इन्वेस्टमेंट /एक-दो नहीं, बल्कि कई तरह के होते हैं म्युचुअल फंड, थोड़ी सी जानकारी से कर सकेंगे बेस्ट स्कीम में निवेश

  • ELSS भी एक तरह का म्युचुअल फंड है, जो टैक्स सेविंग में काम आता है।

Moneybhaskar.com

Jul 01,2019 03:09:00 PM IST

नई दिल्ली.
बाजार में निवेश के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इसमें से म्युचुअल फंड को सबसे सुरक्षित माना जाता है। जो लोग शेयर बाजार में निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं, वे म्युचुअल फंड में आसानी से निवेश कर सकते हैं। इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट कितना भी अच्छा क्यों न हों, उसके बारे में बेसिक जानकारी आपको होनी ही चाहिए। ऐसे ही हम आपको बताने जा रहे हैं कि म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं, जिससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से बेस्ट स्कीम में निवेश कर सकें।


स्ट्रक्चर के हिसाब से म्युचुअल फंड तीन तरह के होते हैं-

1.ओपन एंडेड- आप इस तरह की म्यूचुअल फंड स्कीम में किसी भी वक्त निवेश कर सकते हैं। ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश को किसी समय भुनाया जा सकता है। इस स्कीम की NAV (नेट एसेट वैल्यू) पर ही इसे खरीदा-बेचा जा सकता है। इस तरह की MF स्कीम में निवेश करने पर आपको अलग से चार्ज देना पड़ता है।

2.क्लोज्ड एंडेड स्कीम- कई बार म्युचुअल फंड कंपनियां क्लोज्ड एंडेड स्कीम लांच करती हैं। इस तरह की MF स्कीम में आप निर्धारित अवधि में ही निवेश कर सकते हैं। अगर आप क्लोज्ड एंडेड म्युचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं तो आप इसे मैच्योरिटी के बाद ही भुना सकते हैं। क्लोज एंडेड स्कीम में तरलता के लिए MF हाउस इसे शेयर बाजार में खरीद-फरोख्त के लिए उपलब्ध कराते हैं।

3. इंटरवल स्कीम म्युचुअल फंड- इस तरह की स्कीम फंड प्रबंधन की अवधि में दोबारा खरीदी जा सकती है। दरअसल इंटरवल स्कीम में ओपन और क्लोज्ड एंडेड, दोनों स्कीम की सुविधा मिली है, यही इसकी खासियत है।


एसेट क्लास के हिसाब से म्युचुअल फंड चार तरह के होते हैं:

1.इक्विटी फंड (Equity Fund)- इक्विटी फंड वास्तव में शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। इक्विटी म्युचुअल फंड को काफी जोखिम वाला निवेश समझा जाता है। वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक अगर आपमें जोखिम उठाने की क्षमता हो और आपके निवेश का नजरिया लंबी अवधि का हो तभी आपको इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। आम तौर पर इक्विटी फंड बेहतर रिटर्न देते हैं।

2.डेट फंड (Debt Fund)- डेट म्युचुअल फंड वास्तव में सरकारी बॉन्ड, कंपनियों के डिबेंचर या निश्चित रिटर्न वाले अन्य विकल्पों में निवेश करते हैं। वित्तीय सलाहकार डेट म्युचुअल फंड में उन लोगों को निवेश करने की सलाह देते हैं जो जोखिम नहीं उठाना चाहते।

3.मनी मार्केट लिक्विड फंड (Money Market Liquid Fund)- इस तरह के म्युचुअल फंड मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं। मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में ट्रेजरी बिल और कमर्शियल पेपर (सीपी) आदि आते हैं। ये निवेश भी शेयरों की तुलना में मामूली जोखिम वाले ही होते हैं। जोखिम कम होने की वजह से इस तरह के निवेश में रिटर्न भी तुलनात्मक रूप से कम होता है। इसे वास्तव में कैश मार्केट फंड की तरह भी देखा जाता है।


