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मुनाफा कमाने में 10 साल पीछे गए टॉप-5 पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंकों ने दिखाई 574%ग्रोथ

पीएसयू बैकों का प्रॉफिट घटकर 2007-08 के लेवल पर आ गया है।

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नई दिल्‍ली.   पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बैंक 1969 में हुए नेशनलाइजेशन के बाद सबसे बड़ी क्राइसिस से गुजर रहे हैं। एक तरफ उनका प्रॉफिट अभी 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, पहले विजय माल्या और अब नीरव मोदी-मेहुल चौकसी ने उनकी साख पर बट्टा लगा दिया है। यही नहीं, अब आम आदमी के मन में भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या उनका पैसा बैंकों में सेफ है। अकेले पीएसयू बैंकों का लोन डिफॉल्ट 7.5 लाख करोड़ रुपए के पार जा चुका है। यह बात भी अब लोग कहने लगे हैं कि बैंक कॉरपोरेट पर मेहरबान है, जबकि आम आदमी पर सख्ती करते हैं। पीएसयू बैंकों का परफॉर्मेंस इस बात को और मजबूत कर रहा है। 1992 के ग्लोबलाइजेशन के बाद तेजी से उभरे प्राइवेट सेक्टर बैंकों ने पीएसयू से ज्यादा बेहतर परफॉर्म किया है। पिछले 10 साल में जहां पब्लिक सेक्टर बैंकों का प्रॉफिट गिरता गया है वहीं, टॉप-5 प्राइवेट बैंकों का प्रॉफिट एवरेज 574 फीसदी की दर से बढ़ा है।

 
एक्सपर्ट ने प्रॉफिट गिरने और फ्रॉड बढ़ने की ये बताई वजह
1.रिस्क  असेसमेंट का प्रॉसेस सही नहीं होना
2.करप्शन ज्यादा
3.पोस्टिंग से लेकर ट्रांसफर में राजनीतिक दखल
4.कॉरपोरेट लोन पर ज्यादा फोकस
5. बड़े अफसर अधिकारों का कर रहे हैं गलत इस्तेमाल
 

एनपीए पर तय हो शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही 

 

बैंक कर्मचारियों के संगठन नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्‍यक्ष अश्विनी राणा का कहना है कि अगर आप पिछले 10 साल में पीएसयू बैंकों का प्रदर्शन देखें तो बैंकों  का ऑपरेटिंग प्रॉफिट बेहतर रहा है। इस अवधि में बिजनेस बढ़ा है। बैंकों का प्रदर्शन नेट प्रॉफिट के मोर्चे पर खराब रहा है। ऐसा एनपीए की वजह से हुआ है। बैंकों को एनपीए के बदले प्रॉविजनिंग करनी पड़ी है। पीएसयू बैंकों का लोन बड़े पैमाने पर एनपीए बैंकों के बोर्ड और शीर्ष अधिकारियों की वजह से हुआ है। ऐसे में बोर्ड मेंबर्स और शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। 

 
फिर से प्राइवेटाइजेशन की डिमांड
- पीएसयू बैंकों को मैनेज करना कितना मुश्किल हो रहा है, यह फाइनेंस मिनिस्ट्री में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर के बयान से साफ होता है। अरविंद्र सुब्रमण्यन इस क्राइसिस से निपटने के लिए पीएसयू बैंकों का प्राइवेटाइजेशन करने की बात कहते हैं। यही नहीं, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा है कि बैंकों में ऐसे फ्रॉड से साफ है कि सीनियर मैनेजमेंट ने ढीला रवैया अपनाया है। उनका कहना है कि उन्हें चेक और बैलेंस के लिए अधिकार दिए गए हैं। उसके बावजूद ऐसी स्थिति आना चिंता की बात  है। इकोनॉमिस्‍ट पई पनिन्‍दकर ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार इस बात को मान चुकी है कि पीएसयू बैंकों में टॉप लेवल पर अफसरों को जो अधिकार दे दिए गए हैं, उनका गलत इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में पीएसयू बैंकों का प्राइवेटाइजेशन एक बेहतर ऑप्‍शन है। इससे काफी फायदा होगा। पनिन्‍दकर का कहना है कि बैकों का नेशनलाइजेशन एक राजनीतिक कदम था। इससे आम लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ।
 

