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'0' को मि‍टा देंगे, इस मुल्‍क ने गरीबी हटाने का गजब फॉर्मूला खोजा

वैसे तो हमारे देश में 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने से पहले तक 1000 रुपए, सबसे बड़ा नोट था।

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नई दिल्‍ली.. अकसर गरीबी हटाने की बात कही जाती रही है। इसके लिए दुनियाभर के देशों में रोजगार देने से लेकर जनहित की योजनाओं को लागू भी किया गया। इस संबंध में कोशिशें जारी भी हैं। ऐसी ही एक कोशिश लंबे समय से गरीबी और भूखमरी की मार झेल रहा वेनेजुएला भी कर रहा है। इसी कोशिश में वेनेजुएला की सरकार ने अपनी मुद्रा से शून्य मिटाने का एलान किया है। वो भी 1 नहीं बल्कि कुल 3 शून्‍य हटाने की तैयारी चल रही है। आइए जानते हैं कि आखिर क्‍यों यह फैसला लेने को मजबूर हुई है। 

 

वेनेजुएला का सबसे बड़ा नोट 1 लाख का 

 

वैसे तो हमारे देश में  8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने से पहले तक 1000 रुपए,  सबसे बड़ा नोट था। वहीं इस नोट के बंद होने के बाद 2 हजार रुपए के नोट ने इसकी जगह ले ली। अब सबसे बड़े नोट की बात करें तो 2 हजार रुपए का है।  लेकिन क्‍या आपको पता है कि वेनेजुएला में सबसे बड़ा नोट होता है, 1 लाख का।  यहां की मुद्रा को बोलिवर कहा जाता है। यही 1 लाख का नोट अब बाजार से गायब होने जा रहा है। 

 

क्‍या कहा देश के राष्‍ट्रपति ने 


वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने यह एलान किया। उन्होंने कहा, मैंने मुद्रा में से 3 शून्य हटाने का फैसला किया है और बाजार से पुराने नोट और सिक्के हटा कर 4 जून से उनकी जगह नए नोट लाने का फैसला किया है।  हालांकि इस कदम से बोलिवर की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आगे पढ़ें - 

 

बाजार में कीमत 


बोलिवर का सबसे बड़ा नोट भले ही एक लाख का हो लेकिन बाजार में इसकी कीमत कुछ भी नहीं है। काले बाजार में एक लाख बोलिवर के बदले 0.5 डॉलर मिलते हैं। खुद वेनेजुएला में ही एक लाख बोलिवर के बदले एक कप कॉफी भी नहीं खरीदी जा सकती। एक किलो चीनी का भाव है ढाई लाख बोलिवर। 

 

पहले भी लिया जा चुका है फैसला 


मुद्रा में इस तरह का बदलाव वेनेजुएला के लोगों के लिए कोई नई बात नहीं है। साल 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति हूगो शावेज ने भी इसी तरह तीन शून्य गायब किए थे। तब उन्होंने मुद्रा को "मजबूत बोलिवर" का नाम दिया था। आगे पढ़ें - कितना है वेनेजुएला पर कर्ज 

60 अरब डॉलर का है कर्ज
 
वेनेजुएला का वित्तीय संकट 60 अरब डॉलर पहुंच गया है। जिसके चलते लैटिन अमेरिकी देश कई कंपनियों जिसमें भारत की इंडियन ऑयल और ओएनजीसी शामिल हैं का डेट पेमेंट नहीं कर पाई है। 
 
क्‍यों आई ये नौबत 

2014 में क्रूड की कीमतें गिरने की वजह से पिछले कुछ सालों में वेनेजुएला दिवालियापन से जूझ रहा था। नोटबंदी के बाद से हालत और खराब हो गई थी। वेनेजुएला की इकोनॉमी तेल पर निर्भर है और तेल के आयत से देश का 90 फीसदी रेवेन्यू जेनरेट होता है। वेनेजुएला ऐसा देश है जो सबसे अधिक बार दिवालिएपन को झेल चुका है। वेनेजुएला इससे पहले 11 बार खुद को दिवालिया घोषित कर चुका है। पहली बार 1826 के युद्ध के बाद वेनेजुएला दिवालिया घोषित हुआ था। तेल के समृद्ध भंडार वाला यह देश इसके बाद भी ग्यारह बार दिवालिया हो चुका है। 
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