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सस्ते कर्ज के लिए करना होगा इंतजार: RBI ने नहीं घटाया इंटरेस्ट रेट, रेपो रेट 6% पर बरकरार

रिजर्व बैंक ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

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नई दिल्‍ली.   रिजर्व बैंक ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी कंज्यूमर्स को सस्‍ते कर्ज के लिए फरवरी तक और इंतजार करना होगा। रिजर्व बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने रेपो रेट को 6% और रिवर्स रेपो रेट को 5.75% पर बरकरार रखा है।
 
 

बढ़ सकती है महंगाई

- आरबीआई का कहना है कि राज्‍यों में किसानों की कर्ज माफी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर एक्‍साइज ड्यूटी और वैट कम होने, तमाम आइटमों पर जीएसटी रेट घटने से रेवेन्यू कम होने की वजह से राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है और इससे महंगाई तेज हो सकती है।
- वहीं रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वे पॉलिसी रेट पर पहले हुई कटौती का ग्राहकों को पूरा फायदा देकर इकोनॉमी में हो रहे पॉजिटिव बदलाव का फायदा उठा सकते हैं। 
-अगले छह माह में महंगाई और बढ़ सकती है। रिजर्व बैंक ने तीसरी और चौथी तिमाही में महंगाई की दर 4.3 से 4.7 फीसदी की रेंज में रहने का अनुमान जताया है। 
 
एमपीसी के 5 मेंबर पॉलिसी रेट में बदलाव न करने के पक्ष में 
- एमपीसी के 5 मेंबर्स ने पॉलिसी रेट में बदलाव न करने के पक्ष में अपनी राय दी, जबकि एक सदस्‍य ने पॉलिसी रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट कटौती करने का सुझाव दिया । एमपीसी की अगली बैठक 6 फरवरी, 2018 को होगी।  
- रिजर्व बैंक की ओर से जारी मॉनीटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट मे कहा गया है कि महंगाई को 4 फीसदी के दायरे में रखने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया गया है। 
 

रिजर्व बैंक ने सुधार के कदमों को बताया सकारात्‍मक 

 
 वित्‍त मंत्रालय ने मॉनिटरी पॉलिसी जारी अपने बयान में कहा है कि एमपीसी ने वित्‍त वर्ष 2017 18 के लिए जीवीए का अपना अनुमान 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है। एमपीसी ने सरकार के सुधार के प्रयासों जैसे, जीएसटी, पीएसयू बैंकों में रिकैपिटलाइजेशन और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रैकिंग में सुधार को सकारात्‍मक बताया है। वहीं भारतीय स्‍टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि पॉलिसी रेट में बदलाव न करने का फैसला बाजार की उम्‍मीदों के अनुरूप है। बैंकों की सब्सिडियरी को विदेश से एएए रेटिंग वाली कंपनियों से रीफाइनेंस की अनुमति देने से बैंकों को अपनी बुक को बेहतर बनाने और असेट क्‍वालिटी मेनटेन करेन में मदद मिलेगी।

 

रेट में कटौती न होने पर इंडस्‍ट्री ने जताई निराशा 

 

उद्योग चैंबर फिक्‍की ने पॉलिसी रेट में कटौती न करने के रिजर्व बैंक के फैसले पर निराशा जताई है। फिक्‍की के प्रेसीडेंट, पंकज पटेल ने कहा है कि रेपो रेट में कटौती से सेंटीमेंट मजबूत होता और ग्रोथ को मजबूती मिलती। जीडीपी के दूसरी तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रोथ के मोर्चे पर सुधार हो रहा है। 

 

7 महीने के हाईएस्ट पर पहुंची महंगाई
पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि अक्‍टूबर महीने में रिटेल महंगाई 7 माह के हाईएस्ट लेवल पर पहुंच गई। पिछले 2 महीने में फूड प्राइसेस में काफी उतार-चढ़ाव रहा।
- सितंबर में महंगाई कम हुई लेकिन अक्‍टूबर में में उछाल आया। ऐसा सब्‍जी और फलों की कीमतें बढ़ने के कारण हुआ। एलपीजी, कैरोसिन और बिजली की कीमतें बढ़ने के कारण भी महंगाई बढ़ी। 
 

GVA ग्रोथ का अनुमान 6.7% पर बरकार 

रिजर्व बैंक ने 2017 18 के लिए जीवीए ग्रोथ का अनुमान 6.7% के लेवल पर बरकरार रखा है। जीवीए अनुमान पर पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में ग्रोथ अनुमान से कम रही। तेल कीमतों में इजाफा होने से कंपनियों के मार्जिन और जीवीए पर निगेटिव असर पड़ा।
- खरीफ के प्रोडक्ट और रबी की बुवाई में गिरावट के कारण एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के संभावनाएं कमजोर हुई हैं। हालांकि दूसरी तिमाही में कुछ पॉजिटिव संकेत मिले हैं। हाल के महीनों में क्रेडिट ग्रोथ में तेजी आई है।
- पीएसयू बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन से क्रेडिट ग्रोथ मे और सुधार हो सकता है। सर्विस सेक्‍टर जैसे रियल एस्‍टेट में कमजोर बनी हुई है। रिजर्व बैंक के सर्वे से पता चलता है कि सर्विस औरा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर चौथी तिमाही में मांग, वित्‍तीय स्थिति और बिजनेस के माहौल में सुधार की उम्‍मीद कर रहे हैं। इन बातों को ध्‍यान में रखते हुए रियल जीवीए ग्रोथ के अनुमान को अक्‍टूबर के स्‍तर यानी 6.7% पर बरकरार रखा गया है। 
 

बैंक कस्‍टमर को दें रेट कट का फायदा 

- RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा है कि प्राइमरी कैपिटल मार्केट से पूंजी जुटाने के मोर्चे पर सुधार हुआ है। बाजार से जुटाई गई पूंजी से नए प्रोजेक्‍ट शुरू  होंगे । इससे कम अवधि में मांग बढ़ेगी और इकोनॉमी की संभावनाओं को बेहतर बनाएगा।

- इसके अलावा ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रैकिंग में सुधार से देश में एफडीआई का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी। इनसॉल्‍वेंसी और बैंकरप्‍सी कोड की मदद से खराब कर्ज की समस्‍या का समाधान करने की दिशा में काम शुरू हो गया है।

- हालांकि एमपीसी का कहना है कि इन सकारात्‍मक फैक्‍टर का फायदा उठाने के लिए बैंकों को कर्ज की लागत कम करनी होगी। वे पॉलिसी रेट में अब तक हुई कटौती का फायदा कंज्यूमर्स तक पहुंचा कर ऐसा कर सकते हैं। 

 
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