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रायफल से लेकर जैकेट की किल्‍लत से जूझ रही है सेना, फिर भी 7.25 % बढ़ा डिफेंस बजट

नई दिल्‍ली... बीते 1 फरवरी को जब फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने आम बजट पेश किया तो देशभर की निगाहें इस बात पर थीं कि डिफेंस सेक्‍टर के लिए क्‍या मिला। बजट में डिफेंस सेक्‍टर के लिए 2,95,511.41 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। वैसे तो यह पिछले बजट अनुमान के मुकाबले करीब 7.81% ज्यादा है। लेकिन डिफेंस एक्‍सपर्ट रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक कुमार मेहता इस रकम को बेहद मामूली करार देते हैं। उनका कहना है कि इस बजट से रक्षा जरूरतें पूरी नहीं होंगी। पिछली कई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारतीय सेना रायफल से लेकर बुलेट प्रूफ जैकेट तक के लिए जूझ रही है। सेना के पास ढंग के रायफल नहीं हैं। हमारी सेना बुलेट प्रूफ जैकेट और बैलेस्टिक हेलमेट की भी किल्‍लत से जूझ रही है । 

 

 

1962 के बाद सबसे कम बजट 


अशोक कुमार मेहता  का कहना है कि 1962 के बाद इस क्षेत्र के लिए सबसे कम बजट प्रस्‍‍तावित किया गया है। ऐसा तब है जब चीन की तरफ से लगातार भारत को खतरा बना हुआ है। वहीं पाकिस्‍तान के जरिए चीन भारत को घेरने की कवायद में जुटा हुआ है और तेजी से अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा है। इन हालातों में रक्षा बजट का कम होना रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के पूरा होने पर सवाल जरूर खड़ा करता है। 

 

CAG ने भी उठाए सवाल 
पिछले साल भारत की रक्षा तैयारियों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में भी सेना और सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। सीएजी की तरफ़ से आईएल-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ़्ट के रख-रखाव में खामियों के साथ पुराने पड़ते लड़ाकू विमान और भारतीय मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता पर चिंता जताई गई थी। 

 

10 दिनों तक लड़ने के लिए ही गोला-बारूद


सीएजी रिपोर्ट के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड से 80 मिसाइल सिस्टम मिले जिनमें से 30 फ़ीसदी आकाश मिसाइल सिस्टम बुनियादी परीक्षण में ही नाकाम रहे। मार्च 2017 की रिपोर्ट में सीएजी ने इस बात को भी रेखांकित किया था कि भारत सरकार ने 2016 में आकाश मिसाइल को भारत-चीन सीमा पर तैनात करने की घोषणा की थी, लेकिन एक जगह भी इसे स्थापित करने में कामयाबी नहीं मिली। सीएजी ने यहां तक कहा था कि भारतीय सेना के पास 10 दिनों तक लड़ने के लिए ही गोला-बारूद है।आगे पढ़ें - इस बार हथियारों के लिए क्‍या मिला 

 

 

 

 

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