होगा। एक कर्मचारी के एक पद पर ज्‍यादा समय तक बने रहने से फ्रॉड का जोखिम बढ़ता है। इससे निपटने के लिए बैंकों में पहले से पॉलिसी है। इसे सख्‍ती से लागू करने की जरूरत है। 

 

क्‍या ट्रांसफर से बैंकों के कामकाज में होगा सुधार 

पीएनबी जैसा फ्रॉड सामने आने के बाद बड़े पैमाने पर बैंक कर्मचारियों का ट्रांसफर होने से क्‍या पीएसयू बैंकों के कामकाज में सुधार होगा। जालान के मुताबिक, मुझे नहीं लगता कि इससे बैंकों के काम काज में सुधार होगा। प्रॉब्‍लम कहीं और है और बैंकों का शीर्ष प्रबंधन इस पर गलत तरीके से रिएक्‍ट कर रहा है। राणा ने कहा कि पीएसयू बैंकों के लाखों कर्मचारियों का इस समय ट्रांसफर करना तुगलकी परफान के सिवाय कुछ नहीं है। बैंकों की हालत पहले से खराब है इससे बैंकों में कामकाज पर और खराब असर पड़ेगा। 

 

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ट्रांसफर से सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा असर 

जालान ने कहा कि बड़े पैमाने पर बैंकों के 1.5 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर होने से कई तरह के नुकसान होंगे। कोई भी कर्मचारी नई जगह पर जाता है तो उसको कुछ समय वहां खुद को एडजस्‍ट करने में लगता है। इसके अलावा बैंकों में कर्मचारी और अधिकारी की ग्राहक के साथ बेहतर जान-पहचान का अलग फायदा मिलता है।

वहीं राणा का कहना है कि जनवरी मार्च तिमाही के बैंकों के वित्‍तीय नतीजे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर होने से प्रभावित हो सकते हैं। बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को मार्च तक कई तरह के नतीजे की जवाबदेही होती है। कई सरकारी योजनाओं को पूरा करने के लिए टार्गेट होते हैं। अब ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों ने पहले से काम करना बंद कर दिया है जिनको लग रहा है कि उनका ट्रांसफर हो सकता है। इसके अलावा उनको नई जगह पर ज्‍वायनिंग के लिए भी टाइम दिया जाएगा। ऐसे में इसका नकारात्‍मक असर बैंकों के काम काज पर पड़ना तय है। 


पीएसयू बैंकों में हैं कुल कितने कर्मचारी और अधिकारी 

 

कुल बैंक कर्मचारी                  ऑफिसर     क्लर्क
847398                 378783     321362
                 पुरुष    महिला पुरुष महिला
293059               85724   219687 101675
 
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