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रिटेल इन्वेस्टर्स की भागीदारी से Q1 में Mutual fund में हुआ 1.4 लाख करोड़ का निवेश, 43% रही ग्रोथ

अप्रैल-जून क्वार्टर के दौरान इन्वेस्टर्स ने Mutual fund स्कीम्स में 1.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया।

Mutual fund inflow rises 43% to Rs 1.4 lakh cr in Q1: Amfi

 

नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जून क्वार्टर के दौरान इन्वेस्टर्स ने Mutual fund  (एमएफ) स्कीम्स में 1.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया, जो बीते साल समान तिमाही की तुलना में 43 फीसदी ज्यादा है। एमएफ इन्वेस्टमेंट में मजबूती की मुख्य वजह रिटेल इन्वेस्टर्स की भागीदारी रही।

 

 

42 कंपनियों का एसेट बेस 23.40 लाख करोड़ रु

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (Amfi) द्वारा जारी डाटा के मुताबिक, इन्वेस्टमेंट बढ़ने से जून के अंत तक एमएफ इंडस्ट्री की 42 कंपनियों का एसेट बेस बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि जून, 2017 तक यह आंकड़ा 20.40 लाख करोड़ रुपए था।

 

 

‘म्युचुअल फंड सही है’ का मिला फायदाः एम्फी

एम्फी के चीफ एग्जीक्यूटिव एन एस वेंकटेश ने कहा कि सेबी के गाइडैंस में एम्फी द्वारा चलाए जा रहे इन्वेस्टर जागरूकता अभियान ‘म्युचुअल फंड सही है’ के चलते बड़ी संख्या में संभावित इन्वेस्टर्स इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जो अब एमएफ को प्रिफर्ड इन्वेस्टमेंट ऑप्शन मान रहे हैं।   

 

 

इन वजहों से बढ़ा निवेश

उन्होंने कहा, ‘मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद एमएफ में इनफ्लो में बढ़ोत्तरी जारी रहेगी। रिटेल इन्वेस्टर्स द्वारा सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से इनफ्लो और 30 (छोटे) शहरों से निवेश में अच्छी ग्रोथ बनी हुई है।’

 

 

जून क्वार्टर में हुआ कुल 1.33 लाख करोड़ रु का निवेश

डाटा के मुताबिक, वित्त वर्ष के पहले क्वार्टर के दौरान इन्वेस्टर्स ने एमएफ स्कीम्स में कुल 1,33,903 करोड़ रुपए का निवेश किया, जबकि 2017-18 में अप्रैल-जून क्वार्टर के दौरान यह आंकड़ा 93,400 करोड़ रुपए रहा था। इनफ्लो में मौजूदा बढ़ोत्तरी की मुख्य वजह लिक्विड फंड और इक्विटी स्कीम्स से मिला कांट्रीब्यूशन रहा।

 

 

शॉर्ट टर्म निवेश 1.22 लाख करोड़ के पार

लिक्विड फंड या मनी मार्केट कैटेगरी की बात करें तो ट्रेजरी बिल्स जैसे कैश एसेट्स में निवेश, अल्पावधि वाले डिपॉजिट सर्टिफिकेट और कमर्शियल पेपर में 1.22 लाख करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। वहीं इक्विटी स्कीम्स में 33,000 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।

हालांकि इंकम फंड्स में 38,000 करोड़ रुपए का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा गोल्ड ईटीएफ में 146 करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो रहा।

 

 

इन्वेस्टर्स ने इक्विटीज में दिखाया भरोसा

मॉर्निंगस्टार के मैनेजर (रिसर्च) कौस्तुब बेलापुरकर ने कहा कि इक्विटी फंड्स में इनफ्लो साल भर मजबूत बना रहा। 2018 की शुरुआत से मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद इन्वेस्टर्स लॉन्ग टर्म के नजरिए से इक्विटीज में निवेश कर रहे हैं।

 

 

एसआईपी की मजबूत भागीदारी

उन्होंने कहा, ‘एसआईपी मेंबर्स के मंथली 7,300 करोड़ रुपए के निवेश के साथ ही एसआईपी मजबूत कॉन्ट्रीब्यूटर बने हुए हैं। हमें इस ट्रेंड के आगे भी जारी रहने का अनुमान है, क्योंकि इन्वेस्टर्स इक्विटीज में लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन की संभावनाएं देख रहे हैं।’

एसआईपी इन्वेस्टमेंट का एक ऐसा माध्यम है, जहां नियमित तौर पर छोटा-छोटा निवेश किया जाता है। यह निवेश आम तौर पर वीकली, मंथली या क्वार्टरली होता है।

 

 

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