काम की बात /आईटीआर भरने के बाद भी नोटिस भेज सकता है इनकम टैक्स विभाग, ये हैं 24 कारण

  • नोटिस में मांगी जा सकती है इनकम की जानकारी, गलत रिटर्न भरने पर भी हो सकती है कार्रवाई

Moneybhaskar.com

Jul 27,2019 06:14:00 PM IST

नई दिल्ली। सामान्यतः जब इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस मिलता है तो करदाता को स्वतः ही चिंता हो जाती है कि यह नोटिस क्यों आया है। आइए इस बात को समझते हैं कि इसके मुख्य कारण क्या हैं। करदाताओं को मुख्य रूप से इनकम टैक्स की विभिन्न धाराओं जैसे 139(9), 143(1), 143(2), 143(3), 245, 144, 147 और 148 आदि में नोटिस आ सकता है जिनका मुख्य कारण आय को छुपाना, गलत रिफंड मांगना, कर की गणना में गलती होना, इनकम टैक्स की रिटर्न न दाखिल करना गलत सूचना देना आदि हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि किन 25 कारणों से आपको इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है।

1. अगर आपकी आयकर रिटर्न में दिखाई गई सकल वार्षिक बिक्री उसके द्वारा जीएसटी विभाग में ऑनलाइन फाइल की गई जीएसटी रिटर्न में दिखाई गई वार्षिक विक्रय की राशि से अलग है और यदि यह अंतर ज्यादा है तो आप को आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है।

2. Income tax विभाग की website से डाउनलोड किए गए फॉर्म 26AS में मिले हुए टीडीएस को अपनी रिटर्न में क्लेम किए हुए टीडीएस से मिला लें। अगर इसमें कोई फर्क आता है तो आपको निश्चित रूप से नोटिस आ सकता है।

3. अगर फॉर्म 26 AS में कोई इनकम दिख रही है और यह आपके आयकर रिटर्न में दिखाई गई इनकम से मैच नहीं कर रही है या आपकी रिटर्न में दिखाई गई इनकम का योग 26 AS में दर्शाई गई सकल आय से कम है या आपने 26AS में दर्शाई हुई आय को बिल्कुल छोड़ दिया है और अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं लिया है तो आपको विभाग से नोटिस आ सकता है।

4. अगर आपने अपनी रिटर्न में वेतन की जो आय दिखाई है और वह आय आपके नियोक्ता द्वारा जमा की गई टीडीएस रिटर्न (फॉर्म 16) से कम है तो आयकर विभाग इसका कारण पूछने के लिए आप को नोटिस भेज देगा।

5. जो टीडीएस आपने अपनी आयकर रिटर्न में क्लेम किया है अगर 26 AS में वह टीडीएस नहीं दर्शाया गया है या आपके नियोक्ता या क्लाइंट ने अगर अपनी टीडीएस रिटर्न को रिवाइज करके आप का क्रेडिट हटा दिया है या उसमें कोई बदलाव किया गया है तो ऐसे में आपको नोटिस अवश्य आएगा।

6. अगर आपने कोई प्रॉपर्टी खरीदी है और 50 लाख से अधिक होने के मामले में अगर आपने 1% टीडीएस नहीं काटा है तो आप को नोटिस आ सकता है।

7. इसी प्रकार अगर आप वेतनभोगी व्यक्ति हैं और आप 50,000 प्रति माह से अधिक किराया देते है और करदाता ने मकान किराया भत्ता में छूट हासिल की है तो यह जांच लीजिए कि करदाता ने अपने मकान मालिक को किराए का भुगतान करते समय टीडीएस काटा या नहीं। इनकम टैक्स विभाग आपसे नोटिस भेजकर पूछ सकता है कि क्यों ना आपकी किराया मद में मिली छूट को रद्द कर दिया जाए।

