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टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवादों में आएगी कमी, 20 लाख से कम के मामलों की नहीं होगी सुनवाई

इससे कम वैल्‍यू वाले इनकम टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद में कमी आएगी

government extend monitory limit for departmental appeal in tax litigation

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और इनकम टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद के मामलों में कमी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने इनकम टैक्‍स के मामलों में विभागीय अपील फाइल करने की मौद्रिक सीमा को बढ़ा दिया है। इससे कम वैल्‍यू वाले इनकम टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद में कमी आएगी और इनकम टैक्‍स विभाग ज्‍यादा वैल्‍यू वाले कानूनी विवाद के निस्‍तारण पर फोकस कर सकेगा। 

 

अपील फोरम अपील फाइल करने की मौजूदा मोद्रिक सीमा  अपील फाइल करने की नई मौद्रिक सीमा 
ITAT/ CESTAT 10 लाख  20 लाख 
हाई कोर्ट  20 लाख  50 लाख 
सुप्रीम कोर्ट  35 लाख  1 करोड़ 

 

डायरेक्‍ट टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद में 41% तक आएगी कमी 

सीबीडीटी से जुड़े टैक्‍स के मामलों में इनकम टैक्‍स विभाग ने इनकम टैक्‍स अपीलेट ट्रिब्‍यूनल यानी ITAT में जो केस फाइल किए हैं उनमें से 34 फीसदी केस खत्‍म हो जाएंगे। वहीं अपील के लिए मौद्रिक सीमा बढ़ाए जाने से हाई कोर्ट में 48 फीसदी टैक्‍स विवाद के केस सरकार वापस ले लेगी। इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट से सरकार टैक्‍स विवाद के 54 फीसदी केस वापस लेगी। इस तरह से इनकम टैक्‍स विवाद से जुड़े मामलों में 41 फीसदी तक कमी आएगी। हालांकि यह बदलाव उन मामलों में लागू नहीं होगा जहां पर कानून का बड़े पैमाने पर उल्‍लंघन हुआ है। 

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इनडायरेक्‍ट टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद में 18% तक आएगी कमी 

इसी तरह से सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्‍ट टैक्‍स से जुड़े जो मामले CESTAT में फाइल किए गए हैं उनमें से सरकार 16 फीसदी मामलों को वापस ले लेगी। हाई कोर्ट से 22 फीसदी और सुप्रीम कोर्ट से इनडायरेक्‍ट टैक्‍स से जुड़े कानूनी विवाद 21 फीसदी मामले सरकार वापस लेगी। इस तरह से विभाग द्वारा अपील फोरम में फाइल किए गए कानूनी विवार के कुल मामलों में 18 फीसदी की कमी आएगी। 

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