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CDR में 55 फीसदी केस हुए फेल, बैंकों के 1.7 लाख करोड़ लोन रिकवरी का मामला फंसा

कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (CDR) सेल में बैंकों का करीब 1.72 लाख करोड़ रुपया फंस गया है

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नई दिल्ली। बैंकों के लिए एनपीए की प्रॉब्लम दूर होती नहीं दिख रही है। अकेले कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (CDR) सेल में बैंकों का करीब 1.72 लाख करोड़ रुपया फंस गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि CDR सेल में आए करीब 55 फीसदी केस फेल हो गए हैं। जिसका सीधा असर बैंकों के कर्ज रिकवरी पर दिखेगा।

 

55 फीसदी मामले हुए फेल

CDR सेल की सितंबर 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार करीब 55 फीसदी मामले पैकेज लेने में फेल हो गए हैं। इसके तहत 291 केस CDR के  पैकेज लेने का फायदा नहीं उठा सके हैं। सितंबर 2017 तक CDR सेल में कुल 531 मामले अप्रूव हुए थे। फेल हुई कंपनियों का बैंकों के ऊपर करीब 1.72 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है।

 

इन्सॉल्वेंसी के तहत होगी कार्रवाई

बैंकर जी.एस.बिंद्रा के अनुसार सीडीआर में मामला जाने पर कंपनियों को कर्ज सस्ता रेट पर चुकाने का मौका मिलता है। साथ ही कंपनियों को ये प्लान देना होता है कि वह 5 साल में कैसे प्रॉफिट में आएंगी। इसके अलावा बैंक उनके प्रमोटर्स से भी 20-30 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर कर्ज चुकाने का रोडमैप पेश करते हैं। जब कंपनियां इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाती हैं, तो फिर उन्हें पैकेज के लिए फेल मान लिया जाता है। अब इन कंपनियों पर इन्सॉल्वेंसी कानून के तहत ही एक्शन लिया जाएगा। यानी बैंकों का पैसा अभी फंसा ही रहेगा।

 

CDR में केवल 110 कंपनियां हुई एक्जिट

सितंबर 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार सीडीआर सेल में केवल 110 कंपनियां ही है, जो सफलतापूर्वक एक्जिट हुई हैं। यानी ये वो कंपनियां हैं, जिन्होंने बैंकों के सामने 5 साल में प्रॉफिट में आने का संतोषजनक रोडमैप पेश किया है। इन कंपनियों का करीब 84566 करोड़ रुपया बैंकों का पास फंसा है। बिंद्रा के अनुसार प्रॉफिट में आने का रोडमैप पेश होने के बाद बैंकों के लिए इनसे कर्ज की रिकवरी करने की उम्मीद बढ़ जाती है।

 

इन सेक्टर पर सबसे ज्यादा कर्ज

इंडस्ट्री

कंपनियों की संख्या

कुल कर्ज (करोड़ रुपए)

ऑयरन एंड स्टील

30

28029

इंफ्रास्ट्रक्चर

10

26730

ईपीसी

5

23522

इंजीनियरिंग

7

14473

कंस्ट्रक्शन

9

11888

 
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