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म्यूचुअल फंड में लगा रहे हैं पैसा, तो जान लें ये 8 फायदे

म्यूचुअल फंड के जरिए सिर्फ इक्विटी या शेयर बाजार में ही नहीं, बल्कि डेट, गोल्ड और कमोडिटी में भी पैसे लगाए जा सकते हैं।

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नई दि‍ल्‍ली. म्यूचुअल फंड आज के दौर में इन्वेस्टमेंट का एक नया जरिया बनता जा रहा है। बढ़ते निवेश के साथ ही कई तरह के सवाल भी इन्वेस्टर के मन में रहते हैं। ऐसे में म्यूचुअल फंड का खासियत है, उसमें कैसे   टैक्स सेविंग मिलती है, कंपनियां कैसे इन्वेस्ट करती हैं, इसके बारे में हम बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी के जरिए पूरी डिटेल बता रहे हैं...

 

 

 

 

स्‍मार्ट इनवेस्‍टमेंट 
म्यूचुअल फंड में सेवि‍ंग की बात आते ही सबसे पहले बात होती है रि‍स्‍क की। अगर आप अपना पूरा पैसा कि‍सी एक कंपनी में इनवेस्‍ट कर दें और कि‍सी वजह से वह कंपनी डूब जाए तो आपका सारा पैसा भी डूब जाएगा। ऐसे में म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा यही है कि‍ यहां आपके पैसे को अलग-अलग कंपनि‍यों में लगाया जाता है। जैसे कि‍ अलग-अलग स्‍टॉक और बॉन्‍ड्स में आपके पैसे को इनवेस्‍ट कि‍या जाता है। इसका फायदा यह है कि‍ अगर कि‍सी एक कंपनी में लगा पैसा डूब भी जाए तो बाकी जगह से हुआ लाभ उसे कवर कर सकता है। 

 

 

रि‍स्‍क की भी है अपनी च्‍वॉइस 
इसके बावजूद आपको लगता है कि‍ म्यूचुअल फंड में रि‍स्‍क है तो बता दें कि‍ आप यहां रि‍स्‍क को भी अपने हि‍साब से मैनेज कर सकते हैं। जैसे यहां तीन कैटेगि‍री हाई रि‍स्‍क, मीडि‍यम रि‍स्‍क और लो रि‍स्‍क। ऐसे में अगर आप म्यूचुअल फंड लेते समय हाई रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चूज करेंगे तो आपको रि‍स्‍क बहुत ज्‍यादा होगा। लेकि‍न इसमें फायदा यह है कि‍ आपको अगर फायदा हुआ तो रि‍टर्न भी ज्‍यादा मि‍लेगा। ऐसे ही अगर आप मीडि‍यम रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चूज करेंगे तो आपको मीडि‍यम लेवल का जोखि‍म उठाना पड़ेगा वहीं, आपको रि‍टर्न पर फायदा भी मीडि‍यम लेवल का ही मि‍लेगा। इसके अलावा लो लेवल रि‍स्‍क जोन में भी अगर आप मि‍नि‍मम रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चुनते हैं तो आपको रि‍टर्न भी मि‍नि‍मम ही मि‍लेगा। ऐसे में म्यूचुअल फंड में आप अपना रि‍स्‍क जोन खुद सेलेक्‍ट कर सकते हैं। 

 

 

लि‍क्‍वि‍डि‍टी का ऑप्‍शन 
जब आप एक म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपके पास दो विकल्प होतेे हैं। इसमें एक ऑप्‍शन है कि‍ आप रेगुलर फंड में निवेश करें और दूसरा यह है कि‍ आप टैक्‍स सेवर फंड में नि‍वेश करें।  

 

इन दोनों में अंतर यह है कि रेगुलर फंड में नि‍वेश शुरू करने के कुछ महीने बाद ही आप रकम नि‍कलना शुरू कर सकते हैं। जबकि टैक्‍स सेवि‍ंग फंड में 3 साल का लॉकइन पीरि‍यड होता है। उस लॉकइन पीरि‍यड से पहले आप इस फंड में से नहीं नि‍काल सकते हैं।  

 

 

टैक्‍स सेविंग फंड 
टैक्‍स सेविंग म्यूचुअल फंड इनकम टैक्‍स अधिनियम की धारा 80 सी के तहत निवेश पर आयकर में छूट का फायदा भी देता है। इसका मतलब है कि ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश पर आप आयकर की छूट ले सकते हैं। 

 

 

अपनी पसंद का चुनें प्‍लान 
सभी म्यूचुअल फंड निवेशक जो हाई, मीडि‍यम या फि‍र लो रि‍स्‍क वाले फंड चूज करते हैं। वे पैसे के रि‍टर्न को देखते हुए ही इन्‍हें चुनते हैं। इसका मतलब है कि वे या तो एक ऐसा फंड चुन सकते हैं जहां कम समय में अच्‍छा रि‍टर्न मि‍ल जाए। वहीं, दूसरी ओर वे लंबी अवधि को चुनते हैं जहां लंबे समय में प्‍लानि‍ंग के साथ पैसे को इनवेस्‍ट कि‍या जा सके। 

 

आगे पढ़ें : नहीं है बड़ी राशि तो ऐसे करें इनवेस्‍ट 

 

इंस्‍टॉलमेंट और एकमुश्‍त इनवेस्‍टमेंट का भी है ऑप्‍शन 

मान लीजि‍ए आप यंग हैं और अभी आपने नौकरी शुरू ही की है। ऐसे में आपके पास म्यूचुअल फंड में निवेश करने की बड़ी राशि नहीं है। इस दौरान आप सि‍स्‍टमैटि‍क इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) का ऑप्‍शन चुन सकते हैं। एसआईपी का मतलब और कुछ नहीं बस इतना है कि‍ आप ईएमआई की तरह म्यूचुअल फंड में इनवेस्‍ट कर रहे हैं। एसआईपी आपको बि‍ना फाइनेंशि‍यल दबाव के म्यूचुअल फंड में इनवेस्‍ट करने का ऑप्‍शन देता है। वहीं, अगर आपके पास बड़ी रकम है तो आप उसे एकमुश्‍त म्यूचुअल फंड में इनवेस्‍ट कर सकते हैं। 

म्यूचुअल फंड के लि‍ए बड़ी रकम की जरूरत नहीं 
अगर आप चाहें तो म्यूचुअल फंड में सि‍र्फ 500 रुपए से इनवेस्‍टमेंट शुरू कर सकते हैं। एसआईपी के साथ आप सि‍र्फ 500 रुपए में महीने से इनवेस्‍टमेंट शुरू कर सकते हैं। 

 

 

होती है पूरी देखरेख 
म्यूचुअल फंड केे नि‍यमन (रेगुलेशन) का काम सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) करती है। ऐसे में सेबी की ओर से बनाई गई गाइड लाइन का म्यूचुअल फंड कंपनियां को पालन करना होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निवेशकों को अनुचित और गलत तरीके से मि‍स गाइड नहीं कि‍या जाए। ऐसे में यह गाइड लाइन निवेशक और म्यूचुअल फंड प्रदाता दोनों के पक्ष में काम करती हैं।

 

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