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नोटबंदी के डेढ़ साल बाद 60% बढ़ा कैशलेस ट्रांजैक्‍शन, डेबिट-क्रेडिट कार्ड से सबसे ज्‍यादा खरीददारी

इन डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है।

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नई दिल्‍ली। 8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी को डेढ़ साल हो चुके हैं और फाइनेंशियल ईयर 2017-18 पूरा हो चुका है। इन डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें से सबसे बड़ी हिस्‍सेदारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से हो रही खरीददारी की  है। 
 

RBI की रिपोर्ट में खुलासा 
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2018 में 109 करोड़ 80 लाख इलैक्‍ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजैंक्‍शन हुई, जबकि नवंबर 2016 में 67 करोड़ 15 लाख ट्रांजैंक्‍शन हुई। हालांकि जनवरी 2018 में रिकॉर्ड 112 करोड़ 23 लाख ट्रांजैंक्‍श्‍ान हुई, लेकिन सरकार के लिए अच्‍छी खबर यह है कि नवंबर के बाद से लगातार इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रांजैंक्‍शन बढ़ी है, जिससे सरकार के कैशलेस इकोनॉमी के वादे को बल मिला है। 

 

प्‍लास्टिक मनी का चलन बढ़ा 
देश में कई साल से प्‍लास्टिक मनी यानी डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल हो रहा है, लेकिन नोटबंदी के बाद से इसके इस्‍तेमाल में काफी तेजी आई है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कुल कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में 22 फीसदी की हिस्‍सेदारी है। मार्च 2018 में जहां 109 करोड़ ऑनलाइन ट्रांजैंक्‍शन हुई, उसमें से 24 करोड़ 71 लाख ट्रांजैंक्‍शन पीओएस मशीन पर डेबिट व क्रेडिट कार्ड से हुई। 

 

किसकी कितनी हिस्‍सेदारी 

कुल ट्रांजैंक्‍शन  109.80 करोड़ 
डेबिट क्रेडिट  24.71 करोड़ 
यूपीआई  17.12 करोड़ 
एनएसीएच  19.91 करोड़ 
यूएसएसडी  15.61 करोड़ 
पीपीआई  11.31 करोड़ 
मोबाइल बैंकिंग  10.25 करोड़ 
आईएमपीएस  9.92 करोड़ 
सीटीएस  9.18 करोड़ 

 

यूपीआई की तेजी से बढ़ रही है हिस्‍सेदारी 
नोटबंदी के बाद शुरू हुए यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) के चलन का असर अब पूरी तरह से दिखने लगा है। नवंबर 2016 में जहां लगभग 3 लाख ट्रांजैंक्‍शन यूपीआई से हुई थी, मार्च 2018 में बढ़ कर 15 करोड़ 17 लाख तक पहुंच गई। 


सफल हो रहा है कैशलेस इकोनॉमी का सपना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की थी तो उन्‍होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि  देश कैशलेस इकोनॉमी की तरफ बढ़े और लोग कम से कम कैश का प्रयोग लेनदेन में करें। आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री का यह सपना पूरा हो रहा है, क्‍योंकि बाजार में नए नोट आने के बावजूद भी लोग लगातार कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन कर रहे हैं। 

 

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