10 साल में सरकार ने दिए 2.6 लाख करोड़ 

केंद्र सरकार ने पीएसयू बैंकों को 10 साल में कैपिटल रिकैपिटलाइजेशन के तौर पर 2.6 लाख करोड़ रुपए दिए हैं, लेकिन टॉप 5 पीएसयू बैंकों के परफॉर्मेंस पर इसका खास सकारात्‍मक असर नहीं दिखा है। बढ़ते एनपीए की वजह से पीएसयू बैंकों का प्रॉफिट लगातार गिर रहा है। 

 
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 10 साल में पहली बार घाटा 
बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट/लॉस (करोड़ में)
एसबीआई  2016- 17 -390.67
  2015-16 12,743.28
  2014-15 17,517.39
  2013-14 14,489.47
  2012-13 18,322.99
  2011-12 15,973.30
  2010-11 11,179.94
  2009-10 12,013.64
  2008-09 11,173.06
  2007-08 9,212.84
 
पंजाब नेशनल बैंक 
बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट/लॉस (करोड़ में)
पीएनबी  2016-17  901.13
  2015-16 -3,663,27
  2014-15  3,341.42
  2013-14 3,534,61
  2012-13 4,954.21
  2011-12 4,974.81
  2010-11 4,515,59
  2009-10 3,890.39
  2008-09 3,131.56
  2007-08  2,130.32
 

 

बैंक ऑफ बड़ौदा 

बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट/लॉस (करोड़ में)
बैंक ऑफ बड़ौदा  2016-17  1,777.41
  2015-16 -5,053.08
  2014-15  3,832.69
  2013-14 4,931.24
  2012-13 4,750.48
  2011-12 5,216.29
  2010-11 4,419.21
  2009-10 3.149.79
  2008-09 2,331.26
  2007-08 1,518.14

 

केनरा बैंक 

बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट/लॉस (करोड़ में)
केनरा बैंक  2016-17  1,233.61
  2015-16 -2,670.29
  2014-15  2,858.02
  2013-14 2,589.52
  2012-13 2,951.8
  2011-12 3,282.73
  2010-11 3.877.49
  2009-10 2,813.96
  2008-09 2,072.42
  2007-08 1,747.80

 

बैंक ऑफ इंडिया 

बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट/लॉस (करोड़ में)
बैंक ऑफ इंडिया  2016-17  -1,593.75
  2015-16 -6,334.98
  2014-15  1,748.33
  2013-14 2,732.65
  2012-13 2,741.19
  2011-12 2,674.62
  2010-11 2,488.71
  2009-10 1,738.5
  2008-09 3,009.4
  2007-08 1,960.28
 

सोर्स- बीएसई 

 

पीएसयू बैंकों का क्‍यों घटा प्रॉफिट और बढ़ा फ्रॉड 

- पिछले 10 सालों में पीएसयू बैंको का प्रॉफिट लेवल घट कर 20007-2008 के लेवल पर आ गया। यह बात 5 बड़े पीएसयू बैंकों के पिछले 10 याल के प्रॉफिट के आंकड़ों में भी साफ दिखती है। 

- इसकी बड़ी वजह पीएसयू बैंकों की नॉन परफार्मिंग असेट यानी एनपीए है। रिजर्व बैंक के डाटा के मुताबिक, सितंबर 2017 तक पीएसयू बैंकों का कुल एनपीए 7.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

- इकोनॉमिस्‍ट पई पनिन्‍दकर ने moneybhaskar.com को बताया कि पिछले 10 सालों बैंकों के प्रॉफिट के डाटा देखने से साफ पता चलता है कि उनका प्रॉफिट तेजी से गिरा है। ऐसा बढ़ते एनपीए की वजह से हुआ है। साफ है कि बैंकों ने कर्ज देने से पहले रिस्‍क असेसमेंट सही तरीके से नहीं किया। हाल में पीएनबी में हुए फ्रॉड से पता चलता है कि पीएसयू बैंकों में करप्‍शन भी काफी ज्यादा है। पंजाब एंड सिंध बैंक के एक पूर्व जीएम का कहना है कि पीएसयू बैंकों का प्रॉफिट कम होने की वजह कॉरपोरेट सेक्‍टर को दिए गए कर्ज का एनपीए होना है। इससे उनकी ब्‍याज से होने वाली कमाई भी घट गई। एनपीए बढ़ने के साथ पीएसयू बैंकों को इसके लिए अलग से प्रॉविजनिंग भी करनी पड़ी। 

 

आगे की स्लाड में पढ़ें, प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का प्रॉफिट 574 फीसदी बढ़ा...

 

 

 

प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का प्रॉफिट 574% बढ़ा 

 

प्राइवेट बैंकों का क्‍यों बढ़ा प्रॉफिट?  

