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बिना गलती आयकर रिटर्न भरने के टिप्‍स, फॉलो करें नहीं उठाना पड़ेगा नुकसान

टैक्‍स एडवाइजर फर्म क्लियरटैक्‍स के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्‍ता ने दी है जानकारी...

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नई दिल्‍ली. सरकार ने वेतनभोगी यानी सैलरीड क्‍लास करदाताओं को राहत देते हुए इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की तारीख को आगे बढ़ा दिया है। इसके तहत अब ये लोग असेसमेंट ईयर 2018-19 के इनकम टैक्स रिटर्न 31 अगस्‍त तक दाखिल कर सकेंगे। लेकिन इस कैटेगरी को छोड़ अन्‍य सभी कैटेगरी के करदाताओं के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2018 ही है। ऐसे में आपसे रिटर्न फाइल करने में कोई गलती न हो, इसका ध्‍यान रखना बेहद जरूरी है। गलत सूचना देने पर दंड के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। इस बारे में इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) बेंगलुरू ने टैक्सपेयर्स के लिए "कॉशनरी एडवाइजरी" (सतर्कता बरतने के लिए परामर्श) भी जारी किया है।

 

आयकर रिटर्न भरने में आपसे गलती न हो, इसके लिए टैक्‍स एडवाइजर फर्म क्लियरटैक्‍स के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्‍ता ने कुछ टिप्‍स बताए हैं। इन टिप्‍स को फॉलो कर आप रिटर्न फाइलिंग में गलतियों और उनके चलते होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। आइए आपको बताते हैं क्‍या हैं वे टिप्‍स- 

 

न करें आखिरी तारीख का इंतजार

2.5 लाख रुपए से ज्‍यादा की सालाना आय वाले हर शख्‍स के लिए आयकर रिटर्न फाइल करना जरूरी है। रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर धारा 234-एफ के तहत 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है। इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना वक्‍त पर रिटर्न दाखिल करें। 

 

बैंक अकांउट का सही ब्‍यौरा देना

यह जरूरी है कि आप IFSC कोड, बैंक का नाम, बैंक खाता संख्या इत्यादि सटीक बैंक खाता डिटेल इनकम टैक्‍स रिटर्न में दें, ताकि आप तुरंत रिफंड हासिल कर सकें। 

 

फॉर्म 16 का इस्तेमाल

आईटीआर1 फॉर्म भरने के लिए सैलरी के ब्रेकअप की जरूरत होती है। ऐसी और इस तरह की सभी जानकारी फॉर्म 16 में मौजूद रहती हैं, इसलिए आपको काफी हद तक फॉर्म 16 की जरूरत होती है। टैक्स फाइलिंग प्‍लेटफॉर्म्‍स पर फॉर्म 16 अपलोड करने का विकल्‍प मौजूद रहता है। फॉर्म 16 सुनिश्चित करता है कि आपके रिटर्न में कम से कम समय लगे और उसमें कम से कम गलतियां हों। इसके अलावा आपको यह चिंता भी नहीं रहती कि इंप्‍लॉयर के टैन और अन्य जानकारी का सही उल्लेख किया गया है या नहीं क्योंकि वह खुद-ब-खुद भरे जाते हैं। 

 

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फॉर्म 26एएस की उपलब्धता

फॉर्म 26 एएस भी रिटर्न फाइलिंग में मदद कर सकता है। इस फॉर्म में आपके आय स्रोतों पर कटौती किए गए टैक्स का ब्‍यौरा शामिल होता है, जिसमें वेतन, ब्याज, पेशेवर रसीद इत्यादि शामिल है। एक तरह से आप फॉर्म 16 में दिखाई दे रहे टीडीएस को 26एएस के रूप में दिखा सकते हैं। इसके अलावा यह फॉर्म आपको अन्य आय का विवरण प्राप्त करने में मदद करता है, जिसे आपको इनकम टैक्‍स रिटर्न में दिखाना चाहिए। इन पर काटे गए टीडीएस के क्रेडिट का दावा भी होना चाहिए। हालांकि, बचत खाते से ब्याज पर कोई टीडीएस कटौती नहीं होती है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आप अपनी आय में इस आय का खुलासा करें, भले ही कोई कर देय न हो। बता दें कि सेविंग्‍स अकाउंट से 10,000 रुपए तक की ब्‍याज से हुई आय कर मुक्‍त है। 

 

रिटर्न पाने के लिए दावा हो उचित

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान, हो सकता है कि आपने ऐसे इंस्‍ट्रूमेंट्स में इन्‍वेस्‍ट किया हो, जो आपको धारा 80सी के तहत टैक्‍स से छूट दिलाते हों। ऐसे में आपने जिस सीमा तक छूट का दावा किया है, उसे साबित करने क लिए आपके पास इन्‍वेस्‍टमेंट के पुख्‍ता सबूत होने चाहिए। यह भी ध्यान दें कि यदि इंप्‍लॉयर ने फॉर्म 16 में आपको दिए जाने वाले लीव ट्रैवल अलाउंस और मेडिकल अलाउंस से संबंधित छूट नहीं दी है तो आप रिटर्न दाखिल करते वक्त उसका दावा नहीं कर सकते हैं। 
 
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न छिपाएं कोई आय

यह सुनिश्चित करें कि फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न में आपने आय के सभी स्रोतों का खुलासा किया है। वहीं अगर आप किसी भी बिजनेस या पेशे से आय प्राप्त करने वाले वेतनभोगी व्यक्ति हैं, तो रिटर्न फाइलिंग के लिए उचित फॉर्म का इस्‍तेमाल करें, जैसे- आईटीआर 3 या आईटीआर 4 (यदि आप अनुमानित कर का विकल्प चुनते हैं)। यदि आप आईटीआर1 चुनते हैं और बिजनेस या पेशे से अपनी आय का खुलासा नहीं करते हैं, तो यह कानून का उल्लंघन होगा और इस पर आपको जुर्माना चुकाना पड़ सकता है।

 

यह भी ध्यान रखना होगा कि आपको हर आय का खुलासा करना होगा, भले ही उस पर आपको छूट मिल रही हो। कैपिटल गेन्स में भी कोई भी व्यक्ति रिटर्न फाइल करते वक्त ही इसका खुलासा कर सकता है और इस पर क्लेम कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि आप संपत्ति बेच रहे हैं और उस लाभ को पूरी तरह नई संपत्ति पर खर्च कर रहे हैं तो इस लेन-देन का पूरा ब्‍यौरा रिटर्न में दाखिल करें। यह आपको प्रॉपर्टी की बिक्री पर मिलने वाली राशि में से काटे गए टीडीएस का रिफंड हासिल करने में भी मदद करेगा।

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