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इस शख्‍स ने किया कॉरपोरेट डर्टी गेम का खुलासा, फंस गई कोचर फैमिली

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को दिया गया 3250 करोड़ रुपए का लोन सवालों के घेरे में है। यह लोन एनपीए हो गया है।

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नई दिल्‍ली। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को दिया गया 3250 करोड़ रुपए का लोन सवालों के घेरे में है। यह लोन एनपीए हो गया है। अब केंद्र सरकार इस बात की जांच कर रही हे कि क्‍या आईसीआईसीआई बैंक ने यह लोन गलत तरीके से दिया है या किसी को फायदा पहुंचाने के लिए यह डील की गई। इस डील को लेकर आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर का परिवार और वेणुगोपाल धूत जांच एजेंसियों के शिकंजे में आ गए हैं। इनकम टैक्‍स विभाग ने सोमवार को चंदा कोचर के पति दीपक कोचर से पिछले सालों के इनकम टैक्‍स रिटर्न की डिटेल मांगी है। ऐसा एक शख्स की वजह से हो रहा है। हम आपको बता रहे हैं कि ये शख्‍स कौन है और उन्‍होंने कॉरपोरेट के डर्टी गेम का खुलासा किस तरह से किया। 

 

कॉरपोरेट का डर्टी गेम 


अरविंद गुप्ता वह शख्स हैं जिन्होंने सीधे तौर पर प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर लोन देने में मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि कोचर ने अपने पति को फायदा पहुंचाने के लिए बैंक के जरिए वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिलवाया। इस वजह से बैंक का 3250 करोड़ रुपए का लोन एनपीए हो गया है। गुप्ता का कहना है कि इस वजह से इन्वेस्टर्स को नुकसान हुआ है। ऐसे में चीजें क्लीयर होनी चाहिए। गुप्ता के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने साल 2016 में ही पीएमओ, आरबीआई, सेबी सहित सभी को लेटर भी लिखा, लेकिन उन्हें कहीं से जवाब नहीं मिला। moneybhaskar.com के Mahendra Singh ने गुप्ता से पूरे मसले पर विस्तार से बात की है। प्रमुख अंश: 


मिलीभगत से डूबा पैसा

 

अरविंद गुप्‍ता का कहना है कि इस मामले में पैसा बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से डूबा है। इस पैसे की भरपाई कौन करेगा। यह आम जनता का पैसा है। शेयर होल्‍डर को नुकसान हुआ है । आम आदमी का भरोसा कैसे बहाल होगा।

 

आखिर पैसा डूबने के लिए कौन जिम्‍मेदार

 

अरविंद गुप्‍ता ने कहा कि एक कंसोर्टियम ने ग्रुप को 40,000 करोड रुपए का लोन दिया कि कंपनी चल जाएगी और पैसा वापस मिल जाएगा। कंसोर्टियम का पैसा भी वापस नहीं आया और आईसीआईसीआई बैंक का पैसा भी डूब गया। पूरा पैसा एनपीए हो गया इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है। आईसीआईसीआई बैंक का बोर्ड कह रहा है कि हमारा लोन देने का इंटरनल सिस्‍टम बहुत रोबस्‍ट है। इस रोबस्‍ट सिस्‍टम का क्‍या फायदा, जब बैंक का पैसा डूब गया। आप अपने आपको पाक साफ बता रहे हैं। आपने कोई ऐसी बात कही जिससे लगे कि बैंक में रखा आम आदमी का पैसा सुरक्षित है या शेयर होल्‍डर का हित सुरक्षित है।


बेगुनाह हैं तो एनसीएलटी में जाकर साबित करें

 

अगर आईसीआई बैंक का प्रबंधन को लगता है कि वे बेगुनाह हैं तो वे एनसीएलटी में जाकर अपनी बेगुनाही साबित करें। वे इस मामले में ऐसे अपने आपको पाक साफ साबित नहीं कर सकते हैं।

 


कानून का करना होगा सामना

 

सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के तहत प्राइवेट सेक्‍टर के बैंक के इम्‍पलाई भी पब्लिक सर्वेट हैं। ऐसे में अगर उनकी इस मामले में मिलीभगत सामने आती है तो उनको करप्‍शन के मामले में कानून का सामना करना होगा। वे इससे बच नहीं सकते हैं।


क्‍या है मामला

 

अरविंद गुप्‍ता का दावा है कि वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। यह लोन नहीं चुकाया गया। बाद में वीडियोकॉन की मदद से बनी एक कंपनी आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाले ट्रस्ट के नाम कर दी गई। यह लोन वीडियोकॉन ग्रुप और चंदा कोचर की मिलीभगत से दिया गया जो डूब गया।


कौन हैं अरविंद गुप्‍ता

 

अरविंद गुप्‍ता वीडियोकॉन ग्रुप और आईसीआईसीआई बैंक दोनों में शेयर होल्‍डर हैं। अरविंद गुप्‍ता इंडियन इन्‍वेस्‍टरर्स प्रोटेक्‍सन काउंसिल के ट्रस्‍टी भी हैं।

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