 - रिस्‍क असेसमेंट का प्रॉसेस मजबूत होना 
 -  लोन रिपेमेंट के लिए फॉलोअप प्रॉसेस बेहतर  
 -  रिटेल सेक्‍टर को लेंडिंग पर फोकस 
 -  लोन के अगेंस्‍ट सिक्‍योरिटी पर जोर   

 

- पिछले 10 सालों में प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों ने प्रॉफिट के मामले में शानदार प्रदर्शन किया है। प्राइवेट सेक्‍टर के चार बड़े बैंक एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और कोटक महिंद्रा की बीते 10 साल में एवरेज प्रॉफिट ग्रोथ 574 फीसदी रही है।

- पई पनिन्‍दकर का कहना है कि प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों में रिस्‍क असेसमेंट सिस्‍टम ज्‍यादा मजबूत है। इसके अलावा इन बैंकों में चेक्‍स भी ज्‍यादा हैं। ऐसे में गलत लोन होने की गुंजाइश बहुत कम है।

- वहीं, पंजाब एंड सिंध बैंक के एक पूर्व अफसर का कहना है कि प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों ने रिटेल लेंडिंग पर ज्‍यादा फोकस किया। इसकी वजह से उनका एनपीए कम है। इसके अलावा प्राइवेट बैंकों में रिस्‍क असेसमेंट और लोन के फॉलोअप का सिस्‍टम ज्‍यादा बेहतर है। 

 

एचडीएफसी बैंक 

बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट (करोड़ में)
एचडीएफसी बैंक  2016-17  15,287.41
  2015-16 12,817.33
  2014-15  10,700.05
  2013-14 8,764.51
  2012-13 6,900.20
  2011-12 5,273.40
  2010-11 4,017.69
  2009-10 3,032.92
  2008-09 2,252.13
  2007-08 1,592.21
 

आईसीआईसीआई बैंक 

बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट (करोड़ में)
आईसीआईसीआई बैंक  2016-17  11,340.33
  2015-16 10,925.89
  2014-15  12,942.30
  2013-14 11,677.12
  2012-13 10,129.88
  2011-12 7,937.64
  2010-11 6,318.19
  2009-10 4,843.41
  2008-09 3,379.42
  2007-08 3,115.27
एक्सिस बैंक 
बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट (करोड़ में)
एक्सिस बैंक 2016-17  3,967.03
  2015-16 8,357.59
  2014-15  7,448.48
  2013-14 6,309.17
  2012-13 5,233.79
  2011-12 4,218.51
  2010-11 3,344.68
  2009-10 2,478.14
  2008-09 1,812.93
  2007-08 1,059.14
कोटक महिंद्रा बैंक 
बैंक  फाइनेंशियल ईयर नेट प्रॉफिट (करोड़ में)
कोटक महिंद्रा बैंक  2016-17  4,949.08
  2015-16 3,431.12
  2014-15  3,065.06
  2013-14 2,512.54
  2012-13 2,204.21
  2011-12 1,832.23
  2010-11 1,569.23
  2009-10 1,327.36
  2008-09 652.67
  2007-08 958.72
आगे की स्लाइड में पढ़ें, पीएसयू बैंकों का एनपीए 7.36 लाख करोड़ रुपए...

पीएसयू बैंकों का एनपीए 7.36 लाख करोड़ रुपए 

रिजर्व बैंक के मुताबिक, सितंबर 2017 तक पीएसयू बैंकों का एनपीए 7.36 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का एनपीए 1.03 लाख करोड़ रुपए है। प्राइवेट बैंकों में एनपीए कम होने की वजह यह है कि उन्‍होंने रिटेल लोन ज्‍यादा दिया और कॉरपोरेट सेक्‍टर को लोन कम दिया। इसके अलावा उनका रिस्‍क असेसमेंट सिस्‍टम और लोन रिपेमेंट को लेकर फॉलो अप ज्‍यादा मजबूत है।  

 

देश के 5 बड़े विलफुल डिफॉल्‍टर 

- सिबिल की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, विन्‍सम ग्रुप पर बैंकों का 3969 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं, जूम डेवलपर्स पर 1911 करोड़ रुपए की देनदारी है। 

- एस कुमार्स ग्रुप ने बैंकों के 1789 करोड़ रुपए नहीं चुकाए हैं। लंदन में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्‍या पर बैंकों का 1789 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं पर्ल पिक्सन ग्रुप पर 1226 करोड़ की देनदारी है। 

 

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