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UPA सरकार लेती एक्‍शन तो नहीं होता PNB घोटाला, इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक का दावा

UPA सरकार लेती एक्‍शन तो नहीं होता PNB घोटाला, इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक का दावा

नई दिल्‍ली। इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक दिनेश दुबे ने दावा किया है कि पीएनबी घोटाला यूपीए सरकार के समय शुरू हुआ था और उन्‍होंने इस बारे में तत्‍कालीन फाइनेंस सेक्रेटरी और रिजर्व बैक के तत्‍कालीन डिप्‍टी गवर्नर को इस बारे में जानकारी दी थी। अगर यूपीए सरकार ने एक्‍शन लिया होता है तो यह घोटाला नहीं होता। एनडीए सरकार में यह घोटाला 10 से 50 गुना बढ़ गया है। दिनेश दुबे के खुलासे के बाद एनडीए सरकार इस मसले पर हमलावर हो गई है। एनडीए सरकार ने दावा किया है हमारी सतर्कता की वजह से यह घोटाला सामने आया है। 

 

तत्‍कालीन वित्‍त सचिव ने दिनेश दुबे को इस्‍तीफा देने के लिए मजबूर किया

 

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सवाल उठाया कि यूपीए सरकार में तत्‍कालीन वित्‍त सचिव ने शिकायत पर एक्‍शन लेने के बजाए दिनेश दुबे को इस्‍तीफा देने के लिए मजबूर किया। हम जानता चाहते हैं कि दिनेश दुबे से इस्‍तीफा लेने के लिए वित्‍त सचिव पर किसने दबाव डाला था। वहीं तत्‍कालीन वित्‍त सचिव राजीव टकरू का कहना है कि वे दिनेश दुबे से अपनी जिंदगी में सिर्फ एक बार मिले हैं। वे 2013 में इस्‍तीफा देने हमारे ऑफिस आए थे। उन्‍होंने इस्‍तीफा की वजह बताई कि वे कुछ चीजों से नाराज हैं। मैंने उनका इस्‍तीफा स्‍वीकार कर लिया। मैंने उनसे कभी बात नहीं की। 

 

इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक का यह है दावा

 

दिनेश दुबे के मुताबिक नई दिल्ली के होटल रेडिसन में 14 सितंबर, 2013 को इलाहाबाद बैंक के निदेशक मंडल की बैठक हुई। इस बैठक में दिनेश दुबे भी भारत सरकार की ओर से नियुक्त निदेशक की हैसियत से शामिल हुए। बैठक में दिनेश दुबे ने मेहुल चौकसी को 550 करोड़ लोन देने का विरोध किया।  16 सितंबर को इस बैठक की जानकारी दुबे ने भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती और तत्कालीन वित्त सचिव राजीव टकरू को दी।  इसके बाद बैंक अधिकारियों को तलब भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद मेहुल चौकसी को बैंक की हांगकांग शाखा से भुगतान कर दिया गया। 

 

यूपीए सरकार की वजह से बढ़ा एनपीए 

 

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एनडीए सरकार की सतर्कता की वजह से यह घोटाला सामने आया। सभी एनपीए, गलत तरीके से लोन दिया जाना सब कुछ यूपीए सरकार के समय में हुआ जो अब सामने आ रहा है। यह घोटाला बैंक द्वारा किया गया है न कि सरकार द्वारा। उन्‍होंने कहा कि यह बैंकिंग फ्रॉड है। इसकी जांच हो रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पैसा रिकवर हो जाए। 

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