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खास खबर: चुनाव के लिए तो नहीं हो रही है कैश की जमाखोरी

नई दिल्‍ली। एटीएम में कैश की किल्‍लत को लेकर देश के वित्‍त मंत्री से लेकर पूरी सरकार डैमेज कंट्रोल के मोड में आ गई है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली अपनी तरफ से सफाई दे रहे है कि ऐसा कैश की अचानक मांग बढ़ने की वजह से हुआ है और हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि अगले कुछ दिनों में हालात सामान्‍य हो जाएं। सरकार चुनावी साल में ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहती जिससे लगे की उसकी गलती की वजह से कैश को लेकर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।

हालांकि एक्‍सपर्ट का मानना है कि नोट की छपाई ओर सप्‍लाई को लेकर कुछ दिक्‍कते हैं लेकिन यह इतना बड़ा कारण नहीं कि जिससे कैश की किल्‍लत अचानक इतनी बढ़ जाए। आगामी कुछ महीनों में पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं इसके अलावा 2019 में देश का आम चुनाव है। ऐसे में चुनाव की तैयारी के सिलसिले में लोग बड़े पैमाने पर कैश की जमाखेरी कर रहे हैं। चुनाव में बड़े पैमाने पर कैश का इस्‍तेमाल होता है। ऐसे यह तर्क काफी मजबूत लगता है कि चुनावी साल में राजनीतिक दल और नेता चुनाव में खर्च के लिए कैश का इंतजाम कर रहे है और आम जनता की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। 

 

चुनाव के खर्च के लिए कैश का इंतजाम कर रहे हैं नेता 

 

सूत्रों का कहना है कि चुनावी साल में सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे उसे आम लोगों के आकोश का सामना करना पड़े। कैश की छपाई और सप्‍लाई को लेकर कुछ दिक्‍ततें हो सकती हैं लेकिन कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कैश का सर्कुलेशन कम करने का तर्क सही नहीं लगता है। यह जरूर हो सकता है कि यह चुनावी साल है। आगामी महीनों में देश के 5 राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा 2019 में आम चुनाव हैं। ऐसे में राजनीतिक दल और नेता चुनाव के लिए पहले से कैश की होडिंग कर रहे हैं। एकदम चुनाव के समय इतने बड़े पैमाने पर कैश का इंतजाम करना आसान नहीं होगा। इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट भी अब कैश लेन देन और विद्ड्रॉअल हिस्‍ट्री पर नजर रख रहा है। ऐसे में नेता भी एक बार में ही पैसों का इंतजाम करने के बजाए पहले से ही इसकी तैयारी कर रहे हैं जिससे वे सरकार की जांच एजेंसी के ट्रैक में आसानी से न आ पाएं। 

 

चुनाव से पहले होती है कैश की किल्‍लत 

 

इकोनॉमिस्‍ट पई पनिन्‍दकर ने moneybhaskar.com को बताया कि आम तौर पर हर चुनाव से पहले कैश की किल्‍लत होती है। यह कोई नई बात नहीं है।  चुनाव में राजनीतिक दलों के अलावा कैंडीडेट को भी चुनावी रैली और ट्रांसपोर्ट के इंतजाम के लिए पैसों की जरूरत होती है। अगले कुछ महीनों में कर्नाटक सहित देश के पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा 2019 के आम चुनाव को लेकर भी उम्‍मीदवारों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। नोटबंदी के बाद इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट अब कैश डिपॉजिट और विदड्रॉअल पर कड़ी नजर रख रहा है। ऐसे में नेता भी अब सतर्क हो गए हैं और उन्‍होंने पहले से ही कैश का इंतजाम करना शुरू कर दिया है। 

 

चुनाव से पहले 1 लाख करोड़ रुपए कैश विद्ड्रॉअल पर रिजर्व बैंक ने किया था अलर्ट 

 

चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्‍याशियों के लिए तो चुनाव में खर्च की सीमा तय की है। लेकिन राजनीतिक दलों के लिए चुनाव में खर्च की कोई सीमा तय नहीं है। इलेक्‍शन वाच डॉग एसोसिएशन ऑफ डेमाक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने 2016 की अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस वजह से चुनाव में कालेधन का इस्‍तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। एडीआर ने अपनी  रिपोर्ट में रिजर्व बैंक के एक पत्र का हवाला भी दिया है जिसमें रिजर्व बैंक ने चुनाव से पहले 1 लाख करोड़ रुपए कैश विदड्रॉअल पर चिंता जताई थी। 

 

आरबीआई ने दी सफाई 


कैश की किल्‍लत के बीच रिजर्व बैंक ने बयान जारी करते हुए साफ किया कि कैश की कोई कमी नहीं है और आरबीआई के करंसी चेस्ट्स में पर्याप्त नकदी मौजूद है। इससे पहले सरकार ने भी नकदी संकट पर कहा था कि एकाएक कैश डिमांड बढ़ने से कैश की कमी हुई है लेकिन उसे कोई परेशानी नहीं होगी। आरबीआई ने बताया कि नोटों को छापने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। हालांकि कुछ इलाकों में कैश को पहुंचाने में आने वाली दिक्कतों के कारण नकदी संकट से निपटने में कुछ दिन लग सकते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि कुछ हिस्सों में ATMs में कैश पहुंचाने में कुछ समय लग सकता है। साथ ही कई ATMs मशीनों में नए नोटों के लिए रीकैलिब्रेशन की प्रक्रिया अभी भी जारी है। आरबीआई ने कहा इन दोनों ही पहलुओं पर उसकी नजर बनी हुई है। फिर भी सावधानी बरतते हुए आरबीआई ऐसे इलाकों में कैश की आपूर्ति तेज करेगा जहां एकाएक कैश निकासी में तेजी आई है। 

 

आगे पढें- कैश की किल्‍लत पर हरकत में आई सरकार 

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