संकट /मोदी सरकार के टैक्स टारगेट से चिंता में आए टैक्स अधिकारी, कई ने मांगी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति  

  • इस साल आयकर विभाग के 24 शीर्ष स्तर के अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है

Moneybhaskar.com

Nov 15,2019 04:20:26 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की तरफ से टैक्स कलेक्श्न के टारगेट ने टैक्स अधिकारियों के सामने परेशानी खड़ी कर दी है। सुस्त अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मोदी सरकार चाहती है कि टैक्स अधिकारी डायरेक्ट टैक्स में 17 फीसदी अधिक कलेक्ट करें। सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में भारी कटौती करने के बाद भी इस टारगेट को कम नहीं किया है, ऐसे में अधिकारियों के सामने संकट है कि वे किस तरह से इस टारगेट को पूरा करेंगे। खासतौर पर तब जब सरकार ने अधिकारियों को इस बात की भी चेतावनी दी है कि वे रेवेन्यू कलेक्ट करने के लिए व्यापारियों से सख्ती से पेश न आएं।

दबाव में हैं सरकारी अधिकारी

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, कई टैक्स अधिकारियों का कहना है कि वे अवास्तविक कलेक्शन टार्गेट पूरा करने और टैक्स चोरी करने वालों से टैक्स वसूलने पर अतिउत्साही कहलाए जाने के डर के बीच अटक गए हैं। इनकम टैक्स गैजेटेड ऑफिसर्ज असोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल आयकर विभाग के 24 शीर्ष स्तर के अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है। पिछले साल 34 अधिकारियों ने वीआरएस लिया था। उनका कहना है कि 25-30 साल से काम कर रहे अनुभवी अधिकारी भी सरकार के दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं। वीआरएस के लिए एक के बाद एक आवेदन आ रहे हैं, जबकि इस समय कोई वॉलुंटरी रिटायरमेंट या फायदा पहुंचाने वाली स्कीम नहीं चल रही है।

विभाग में फैली असंतुष्टि

उत्तर भारत के एक अधिकारी ने बताया कि, प्रेशर लगातार बढ़ता जा रहा है। अपने टार्गेट पूरे करने के लिए हम दबाव में हैं, जिसकी वजह से हमें ऐसे काम भी करने पड़ रहे हैं जो हम नहीं करना चाहते। हालांकि आयकर विभाग के हजारों अधिकारियों में से कुछ ही ने नौकरी छोड़ी है, लेकिन कई अधिकारियों का कहना है कि इससे विभाग में फैली असंतुष्टि की झलक मिलती है, जिसके चलते कई तबादले भी हुए हैं और कई छोटे स्तर के कर्मचारियों ने रिजाइन भी किया है।

टार्गेट से काफी पीछे है टैक्स कलेक्शन

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए कुल टैक्स कलेक्शन का टारगेट 13.35 लाख करोड़ रुपए तय किया था, जिसमें से अब तक सरकार 50 फीसदी से भी कम सिर्फ 6 लाख करोड़ रुपए जमा कर पाई है। इस वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सिर्फ 3 फीसदी की वृद्धि हुईै है। मूडीज की भारतीय यूनिट आईसीआरए के की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नैयर के मुताबिक, सरकार के टारगेट को पूरा करने के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच टैक्स कलेक्शन में 42 फीसदी की वृद्धि होनी जरूरी है।

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