म्यूचुअल फंड /सात तरीके जिसमें म्यूचुअल फंड में निवेश करना फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से बेहतर माना जाता है

एक समय में FDs 10% से अधिक का भुगतान करती थी

Moneybhaskar.com

Oct 07,2019 04:01:26 PM IST

नई दिल्ली। हमारे माता-पिता की ही तरह हममें से अधिकांश लोग आंशिक रूप से बैंक जमा, FDs और बीमा पॉलिसियों के सहारे ही बड़े हुए हैं। अधिक रोमांचक प्रकारों के लिए, यहां अचल संपत्ति / real estate थी। लेकिन मूल तर्क यह था कि बैंक FDs सुरक्षित होती हैं क्योंकि पीएसयू / PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) बैंक बंद नहीं होंगे। वे आकर्षक भी थे क्योंकि एक समय में FDs 10% से अधिक का भुगतान करती थी। ऐसा तब था जब भारतीय ब्याज दरें अपेक्षाकृत अधिक थीं और यह एक बैंक की सुरक्षा का लालच था जिसने लोगों को बैंक FDs में अपना पैसा लॉक करने के लिए वास्तव में आकर्षित किया था। संक्षेप में, बैंक FDs, ऋण निवेश का पर्याय बन गई थी।

डेब्ट फंड एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरे हैं

पिछले 20 वर्षों में बहुत कुछ बदल गया है। दरों में कटौती की गई है, डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) एक व्यवहार्य विकल्प / viable alternative के रूप में उभरे हैं, FDs से टैक्स का खेल खत्म हो रहा है और वे लिमिटेड फ्लेक्सिब्लिटी प्रदान करते हैं। आइए उन 8 प्रमुख कारणों पर गौर करें जो बताते हैं कि म्यूच्युल फंड (Mutual Funds) बैंक FDs के लिए एक व्यवहार्य विकल्प / viable alternative के रूप में क्यों उभरा है। बेशक, हम इस तुलना को सार्थक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बैंक FDs की तुलना डेब्ट फंड्स / Debt Funds (ऋण निधियों) से करेंगे। कभी-कभी, हम बढ़ते टैक्स को कम करने के लिए इक्विटी फंड / equity funds का भी उपयोग करेंगे।


बैंक FDs की तुलना में म्युच्युल फंड / Mutual Funds बेहतर विकल्प क्यों देते हैं?

1. सीपीआई/ CPI मुद्रास्फीति आज एक महत्वपूर्ण कारक है। सामान्य मुद्रास्फीति 4-5% के दायरे में रही है और यहाँ तक कि आरबीआई / RBI को भी इसके उसी स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। बैंकों द्वारा FDs पर 6-6.5% ब्याज का भुगतान किया जाता है, FDs में निवेश करने वाले अधिकांश निवेशकों को वास्तविक रिटर्न्स के सम्बन्ध में बहुत कम सेफ्टी मार्जिन के साथ छोड़ दिया जाता है। ये चलन केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है।


2. मार्किट में दरें कम होने पर FDs का फायदा नहीं मिलता है। यह एक अनोखा फायदा है कि बैंक FDs पर डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) का आनंद लिया जाता है। डेब्ट फंड/ Debt Funds (ऋण निधि), सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेब्ट (government bonds and corporate debt) (निगमित ऋण) को अपने पोर्टफोलियो में रखता है। जब दरों में गिरावट आती है, तो इन ऋण उपकरणों की कीमत, दरों और बॉन्ड / Bond की कीमतों के बीच के विपरीत संबंध के कारण बढ़ जाती है।

3. चल निधि / liquidity basis के आधार पर, डेब्ट फंड / Debit Funds (ऋण निधि) निश्चित रूप से अधिक चल होते हैं। आप रिडेम्पशन रिक्वेस्ट / redemption request (ऋणमुक्ति अनुरोध) दे सकते हैं और T + 1 दिन के हिसाब से फंड / Fund वापस अपने खाते में पा सकते हैं। इस हद तक, वे लगभग नकदी के ही समान होते हैं। बेशक, एग्जिट लोड / Exit Loads को लेकर सतर्क रहें। दूसरी तरफ, बैंक FDs वे चल निधि / liquidity basis नहीं होती हैं, जो आपको FDs तोड़ने या FDs पर ऋण लेने पर प्राप्त होती है, जोकि आपके लिए काउंटर पर उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन यह अभी भी समय की खपत करने वाली औपचारिकता है और FDs ऋण /Loans की लागत इससे जुड़ी होती है। डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) निश्चित रूप से चल निधि में ही स्कोर कर पाते हैं।