4. बैलेंस या हाइब्रिड फंड (Balance Fund)- बैलेंस म्युचुअल फंड वास्तव में शेयर और डेट, दोनों एसेट क्लास में निवेश करते हैं। कई बार इस तरह के फंड में शेयर में निवेश की हिस्सेदारी बढ़ जाती है। शेयर में निवेश की हिस्सेदारी के हिसाब से बैलेंस या हाइब्रिड फंड बेहतर रिटर्न देने में भी सक्षम हैं। आम तौर पर बैलेंस या हाइब्रिड फंड इक्विटी फंड की तुलना में कम जोखिम वाले म्युचुअल फंड समझे जाते हैं। थोड़ा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशकों को वित्तीय सलाहकार बैलेंस या हाइब्रिड फंड में निवेश करने की सलाह देते हैं।

अन्य म्युचुअल फंड:

लिक्विड फंड (Liquid Fund)- यह भी डेट फंड होते हैं, जिनका प्रमुख उद्देश्य आसान तलरता, कैपिटल को सुरक्षित रखना और छोटी आय प्रदान करना होता है। इस स्कीम में ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, कमर्शियल पेपर और इंटर-बैंक कॉल मनी, सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए सुरक्षित और शॉर्ट-टर्म निवेश किया जाता है। हालांकि इन स्कीम्स में रिर्टन बहुत अधिक नहीं होता है, क्योंकि इनका प्राथमिक मकसद पूंजी का बचाव होता है। ये फंड ऐसे इन्वेस्टर्स के लिए अच्छे होते हैं जो अपने अतिरिक्त धन को कम समय के लिए कहीं निवेश करना चाहते हैं।


गिल्ट फंड (Gilt Funds)- यह एक तरह के डेट फंड होते हैं, जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। सरकारी प्रतिभूतियां डिफॉल्ट रिस्क से मुक्त होती हैं। हालांकि, इन स्कीम की नेट असेट वैल्यू (NAVs) इंटरेस्ट रेट और अन्य आर्थिक फैक्टर्स में बदलाव के साथ बदलती रहती है, जैसा कि इनकम या डेट ओरिएंटेड स्कीम में होता है।


इंडेक्स फंड (Index Fund)- इंडेक्स फंड्स को S&P BSE sensex, Nifty 50 जैसे किसी खास इंडेक्स की तर्ज पर डिजायन किया जाता है। ये स्कीम्स इन्हीं खास इंडेक्स में से किसी एक इंडेक्स के जैसे ही प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं। लिहाजा इन स्कीम्स का NAVs इंडेक्स में बढ़ोतरी या कमी के हिसाब से ही बदलता है।


एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Exchange-traded Fund)- यह इंडेक्स फंड के जैसे ही होते हैं। ये कंपनियों के स्टॉक्स में निवेश करते हैं, जिससे यह स्टॉक मार्केट इंडेक्स का हिस्सा बनाते हैं। इंडेक्स फंड स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं होते हैं। इन्वेस्टर्स को म्युचुअल फंड से अपनी यूनिट खरीदनी और रिडीम करानी पड़ती हैं।

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडिड फंड (Gold Exchange Traded Funds)- गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडिड फंड 24 कैरेट फिजिकल गोल्ड में निवेश करते हैं, जिसे मान्यता प्राप्त गोदामों में सुरक्षित कस्टडी में रखा जाता है।

सेक्टर/थिमैटिक फंड (Sector/Thematic Funds)- सेक्टर/थिमैटिक फंड किसी खास सेक्टर या इंडस्ट्री की प्रतिभूतियों में निवेश करता है, जैसे कि Fast Moving Consumer goods (FMCG), pharmaceuticals, Information Technology, जैसे कि इन्वेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव में बताया जाता है। यह फंड किसी खास सेक्टर या इंडस्ट्री के रिटर्न को एकत्र करते हैं। इनमें ऊंचा रिटर्न मिलते की उम्मीद रहती है, लेकिन ये बंटे हुए इक्विटी फंड की तुलना में रिस्की होते हैं। लिहाजा निवेशकों को किसी उन सेक्टरों की परफॉमेंस के बारे में पहले से जानकारी होनी जरूरी है।

टैक्स सेविंग फंड (Tax Saving Funds)- ऐसे कई इक्विटी फंड हैं, जो निवेश करने पर टैक्स में छूट देते हैं। इन्हें Equity Linked Savings Schemes (ELSS) कहा जाता है। इनकम टैक्स के Section 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है।


फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds)- यह कई स्कीम्स का मिला-जुला फंड है। इसमें आप एक साथ डेट, इक्विटी या गोल्ड जैसी कई सारी स्कीम्स के जरिए असेट क्लास में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

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