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बैंकों ने मार्च में ही कैश की कमी पर RBI को किया था अलर्ट, नहीं हुआ एक्‍शन

देश के कई राज्‍यों में एटीएम में कैश की किल्‍लत के लिए रिजर्व बैंक की सुस्‍ती जिम्‍मेदार है।

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नई दिल्‍ली। देश के कई राज्‍यों में एटीएम में कैश की किल्‍लत के लिए रिजर्व बैंक की सुस्‍ती जिम्‍मेदार है। कई पीएसयू बैंकों ने मार्च की शुरुआत में ही रिजर्व बैंकों को कैश की कमी होने की आंशका के मद्देनजर अलर्ट किया था। बैंकों ने कहा था कि उनको ज्‍यादा पैसों की जरूरत है, लेकिन रिजर्व बैंक ने समय रहते बैंकों में कैश की ज्‍यादा आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, इसकी वजह से कैश की किल्‍लत पैदा हुई। बैंकर्स का कहना है कि अगर रिजर्व बैंक ने समय रहते कदम उठाया होता तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। 

 

बैंकों मे मार्च से ही कम हो गया था कैश इनफ्लो 

 

बैंक कर्मचारियों की  यूनियन - नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्‍यक्ष अश्विनी राणा ने moneybhaskar.com को बताया कि बैंकों ने मार्च की शुरुआत में ही रिजर्व बैंक को पत्र लिख की कैश की कमी की सूचना दी थी। बैंकों ने पत्र में कहा था कि उनके पास डिपॉजिट का फ्लो कम हो गया है। ऐसे में हमें ज्‍यादा कैश की जरूरत है। लेकिन रिजर्व बैंक ने बैंकों की सूचना पर तत्‍काल कदम नहीं उठाया। अगर रिजर्व बैंक ने बैंकों के अलर्ट पर समय रहते कदम उठाया होता और कैश की सप्‍लाई बढ़ाई होती तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ दिनों में कदम उठाने शुरू किए हैं। लेकिन नए नोट देश के दूरदराज के इलाकों में पहुंचने 

में समय लगेगा। 

 

बैंकों की ब्रांच से चेस्‍ट में जमा होने वाले कैश में आई कमी 

 

अश्विनी राणा के मुताबिक बैंकों की हर ब्रांच के लिए कैश की एक लिमिट होती है। यह लिमिट इस आधार पर तय होती है कि ब्रांच किस इलाके में है और वहां सिक्‍योरिटी की क्‍या व्‍यवस्‍था है। ब्रांच में लिमिट से ज्‍यादा कैश होने पर कैश चेस्‍ट में जमा कराया जाता है। पहले ब्रांच में चेस्‍ट में कैश लगभग नियमित तौर पर जमा कराया जाता था लेकिन अब ऐसा होना बहुत कम हो गया है। अब आम तौर पर सप्‍ताह में एक बार ही ऐसा होता है कि ब्रांच से कैश चेस्‍ट में जमा कराया जाता हो। इसके आधार पर बैंकों ने पहले ही भांप लिया था कि आने वाले समय में कैश की

किल्‍लत हो सकती है। 

 

बैंकों में हुए फ्रॉड और एफडीआरआई बिल को लेकर अफवाहों से भी बढ़ा विद्ड्रॉअल 

 

बैंकिंग इंडस्‍ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हाल में पंजाब नेशनल बैंक सहित दूसरे बैंकों में सामने आए फ्रॉड के मामलों की वजह से भी आम लोगों का भरोसा बैंकों में कम हुआ है। इसके अलावा एफडीआरआई बिल को लेकर चल रही अफवाहों से भी लोगों को लगा कि बैंकों मे जमा उनका पैसा सुरक्षित नहीं है। इसकी वजह से भी बहुत से लोगों ने अपना पैसा बैंकों से निकाला है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को एफडीआरआई बिल को लेकर चल रही अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए सफाई देनी पड़ी थी और उन्‍होंने लोगों को आश्‍वस्‍त किया था कि बैंकों में जमा उनका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। 

 

एसबीआई का दावा सिस्‍टम में 70 हजार करोड़ रुपए के कैश की कमी 

 

भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सिस्‍टम में करीब 70 हजार करोड़ रुपए की नगदी की कमी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2018 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.8 फीसदी रही है, जिसके अनुसार मार्च में सिस्‍टम में 19.4 लाख करोड़ रुपए होना चाहिए। जबकि वास्‍तव में सिस्‍टम में नगदी का स्‍तर 17.5 लाख करोड़ रुपए का था। इस प्रकार सिस्‍टम में 1.9 लाख करोड़ रुपए की नगदी का मिसमैच था।

 

 

 

 

डिजिटल ट्रांजैक्‍शन कम हाेने से हुई दिक्‍कत


रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान डिजिटल ट्रांजैक्‍शन की संख्‍या में कमी दर्ज की गई है। इस दौरान 1.2 लाख करोड़ रुपए के ही डिजिटल ट्रांजैक्‍शन ही हुए। यह संख्‍या नोटबैन के बाद के महीनों से भी कम थी। नगदी और डिजिटल ट्रांजैक्‍शन की बीच का यह फासला करीब 70 हजार करोड़ रुपए का रहा, जिसके चलते नगदी का संकट पैदा हुआ।


देश में 17.84 लाख करोड़ का कैश 


नगदी की कमी के बारे में रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार देश में नगदी का स्‍तर 17.84 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह नोटबंदी के दौरान के स्‍तर से ज्‍यादा है। इसके अलावा छोटो नाेटों की आपूर्ति को बढ़ाने के प्रयास को भी कारण माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार 200 के नोटों की छपाई में तेजी लाई गई है। वहीं ATM में तेजी से बदलाव किए गए हैं, जिससे उचित नोटों की कमी महसूस की गई। रिजर्व बैंक ने भी कहा है कि नगदी की कमी नहीं है, लेकिन फिलहाल यह लॉजिस्टिक का इश्‍यू है। इसके अलावा 200 के नोटों के हिसाब से ATM में बदलाव भी नहीं किए गए हैं।

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