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जानिए कहां और किस इनकम पर लगता है TDS, कैसे होता है कैलकुलेट

आम बजट में वित्त मंत्री टीडीएस की दरें कम करने की घोषणा कर सकते हैं।

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नई दि‍ल्ली। आम बजट में वित्त मंत्री टीडीएस की दरें कम करने की घोषणा कर सकते हैं। हाल में आर वी ईश्वर कमेटी ने सरकार को टीडीएस की दरें तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि देश की 65फीसदी इंडिविजुअल इनकम टैक्‍स का कलेक्शन टीडीएस के जरिए होता है। ऐसे में इसको तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है। आइए, जानते हैं कि वर्तमान में विभिन्‍न आय स्रोतों पर टीडीएस की दरें कितनी हैं और होने वाली कटौती से कैसे बच सकते हैं।
 
 
सैलरी पेशा पर टीडीएस की दरें
 
सैलरी पेशा लोगों की कुल इनकम पर टीडीएस की कटौती की जाती है। इससे इंडिविजुअल को खुद से टैक्‍स भुगतान की परेशानी से बचता है।
 
टीडीएस की दरें
 
सैलरी पेशा लोगों पर टीडीएस की दरें उनके इनकम टैक्‍स स्लैब के अनुसार कैलकुलेट होती हैं। अदारहण के तौर पर मोहन की मंथली इनकम 70,000 रुपए है। यानी सालाना आय 8,40,000 हुआ। इस पर मोहन ने 1,00,000 रुपए का टैक्‍स छूट क्लेम किया। ऐसे में उसको 7,40,000 की आय पर इनकम टैक्‍स स्लैब के अनुसार टैक्‍स डिडक्शन होगा।
 
इंटरेस्ट से होने वाली आय पर टीडीएस की दरें
 
बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट और आरडी में जमा रकम से मिलने वाले इंटरेस्ट पर टीडीएस लिया जाता है। अगर, एफडी या आरडी में जमा रकम से मिलने वाला इंटरेस्ट 10,000 रुपए सालाना से अधिक होता है तो इस पर टीडीएस काटा जाता है।
 
टीडीएस की दरें
 
अगर, इंडिविजुअल द्वारा पैन नंबर प्रोवाइड कराता जाता है तो इंटरेस्ट से होने वाली आय पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाता है। अगर, पैन नंबर प्रोवाइड नहीं किया जाता है, तो टीडीएस 20 फीसदी काटा जाता है।
 
ईपीएफ विड्राल पर टीडीएस की दरें
 
अगर, आप पांच साल सर्विस पूरा होने से पहले ईपीएफ में जमा रकम विड्राल करते हैं तो इस पर टीडीएस लगता है। हालांकि, 30,000 रुपए से कम की रकम पर कोई टीडीएस नहीं देना होता है।  
 
टीडीएस की दरें
 
अगर, विड्राल करने वाले की ओर से पैन नंबर उपलब्ध कराता जाता है तो 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाता है। अगर, पैन नंबर प्रोवाइड नहीं किया जाता है तो 20 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाता है।
 
अगली स्‍लाइड में पढ़ें प्रॉपर्टी की बिक्री पर टीडीएस की दरें कैसे होती है कैलकुलेट...
तस्‍वीरों का इस्‍तेमाल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है। 
प्रॉपर्टी की बिक्री पर टीडीएस की दरें
 
अगर, प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपए से अधिक है तो इस पर टीडीएस लगता है। ईएमआई द्वारा भुगतान करने पर टीडीएस प्रत्येक किस्त पर लिया जाता है। प्रॉपर्टी खरीददार को टीडीएस कटौती का सर्टिफिकेट सेलर को देना चाहिए।
 
टीडीएस की दरें
 
अगर, खरीददार द्वारा पैन नंबर उपलब्ध कराया जाता है तो प्रॉपर्टी की सेल वैल्यू का 1 फीसदी टीडीएस देना होता है। पैन नंबर नहीं देने पर सेल वैल्यू का 20 फीसदी टीडीएस काटा जाता है।
 
प्रवासी भारतीयों के लिए टीडीएस कैलकुलेट
 
प्रवासी भारतीयों को भारत में फार्म 15 जी/एच एनआरओ (नॉन–रेजिडेंट आर्डिनरी) के लिए प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं। उनकी सभी आय पर टीडीएस कटौती की जाती है। ईश्वर कमेटी ने प्रवासी भारतीयों के लिए टीडीएस कटौती में रियायतें देने का सुझाव दिया था।
 
टीडीएस की दरें
 
प्रवासी भारतीयों को बैंक डिपॉजिट से होने वाले इंटरेस्ट पर 30 फीसदी, कॉरपोरेट डिपॉजिट पर 20 फीसदी, कैपिटल गेन पर 15 फीसदी और सिक्युरिटीज ट्रांजैक्‍शन टैक्स पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस का भुगतान करना देना होता है। वहीं, प्रॉपर्टी की बिक्री पर फ्लैट 20 फीसदी की दर से टीडीएस भुगतान करना होता है।
 
टीडीएस कटौती से कैसे बचें
टीडीएस कटौती से बचने के लिए फॉर्म 15 जी/एच जमा करें। सीनियर सिटीजन के लिए 15 एच जमा करना होता है। अगर, आपकी इनकम पर कोई टैक्‍स कैलकुलेट नहीं हुआ है तो इस फॉर्म को जमा करना जरूरी होता है।
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