बिज़नेस न्यूज़ » Personal Finance » ITR Filingसैलरी के अलावा दूसरी इनकम छिपाना पड़ेगा भारी, 200% तक लग सकती है पेनल्‍टी, 31 जुलाई है ITR फाइलिंग की लास्‍ट डेट

सैलरी के अलावा दूसरी इनकम छिपाना पड़ेगा भारी, 200% तक लग सकती है पेनल्‍टी, 31 जुलाई है ITR फाइलिंग की लास्‍ट डेट

टैक्‍स फॉर्म भरते वक्‍त आपको हर तरह की इनकम को दर्शाना जरूरी होता है, फिर चाहे वह टैक्‍सेबल हो या नहीं...

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नई दिल्‍ली. अक्‍सर लोग इनकम टैक्‍स रिटर्न की फाइलिंग करते वक्‍त सैलरी तो डिक्‍लेयर करते हैं लेकिन सैलरी के अलावा अन्‍य जरियों जैसे सेविंग्‍स, घर किराए पर देने आदि हो रही इनकम को या तो छिपा लेते हैं या फिर अनजाने में डिक्‍लेयर नहीं करते हैं। वहीं कुछ लोग टैक्‍सेबल चीजों को दर्शाते हैं, जबकि इनकम टैक्‍स से छूट वाली सेविंग्‍स या इनकम को डिक्‍लेयर नहीं करते हैं, जो कि सही नहीं है। टैक्‍स फॉर्म भरते वक्‍त आपको हर तरह की इनकम को दर्शाना जरूरी होता है, फिर चाहे वह टैक्‍सेबल हो या नहीं।

 

अन्‍य इनकम को छिपाए जाने का पता लगने पर इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट इनकम कम दिखाने और टैक्‍स चोरी करने के मामले में एक्‍शन ले सकता है। आप से 200 फीसदी तक पेनल्‍टी और बकाया टैक्‍स पर 1 फीसदी इंट्रेस्‍ट वसूला जा सकता है। वहीं अगर टैक्‍स चोरी की रकम ज्‍यादा निकली तो जेल भी जाना पड़ सकता है। इसके अलावा भले ही आप टैक्‍स नेट (2.5 लाख रु. सालाना आय से ऊपर) में न आते हों, तब भी आपको इनकम टैक्‍स फाइलिंग करनी चाहिए। आइए आपको बताते हैं कि टैक्‍स फॉर्म भरते वक्‍त आपको किन चीजों को दर्शाना नजरअंदाज नहीं करना चाहिए-

 

बैंक और पोस्‍ट ऑफिस से आ रहा इंट्रेस्‍ट

अगर आपने बैंक या पोस्‍ट ऑफिस में किसी भी तरह की सेविंग्‍स कर रखी है तो उसे रिटर्न भरते वक्‍त जरूर दर्शाएं। इन सेविंग्‍स में सेविंग्‍स बैंक अकाउंट, फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (एफडी), रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी), किसान विकास पत्र, एनएससी आदि आते हैं। ब्‍याज से हो रही आय टैक्‍स के दायरे में है या नहीं इसकी कैलकुलेशन बैंक या पोस्‍ट में मौजूद सभी सेविंग्‍स को मिलाकर आ रहे ब्‍याज पर होती है। अगर कुल ब्‍याज 10,000 रुपए सालाना से ज्‍यादा है तो यह इनकम टैक्‍स फ्री होती है लेकिन अगर ब्‍याज इस लिमिट के ऊपर चला जाता है तो आपको उस पर टैक्‍स देना होता है। एफडी, आरडी जैसी सेविंग्‍स पर टैक्‍स आपको तभी देना होता है, जब उनका मैच्‍योरिटी पीरियड पूरा हो रहा हो। रिटर्न फाइलिंग के दौरान इन डिटेल्‍स को बताना जरूरी होता है। फिर भले ही आपकी ब्‍याज से सालाना आय 10,000 रुपए से कम क्‍यों न हो। 
 

