प्लानिंग /अंतरराष्ट्रीय इक्विटी म्युचुअल फंड्स से भी मिल सकता है बेहतर रिटर्न

  • जानिए इंटरनेशनल इक्विटी फंड के बारे में

Moneybhaskar.com

Aug 14,2019 05:37:16 PM IST

नई दिल्ली. म्यूचुअल फंड डोमेन में हाल ही में इंटरनेशनल इक्विटी फंड्स और इंडेक्स फंड्स शब्द चर्चा में रहे हैं। हम आपको इंटरनेशनल इक्विटी फंड को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे। भारतीय बाजारों की तुलना में अमेरिकी इक्विटी बाजारों में, विशेष रूप से लार्ज कैप में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण ये फंड हाल ही में लोकप्रिय हुए।

इंटरनेशनल इक्विटी फंड क्या है?

कोई म्यूचुअल फंड जो मुख्य रूप से विदेशों में इक्विटी या इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में अपनी संपत्ति का 80% से अधिक निवेश करता है, उसे इंटरनेशनल इक्विटी फंड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। सेबी के री-कैटेगराइजेशन नॉर्म्स के अनुसार ये फंड सेक्टोरल/थीमैटिक श्रेणी में आते हैं। ये फंड दो तरह से काम करते हैं। एक, भारत में फंड मैनेजर का होना, जो अंतरराष्ट्रीय कंपनी के शेयरों पर फैसला लेता है और निवेश करता है। उदाहरण के लिए: आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल यूएस ब्लूचिप इक्विटी फंड, आदित्य बीएसएल इंटरनेशनल इक्विटी फंड- प्लान ए आदि। दो, वे फंड ऑफ फंड (एफओएफ) के रूप में काम करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे आपके द्वारा निवेश की गई राशि को पूरी तरह से दूसरे इंटरनेशनल फंड में डाल देते हैं और स्वयं स्टॉक में निवेश नहीं करते हैं। उदाहरण के लिए: फ्रैंकलिन इंडिया फीडर-फ्रैंकलिन यूएस अपॉरच्युनिटी फंड, डीएसपी यूएस फ्लेक्सिबल इक्विटी फंड आदि।

भारत में एएमसी द्वारा पेश किए जाने वाले अधिकांश इंटरनेशनल इक्विटी फंड लार्ज कैप ओरिएंटेड होते हैं और अमेरिकी इक्विटी में निवेश करते हैं। जबकि कुछ फंड्स हैं जो अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में भी निवेश करते हैं, उदाहरण के लिए फ्रैंकलिन एशियन इक्विटी फंड, एडलवाइस यूरोप डायनेमिक इक्विटी ऑफशोर फंड, एचएसबीसी ब्राजील फंड, आदि। निवेशकों को उन हाई रिटर्न की ओर आकर्षित किया जा सकता है जो इन फंड्स ने काफी कम समय में दिए हैं। हालांकि, उन्हें यह जानने की जरूरत है कि ये रिटर्न हाई वोलाटाइल (अस्थिर) भी होते हैं। तो, क्या आपको इंटरनेशनल इक्विटी फंड में निवेश करना चाहिए? इस सवाल का जवाब देने के लिए, इंटरनेशनल इक्विटी फंड्स के पक्ष और विपक्ष की उचित समझ और भारतीय लार्ज कैप फंड्स के खिलाफ उनके प्रदर्शन को जानना आवश्यक है।

इंटरनेशनल इक्विटी फंड में निवेश करने से पहले जानने के लिए मुख्य बिंदु

  • टैक्सेशन : भारतीय लार्ज कैप फंड्स के विपरीत, इंटरनेशनल इक्विटी फंड पर पूंजीगत लाभ डेब टैक्सेशन को आकर्षित करते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि तीन साल से कम अवधि के लिए, आपके टैक्स स्लैब के अनुसार पूंजीगत लाभ पर कर लगेगा (यह 30% से अधिक अधिभार और उपकर के रूप में हो सकता है)। यदि होल्डिंग की अवधि 3 वर्ष से अधिक है, तो इंडेक्सेशन के लाभ के साथ कर की दर 20% होगी। एक भारतीय लार्ज कैप फंड में, दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (1 वर्ष से अधिक) प्रति वर्ष 1 लाख रुपए तक कर-मुक्त हैं, और इससे आगे 10% से अधिक अधिभार और उपकर लगाया जाता है।
  • एक्सपेंस रेशियो : अधिकांश इंटरनेशनल इक्विटी फंड, एफओएफ होने के नाते, अपने सामान्य खर्चों के साथ-साथ अंतर्निहित इंटरनेशनल प्लान का खर्च भी लेते हैं जिसमें वे निवेश कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप खर्च राशि स्टैंड अलोन फंड से अधिक हो सकती है। इसलिए, आपको इन फंड्स में निवेश करते समय कुल खर्च पर नजर रखने की जरूरत है।
  • करेंसी हेजिंग : इंटरनेशनल इक्विटी फंड्स में ज्यादातर निवेश प्रचलित विनिमय दरों के आधार पर होता है। ऐसे में आपको रिटर्न में रुपये के मूल्यह्रास का केवल आंशिक लाभ मिल सकता है।
  • हायर सेटलमेंट पीरियड : इंटरनेशनल इक्विटी फंड में भारतीय लार्ज कैप फंड के लिए 3 के बजाय 5 दिन तक का हायर सेटलमेंट पीरियड होता है। इसका आशय यह है कि आपके रिडेम्पशन रिक्वेस्ट से आपका पैसा वापस पाने में 5 कार्य दिवस तक का समय लग सकता है।
  • अधिक व्यापक समझ और निगरानी की आवश्यकता है: एक भारतीय नागरिक के रूप में, आप समाचार पत्रों या अन्य स्रोतों के माध्यम से घरेलू बाजार के प्रदर्शन पर नज़र रख सकते हैं। हालाँकि, आप नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नज़र नहीं रख पाते। इसके अलावा, जटिलता की एक अतिरिक्त परत एफओएफ में अंतर्निहित इक्विटी निवेश का पता लगाने से संबंधित है। इसके अलावा उनका प्रदर्शन कई कारकों पर निर्भर होता है, जैसे- आर्थिक चक्र, सरकारी नीतियां,वैश्विक कारक। आप अपने पोर्टफोलियो की देखभाल तभी अच्छे से कर सकते हैं जब आपके पास एक जानकार सलाहकार हो या आप खुद एक विशेषज्ञ हो।

लेकिन इनमें निवेश के कुछ फायदे भी हैं, जैसे कि

  • डायवर्सिफिकेशन: इंटरनेशनल फंड्स में निवेश करने से भौगोलिक रूप से आपके पोर्टफोलियो में डायवर्सिफाई करने में मदद मिलती है। विभिन्न देश अपने घरेलू बाजारों में स्थितियों को देखते हुए विभिन्न चक्रों से गुजरते हैं। डेटा बताता है कि अधिकांश इंटरनेशनल फंड्स का भारतीय बाजारों के साथ संबंध कम ही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर आपके पोर्टफोलियो में अस्थिरता को कम करने में मदद कर सकता है।
  • शीर्ष कंपनियों में निवेश करें: इंटरनेशनल फंड आपको दुनिया की शीर्ष कंपनियों जैसे एप्पल, अमेजन, और अल्फाबेट आदि में निवेश का अवसर प्रदान करेगा। ये कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में मार्केट लीडर हैं और आप अपने प्रतिस्पर्धी लाभों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

लेखक: पूर्णकालिक निदेशक प्रवीण जाधव, पेटीएम मनी

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