8. अगर आपने गत वर्ष में कोई बड़े व्यापारिक लेन देन किए हैं तो आप अपनी इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय उन सभी लेन देन के प्रभावों को जरूर दिखाएं क्योंकि यह जानकारी आयकर विभाग के पास वार्षिक रिपोर्ट के द्वारा बैंक, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी, नियोक्ता, कार कंपनियों, ज्वैलर्स व विभिन्न देशों से सूचनाओं के आदान प्रदान के सहारे आदि से पहले ही आ चुकी है और आंकड़ों के सही मिलान नहीं होने पर इनकम टैक्स करदाता को नोटिस भेज सकता है। बड़े लेन-देन वाले मामले में विभाग आपसे धन की प्राप्ति या भुगतान के मामले में उसका स्रोत भी नोटिस के द्वारा पूछ सकता है ।

9. अगर आपने अपने व्यापार या व्यवसाय की प्रकृति (Nature of Business) को सही से नहीं दिखाया है तो ऐसे में भी आपको नोटिस आ सकता है। यदि आपको धारा 143(2) के तहत नोटिस मिला है तो समझें कि आप का केस चयन के तहत स्क्रुटनी में आ गया है.

10. गत वर्ष से पहले के 6 वर्षों में से किसी वर्ष के लिए यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कोई अघोषित आय पकड़ी है या ऐसे ही अगर आप ने गत वर्ष के पूर्व की किसी वर्ष में इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरी है और उस वर्ष आपकी कर योग्य आय थी तो भी विभाग धारा 148 के तहत आप को नोटिस भेज सकता है।

11. अगर आपने गत वर्ष में कोई पूंजीगत लाभ अर्जित किया है और गलत कैटेगरी होने की वजह से अगर आपने कम टैक्स का भुगतान किया है तो आप को नोटिस आ सकता है।

12. अगर आपने धारा-80 के तहत कोई झूठे कागजों के आधार पर या बिना किसी आधार कर कोई छूट इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम कर ली है तो ऐसे में आपको नोटिस आ सकता है।

13. अगर आपने कोई प्रॉपर्टी या कीमती वस्तु बेची है और उसका कैपिटल गेन नहीं दिखाया है तो आप को नोटिस आ सकता है।

14. यदि आपने विभिन्न छोटी-बड़ी आय जैसे बैंक अकाउंट पर ब्याज, एफडी पर ब्याज, नकद, प्राप्त वेतन या किराया या कोई अन्य ज्वेलरी या संपत्ति का विक्रय आपस में लेनदेन से कमाया गया कोई लाभ, रिश्तेदारों या मित्रों को दी गई उधारी पर ब्याज या ऐसे ही अन्य कोई इनकम प्राप्त की है तो ध्यान रखें यह सब इनकम टैक्स विभाग की नजरों में है और आपको उस पर इनकम टैक्स देना होगा और इन मदों को अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में शामिल करना चाहिए अन्यथा आप को नोटिस आ सकता है।

15. अगर आपने लॉटरी आदि पर कोई पैसा कमाया है तो उस पर कर की गणना सामान्य रूप से न करते हुए विनिर्दिष्ट तरीके से करनी होगी और यदि आपने ऐसा नहीं किया है विभाग आपको नोटिस भेज सकता है।

16. यदि आपने अपने कोई एफडी शेयर म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट या प्रॉपर्टी अपने नाबालिग पुत्र पत्नी या पुत्रवधू को बिना उचित प्रतिफल के ट्रांसफर कर दी है तो ऐसे स्रोतों पर होने वाली आय आपकी इनकम टैक्स रिटर्न में दर्शाई जानी चाहिए। ऐसा न होने पर विभाग आप को नोटिस भेज सकता है। अगर आप विवाहित महिला या नाबालिग और आपने अपनी इनकम उस स्रोत से कमाई है आपके पति, ससुर या पिता से प्राप्त हुआ है तो आपके आयकर की धारा 64 का पालन करना होगा और इन आयों को संबंधित व्यक्ति की आय में भी जोड़ कर दिखाया जाना अन्यथा उस संबंध व्यक्ति को और आपको दोनों को ही नोटिस आ सकता है।