डिविडेंड-बॉन्‍ड से हो रही आय

किसी भी तरह के बॉन्‍ड और डिविडेंड टैक्‍स के दायरे में आते हैं। जब आप शेयर मार्केट में निवेश करते हैं तो आपने जिस कंपनी में इन्‍वेस्‍ट किया है, वह प्रॉफिट होने पर आपको उसका कुछ अंश देती है। इसे ही डिविडेंड कहते हैं। आपको इस इनकम को भी दर्शाना होता है। देश में इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 10 (34) के तहत डिविडेंड से 10 लाख रुपए तक की आय टैक्‍स फ्री है। 
 

इंश्‍योरेंस पॉलिसी

अगर आपने लाइफ या हेल्‍थ इंश्‍योरेंस करा रखा है तो इसे भी रिटर्न फाइलिंग के दौरान बताएं। इनकम टैक्‍स में आपको इंश्‍योरेंस का फायदा मिलता है। अगर आपका लाइफ इंश्‍योरेंस, सालाना प्रीमियम का 10 गुना है तो आपको सेक्‍शन 10(10डी) के तहत टैक्‍स से छूट मिलती है। 
 

स्‍टॉक मार्केट से कमाई

जब भी आप किसी चीज को बेचते हैं तो उससे हुई कमाई को कैपिटल गेन कहा जाता है। शेयर मार्केट में निवेश दो अवधि के लिए किया जाता है- शॉर्ट टर्म और लॉन्‍ग टर्म। लॉन्‍ग टर्म इन्‍वेस्‍टमेंट 5 साल या उससे ज्‍यादा अवधि के लिए होता है। ऐसे मे जब आप शॉर्ट टर्म शेयर को बेचते हैं तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्‍ग टर्म शेयर्स को बेचने को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन कहते हैं। देश में स्‍टॉक और इक्विटी फंड से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी टैक्‍स लगता है। वहीं लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स फ्री है। 
 

गोल्‍ड, प्रॉपर्टी को बेचकर हुई कमाई

अगर आपने गोल्‍ड, प्रॉपटी, डेट स्‍कीम्‍स आदि की बिक्री की है तो इसे भी टैक्‍स फॉर्म में दर्शाना जरूरी है। इन चीजों से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर नॉर्मल रेट से टैक्‍स लगता है, वहीं लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी टैक्‍स लगता है। 
 

आगे पढ़ें- बाकी की सावधानियां

 

टैक्‍स के तहत न आने वाली सेविंग्‍स बताना भी जरूरी

टैक्‍सेबल के साथ-साथ टैक्‍स से छूट वाली इनकम भी रिटर्न फाइलिंग के दौरान उजागर करनी चाहिए। इनमें पीपीएफ, पीएफ, स्‍टॉक मार्केट से लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन आदि शामिल हैं। इस इनकम को बताकर आप भविष्‍य में कभी भी इसका इस्‍तेमाल बेरोकटोक कर सकते हैं। आईटीआर-1 फॉर्म में टैक्‍स से छूट वाली इनकम दर्शाने के लिए भी सेक्‍शन है। 
 
आगे पढ़ें- बड़ी खरीदारी न छिपाएं 

न छिपाएं बड़ी खरीदारी

अगर आप कोई महंगी कार, प्रॉपर्टी आदि जैसे बड़े सौदे करते हैं या फिर कोई बड़ा अमाउंट इन्‍वेस्‍ट करते हैं तो इसकी भी जानकारी इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को दें। वजह है कि इस बात की काफी संभावना है कि आप जिन लोगों से सौदा कर रहे हैं, उनके जरिए यह जानकारी डिपार्टमेंट को मिल जाएगी। ऐसे में अगर कभी आपसे इस खरीदारी या इन्‍वेस्‍टमेंट का सोर्स पूछा जाए तो आप सवाल-जवाब से आसानी से निकल सकते हैं क्‍योंकि आपने इसे टैक्‍स रिटर्न में दिखाया हुआ है।
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