इनकम टैक्स /पैन और आधार इंटरचेंजियबिलिटी आपके टैक्स फाइलिंग को कर सकता है प्रभावित

  • आयकर विभाग ने पैन का जिक्र और इस्तेमाल करना कई कार्यों के लिए अनिवार्य किया है

Moneybhaskar.com

Aug 10,2019 05:10:04 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय बजट-2019 में वित्तमंत्री ने घोषणा की थी कि पैन और आधार की विनिमय शीलता 1 सितंबर, 2019 से लागू होगी। आम लोगों के लिए टैक्स कम्प्लाइंस को आसान बनाने के उद्देश्य से यह सुविधा दी गई है कि जिन व्यक्तियों के पास पैन नहीं है, लेकिन आधार संख्या हैं तो वे अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए पैन के बजाय आधार संख्या का इस्तेमाल कर सकते हैं। केंद्रीय बजट में यह भी प्रस्ताव था कि जो लोग आधार नंबर का इस्तेमाल कर टैक्स रिटर्न फाइल करेंगे, उनके लिए पैन जारी किया जाएगा। इसके अलावा, यह भी कहा गया था कि जिसके पास आधार नंबर है, वह रिटर्न दाखिल करने में जहां भी पैन कार्ड का उल्लेख करने की आवश्यकता होती है, वहां आधार नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आयकर विभाग ने पैन का जिक्र और इस्तेमाल करना कई कार्यों के लिए अनिवार्य किया है

इस समय आम करदाता को निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए पैन का जिक्र और इस्तेमाल करना आवश्यक हैः आयकर वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के लिए, आयकर रिटर्न दाखिल करने और हाई-वैल्यू लेन-देन करने से पहले और कई अन्य कार्यों के लिए। आयकर विभाग ने पैन का जिक्र और इस्तेमाल करना कई कार्यों के लिए अनिवार्य किया है, जैसे- बैंक खातों में कैश जमा करने से पहले, डीमैट अकाउंट खोलने के लिए, सिक्योरिटी मार्केट में लेन-देन, अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त और कई अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए। आधार के साथ पैन की विनिमय शीलता की वजह से पैन के इस्तेमाल में कमी आ सकती है। हालांकि, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि पैन अप्रचलित नहीं होगा और यह विनिमय शीलता आधार को पैन से जोड़ने की सुविधा देने के लिए है।

आधार के माध्यम से करदाताओं द्वारा किए गए लेन-देन का ब्योरा भी आयकर विभाग के पास उपलब्ध होगा

इसी तरह आयकर विभाग ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने और उस पर जोर देने के लिए उठाए गए कदम, जैसे कि पहले से भरे हुए आयकर रिटर्न उपलब्ध कराना, बैंकों, स्टॉक एक्सचेंज, म्युचुअल फंड्स आदि से जानकारी जुटाने आदि सेवाएं पैन की आधार के साथ विनिमय शीलता के जरिये दी जाएंगी। इसके बाद आधार के माध्यम से करदाताओं द्वारा किए गए लेन-देन का ब्योरा भी आयकर विभाग के पास उपलब्ध होगा। टैक्स फाइलिंग के अलावा टैक्स का भुगतान करने और कुछ अन्य टैक्स कम्प्लाइंस जैसे आयकर नोटिस, असेसमेंट पर टैक्स अधिकारियों के साथ पत्राचार, आदि के मामले में भी पैन की आवश्यकता होती है। यह देखा जाना चाहिए कि आयकर विभाग का सिस्टम और कार्य कैसे बदले जाते हैं ताकि पैन के बदले आधार के इस्तेमाल कर व्यवस्था को सुविधाजनक बनाया जा सके।

भले ही वित्त मंत्री ने आधार को एक यूनिवर्सल आईडेंटिफायर (सार्वभौमिक पहचानकर्ता) बनाने की नींव रखी है, लेकिन सबको यह भी जानना होगा कि आधार का उपयोग विभिन्न वित्तीय और बैंकिंग लेन-देन के लिए अनिवार्य नहीं है। आधार डेटा सुरक्षित है। आधार डेटा और प्रमाणीकरण का स्टोरेज व्यक्ति की सहमति के आधार पर प्रतिबंधित है। आयकर रिटर्न में फाइलिंग उद्देश्य के लिए डेटा पहले से भरा जाने लगा है और आधार के साथ पैन की विनिमयशीलता को देखते हुए वित्तीय और बैंकिंग सिस्टम में बदलाव नहीं किए जाएंगे। ऐसे में पैन की प्रासंगिकता बरकरार रहेगी। इसके साथ ही पैन को केवल व्यक्तियों के मामले में आधार के साथ बदला जा सकता है। कॉरपोरेट्स, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और अन्य गैर-व्यक्तिगत फाइलर्स जैसे अन्य करदाताओं को पैन का उपयोग करना ही होगा।


लेखक : अर्चित गुप्ता, संस्थापक और सीईओ, क्लीयरटैक्स

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