4. पारदर्शिता एक और बड़ा लाभ है जो डेब्ट फंड्स / Debt Funds (ऋण निधियों) की FDs के सम्बन्ध में रखी जाती है। एक FDs निवेशक के रूप में आप वास्तव में नहीं जानते कि आपके निवेश के साथ क्या किया जा रहा है। आपकी FDs धनराशि अन्य जमा राशियों के साथ संचित होती है और retail तथा commercial loans के रूप में कर्ज़ दी जाती है। जब आप डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) में निवेश करते हैं, तो पोर्टफोलियो डिस्क्लोजर, NAV की गणना, व्यय अनुपात / expense ratio आदि में पूरी पारदर्शिता रखी जाती है। बैंक FDs में ये काफी अपारदर्शी होते हैं।

5. फिर हम फ्लेक्सिबिलिटी/flexibility की बात करते हैं कि फंड मैनेजर ने बैंक की तुलना की है। एक डेब्ट फंड / Debt Fund (ऋण निधि) के फंड मैनेजर के एसेट सिलेक्शन और एसेट एलोकेशन में कहीं अधिक फ्लेक्सिबिलिटी होता है। एक बैंक FDs में इनमें से कुछ भी नहीं होता है।

6. यहां तक कि टैक्स की दृष्टि से देखें तो डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) बैंक FDs की तुलना में कहीं अधिक फलदायी साबित होते हैं। उदाहरण के लिए, बैंक FDs पर ब्याज आपके टैक्स की अधिकतम दर पर लगाया जाता है। यदि आपकी FDs में 7% की यील्ड है, तो आपकी वास्तविक टैक्स-यील्ड केवल 4.9% (30% टैक्स ब्रैकेट पर विचार) होती है, जोकि महंगाई-लागत को कवर करती है। पूंजीगत लाभ / capital gains पर टैक्स लगाने से डेब्ट फंड / Debt Funds (ऋण निधि) में भी फायदा होता है। 3 वर्षों से अधिक के लिए आयोजित डेब्ट फंड्स / Debt Funds (ऋण निधियों) को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स / long term capital gains के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और सूचीकरण / इंडेक्सेशन के साथ 20% की दर से टैक्स लगाया जाता है। यह काफी हद तक डेब्ट फंड्स / Debt Funds (ऋण निधियों) पर आपकी बाद की टैक्स-यील्ड में काफी सुधार लाता है।


7. अंत में, हम इक्विटी ओरिएंटेड ELSS/ ELSS उन्मुख इक्विटी और लॉन्ग टर्म बैंक FDs की तुलना करते हैं, क्योंकि दोनों आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत छूट की पात्र हैं। यहाँ फिर से म्यूच्युल फंड / Mutual Funds के अपने अलग फायदे हैं। FDs के 5 वर्ष की तुलना में लॉक इन पीरियड सिर्फ 3 वर्ष ही है। दूसरी बात, ELSS धन संचय/ wealth accumulation का लाभ दे सकता है, जोकि बैंक FDs में नहीं होता है।


8. डेब्ट फंड्स / Debt Funds (ऋण निधियां) तेजी से बैंक FDs के एक व्यवहार्य विकल्प / viable alternative के रूप में उभर रहे हैं। वास्तव में, बचत खातों और बैंक FDs पर डेब्ट फंड्स/ Debt Funds (ऋण निधियों) से अधिक चल निधियों / liquid funds को पसंद करने वाले निवेशकों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। जैसा कि निवेशक बैंक डिपॉजिट पर डेब्ट फंड्स/ Debt Funds (ऋण निधियों) की खूबियों को समझते और उसकी सराहना करते हैं, तो शिफ्ट और भी स्पष्ट हो जाती है। हालांकि, बैंक FD और म्यूच्युल फंड / Mutual Funds के बीच निवेश करने का निर्णय हमेशा निवेशक की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा।


लेखक : संदीप भारद्वाज, मुख्य सेल्स ऑफिसर, ऐंजल ब्रोकिंग लिमिटेड

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