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RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 6 फीसदी पर बरकरार रखी, बैंक से कर्ज लेना सस्ता नहीं होगा

कस्‍टमर के लिए बैंक लोन सस्‍ता नहीं होगा और न ही ईएमआई में कोई राहत मिलेगी।

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नई दिल्‍ली.  रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी मॉनिटरी पॉलिसी में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी रेपो रेट 6 फीसदी पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि कस्‍टमर के लिए बैंक लोन सस्‍ता नहीं होगा और न ही ईएमआई में कोई राहत मिलेगी। मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने यह फैसला महंगाई को 4 फीसदी की रेंज में रखने के टारगेट को ध्‍यान में रखते हुए किया है। 

 

रिवर्स रेपो रेट और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं 
- इसके अलावा एमपीसी ने रिवर्स रेपो रेट और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है। रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी और बैंक रेट 6.25 फीसदी है। 

 

फर्स्ट क्वार्टर में महंगाई 5.6% तक रहने का अनुमान 
- रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट में कहा है कि इकोनॉमिक एक्टिविटीज तेज हो रही हैं। ऐसे में बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला जाएगा। इससे कीमतें बढेंगी। इसके अलावा महंगाई कितनी बढ़ेगी यह काफी हद तक मानसून पर निर्भर करेगा। माना जा रहा है कि आने वाला मानसून सामान्‍य रहेगा। 

- इन फैक्‍टर्स को ध्‍यान में रखते हुए अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के पहले क्वार्टर में रिटेल महंगाई 5.1 फीसदी से 5.6 फीसदी रहेगी। वहीं,  दूसरे क्वार्टर में खुदरा (रिटेल) महंगाई 4.5 से 4.6 फीसदी की रेंज में रह सकती है। 

 

2017-18 के लिए जीवीए ग्रोथ 6.6% रहने का अनुमान 
- उर्जित पटेल ने कहा कि 2017-18 में जीवीए ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के आगे ग्रोथ आउटलुक कई फैक्‍टर पर निर्भर करेगा। इसमें सबसे अहम जीएसटी है। जीएसटी के तहत लागू किया गया सिस्‍टम स्थिर हो रहा है। यह देश में इकोनॉमिक एक्टिविटीज के लिए बेहतर नतीजे देगा। 

- उन्होंने कहा कि इन्वेस्टमेंट की एक्टिविटीज में रिवाइवल के संकेत हैं। ऐसा क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से पता चलता है। इसके अलावा कैपिटल गुड्स के प्रोडक्‍शन और इम्पोर्ट में भी सुधार दिख रहा है। तीसरा पीएसयू बैंकों में रीकैपिटलाइजेशन का प्रॉसेस भी शुरू हो गया है। 

 

2018-19 में जीवीए ग्रोथ 7.2 रहने का अनुमान
- रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि ऐसे एनपीए अकाउंट जिसके तहत बड़ा कर्ज फंसा हुआ है ऐसे मामले अब इनसॉल्‍वेंसी और बैंकरप्‍शी कोड के तहत समाधान के लिए रेफर किए जा रहे हैं। इससे कर्ज का फ्लो बढ़ेगा और नए इन्वेस्टमेंट की मांग पैदा होगी। इसके अलावा चौथा अहम फैक्‍टर एक्‍सपोर्ट ग्रोथ है। ग्लोबल डिमांड बढ़ने से एक्‍सपोर्ट ग्रोथ के आंकड़ों में और सुधार होने की संभावना है। इन फैक्‍टर्स को ध्‍यान में रखते हुए 2018-19 के लिए जीवीए ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है। 

 

क्या है रेपो रेट?
- रोजमर्रा के कामकाज के लिए बैंकों को भी पैसे की ज़रूरत पड़ जाती है। रिजर्व बैंक ही बैंकों को कर्ज देता है, जो एक दो दिन के लिए होता है। यह कर्ज ओवरनाइट कर्ज कहा जाता है। इसके लिए रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब बैंकों को कम रेट पर कर्ज मिलता है तो वे भी कस्टमर को आकर्षित करने के लिए अपने इंटरेस्ट रेट कम कर देते हैं। इसी तरह अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है और वे कस्टमर्स से वसूले जाने वाले इंटरेस्ट को बढ़ा देते हैं। 

 

क्या है रिवर्स रेपो रेट?
- जैसा इसके नाम से ही साफ है यह रेपो रेट से उलट होता है। जब कभी बैंकों के पास दिन-भर के कामकाज के बाद बड़ी रकम बची रह जाती है तो वे उस रकम को रिजर्व बैंक में रख देते हैं, जिस पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। अब रिजर्व बैंक इस ओवरनाइट रकम पर जिस दर से ब्याज अदा करता है  उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। दरअसल, रिवर्स रेपो रेट बाजारों में कैश की लिक्विडिटी को कंट्रोल करने में काम आता है। जब भी बाजार में बहुत ज्यादा नकदी आ जाती है तो आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्‍यादा इंटरेस्ट कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें और इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में छोड़ने के लिए कम रकम रह जाए।

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