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मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक शुरू, RBI के सामने हैं महंगाई समेत 5 बड़े चैलेंज

रिजर्व बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की दो दिवसीय बैठक बैठक आज शुरू हो रही है।

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नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक की मॉनीटरी  पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की दो दिवसीय बैठक मंगलवार से शुरू हो रही है। एमपीसी की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दूसरी तिमाही के आंकड़े जीडीपी ग्रोथ के मोर्चे पर सुधार दिखा रहे हैं। ऐसे में एमपीसी मॉनिटरी पॉलिसी पर फैसला करने से पहले जीडीपी ग्रोथ, महंगाई, निजी क्षेत्र के निवेश, क्रूड की कीमतों और  निर्यात में कमजोरी जैसे अहम फैक्‍टर पर विचार करेगी। 
 
एमपीसी के लिए नहीं है कोई सरप्राइज फैक्‍टर 
 
क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने moneybhaskar.com को बताया कि एमपीसी के सामने कोई सरप्राइज फैक्‍टर नहीं है। जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े उनके अनुमान के अनुरूप ही हैं।  इसके अलावा एमपीसी महंगाई पर भी विचार करेगी। ग्‍लोबल इकोनॉमी में रिकवरी का दौर है ऐसे में इस मोर्चे पर भी एमपीसी के लिए कोई खास नहीं है। निर्यात के आंकड़े जरूर कमजोर रहे हैं। ऐसे में एमपीसी निर्यात के कमजोर आंकड़ों पर जरूर विचार कर सकती है। जुलाई- सितंबर में जीडीपी ग्रोथ की दर बढ़ कर 6.3 फीसदी हो गई है। वहीं अप्रैल-जून तिमाही में जीडपी ग्रोथ की दर घट कर 5.7 फीसदी पर आ गई थी।
 
महंगाई में हुआ है इजाफा 
 
रिजर्व बैंक ने अक्‍टूबर में हुई मॉनिटरी पॉलिसी बैठक में दूसरी छमाही में महंगाई की दर 4.2 फीसदी से 4.6 फीसदी की रेंज में रहने का अनुमान जताया था। ताजा आंकड़ों के अनुसार महंगाई में इजाफा हुआ है। नवंबर में जारी की गई अक्‍टूबर की थोक महंगाई दर बढ़ कर 3.56 फीसदी के स्‍तर पर आ गई। ऐसा फूड प्राइस में इजाफा होने की वजह से हुआ। वहीं अक्‍टूबर में खुदरा महंगाई दर 3.58 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई। वहीं सितंबर माह में खुदरा महंगाई की दर 3.28 फीसदी थी। एमपीसी ने पिछली बैठक में महंगाई बढ़ने के ट्रेंड पर चिंता जताई थी। ऐसे में इस बैठक में भी एमपीसी के लिए महंगाई अहम मुद्दा होगा। 
 
नहीं बढ़ रहा है निजी क्षेत्र का निवेश 
 
इकोनॉमिस्‍ट पई पणिंदकर का कहना है कि एमपीसी जीडीपी के आंकड़ों पर जरूर विचार करेगी। इसके साथ ही वह बेहतर जीडीपी आंकड़ों को देखते हुए अपने ग्रोथ प्रोजेकशन में भी बदलाव कर सकती है। जीडीपी के आंकड़ों के अलावा एमपीसी के सामने अहम मसला होगा कि देश में निजी क्षेत्र का निवेश नहीं बढ़ रहा है। वास्‍तव में निजी क्षेत्र का निवेश घटा है। एमपीसी इस मसले पर भी विचार करेगी। 
 
तेल की कीमतें भी होगी अहम फैक्‍टर 
 
पई पणिंदकर का कहना है कि एमपीसी की बैठक में अंतराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें भी अहम मुद्दा होगा। मोजूदा समय में कच्‍चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल है। लेकिन कीमतों में इजाफा होने की संभावना नहीं है। ओपेक ने तेल का उत्‍पादन घटाने की बात कही है लेकिन सभी ओपेक देश ऐसा करेंगे इसकी उम्‍मीद बहुत कम है। इसके अलावा अमेरिका ने भी शैल गैस का उत्‍पादन शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में खास इजाफा होने की संभावना नहीं है। 
 
आगे की स्‍लाइड में पढ़ें पिछली बैठक में रेट कट पर क्‍या था एमपीसी का फैसला 
 
 

पिछली बैठक में रेट में नहीं हुआ था बदलाव 

एमपीसी ने अक्‍टूबर में हुई मॉनीटरी पॉलिसी बैठक में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। रिजर्व बैंक ने ऐसा महंगाई बढ़ने के खतरों के मद्देनजर किया था। 

 

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