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मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक शुरू , कर्ज सस्‍ता होने की उम्‍मीद कम

नई दिल्‍ली। रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल की अध्‍यक्षता में मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। एमपीसी की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब महंगाई और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा बजट में फसलों का समर्थन मूल्‍य भी बढ़ाने का ऐलान किया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक लगातार तीसरी बार पॉलिसी रेट को मौजूदा स्‍तर पर ही बनाए रख सकता है। ऐसे में कर्ज सस्‍ता होने की उम्‍मीद कम है। 

 

7 फरवरी को आएगा पॉलिसी स्‍टेटमेंट 

 

एमपीसी की दो दिवसीय बैठक 7 फरवरी को खत्‍म होगी और रिजर्व बैंक दोपहर के बाद मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट जारी करेगा। रिजर्व बैंक ने अगस्‍त में रेपो रेट में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी और रेपो रेट 6 फीसदी हो गया था। मौजूदा रेपो रेट पिछले 6 साल में सबसे निचले स्‍तर पर है। 

 

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रेपो रेट में कटौती की उम्‍मीद नहीं 

 

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और सीईओ राजकिरण राय जी ने कहा कि मेरा मानना है कि रिजर्व बैंक को दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए। मौजूदा समय में दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं बनती है। इसके अलावा रिजर्व बैंकों में दरों में वृद्धि भी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा कोटक इंस्‍टीट्यूशनल इक्विटीज के सीनियर इकोनॉमिस्‍ट सुवदीप रक्षित को भी उम्‍मीद है कि रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक बजट पर भी गौर करेगा कि इससे राजकोषीय घाटे और महंगाई पर क्‍या असर होगा। 

 

ग्रोथ में आ रही है तेजी 

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियम ने इकोनॉमिक सर्वे के बाद कहा था कि ग्रोथ में तेजी आ रही है और महंगाई बढ़ रही है ऐसे में रिजर्व बैंक के पास दरों में कटोती की गुंजाइश बहुत कम होगी। अपने बजट भाषण में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि मौजूदा वित्‍त वर्ष की जुलाई सितंबर तिमाही में 6.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ संकेत दे रही है कि अर्थव्‍यवस्‍था मजबूती की राह पर है। 

 

दिसंबर में महंगाई रही 5.21 फीसदी 

फूड आयटम की कीमतें बढ़ने के कारण दिसंबर माह में खुदरा महंगाई 5 फीसदी को पार कर 5.21 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं नवंबर में उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई 4.88 फीसदी और नवंबर में यह 3.41 फीसदी थी। 

 

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