17. अगर आपने अपनी इनकम टैक्स फॉर्म में आय गलत स्रोत में दिखाई है तब भी आपको नोटिस आ सकता है। जैसे पेशेगत आय को आप कमीशन या ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) की आय दिखाएंगे तो आयकर विभाग का सॉफ्टवेयर यह चालाकी पकड़ लेगा और आपको नोटिस आ सकता है। इसी तरह कमीशन की इनकम को अगर आप प्रोफेशनल में दिखाएंगे तब भी नोटिस आ सकता है। यदि यह इनकम के एक स्रोत के अंदर ही अलग-अलग कैटेगरी की आय हैं। इसी तरह डाटा प्रोसेसिंग की इनकम को अब ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) इनकम में दिखाने पर नोटिस आएगा।

18. अगर आप का रिफंड बनता है और आपके द्वारा दिया गया बैंक अकाउंट नंबर गलत है या आईएफएससी कोड आपने ठीक नहीं डाला है तो ऐसे में आपको नोटिस आ सकता है।

19. अगर आप कोई पेशेगत कार्य करते हैं और आप की अपनी सकल प्राप्तियां या रेवेन्यू 50 लाख से अधिक होने के बावजूद करदाता ने धारा 44 के अंतर्गत रिटर्न भरी है जिसमें अनुमानित आय भरी जाती है तो आपको नोटिस आ सकता है क्योंकि 50 लाख से ऊपर के प्रोफेशनल प्राप्तिओं वाली करदाता धारा 44 के तहत रिटर्न नहीं भर सकते। ठीक इसी तरह, यदि करदाता व्यापार करता है और उसकी सकल बिक्री 2 करोड़ से अधिक है और इस सबके बावजूद भी आप टैक्स ऑडिट न करवाकर धारा 44 में रिटर्न भर देते हैं तो आपको नोटिस आ सकता है।

20. अगर आप रिटर्न फॉर्म की विभिन्न सूचनाएं देने में कोई गलती करते हैं तो आपकी रिटर्न डिफेक्टिव हो जाती है तो आपको सेक्शन 139(9) तहत नोटिस आता है जिसका 15 दिनों के अंदर जवाब देना अनिवार्य है अन्यथा आपकी रिटर्न रद्द भी की जा सकती है

21. अगर आपकी कर योग्य आय है और आपने रिटर्न फाइल नहीं की है या फाइल करने में देरी कर दी है तो आपको विभाग से नोटिस आ सकता है। जब तक आप रिटर्न फाइल नहीं कर देते तब तक आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस या मेल आ सकते हैं।

22. अगर कोई व्यापारी ITR-4 में presumptive इनकम सकल बिक्री न दिखा कर केवल अंतिम आय पर टैक्स देकर रिटर्न फाइल करना चाहता है तो ऐसे मामलों में इनकम टैक्स विभाग आप की पड़ताल कर सकता है और आप को नोटिस भेज सकता है।

23. आयकर कानून आय के पांचवें और अंतिम स्रोत अर्थात "अन्य स्रोतों से आय" के मामले में आयकर रिटर्न फॉर्म में एक नया परिवर्तन कर दिया गया है जिसके तहत आपको इस स्रोत के अन्तर्गत इस श्रेणी के अंदर वर्गीकृत करते हुए उप श्रेणी भी बतानी होगी। अगर आप बिना सही उप श्रेणी चुने अपनी अन्य आय को सामान्य आय दिखा देंगे तो आयकर विभाग आपसे इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए आप को नोटिस भेज सकता है।

24. अगर आपका पिछले सालों का टैक्स बकाया है और इस वर्ष में रिफंड क्लेम किया है तो इनकम टैक्स विभाग आपके रिफंड से पिछले वर्षों के टैक्स को एडजस्ट करते हुए आपको एक सूचना का नोटिस भेज सकता है।

- मनीष कुमार गुप्ता, सीए एवं टैक्स एक्सपर्ट से बातचीत के आधार पर

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