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खास खबर: क्‍या राजीव गांधी सरकार की राह पर है मोदी का बेनामी प्रॉपर्टी कानून

ब्‍लैकमनी और बेनामी प्रॉपर्टी के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दावा करने वाली मोदी सरकार की मंशा सवालों के घेरे में है

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नई दिल्‍ली. ब्‍लैकमनी और बेनामी प्रॉपर्टी के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दावा करने वाली मोदी सरकार की मंशा सवालों के घेरे में है। यह सवाल इसलिए पैदा हुए हैं क्‍योंकि मोदी सरकार बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्‍शन एक्‍ट के जरूरी एडजुकेटिंग अथॉरिटी का गठन अब तक नहीं कर सकी है जबकि कानून को लागू हुए 1.5 साल बीत गए हैं। इससे इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट द्वारा अटैच की गई 780 ये अधिक बेनामी प्रॉपर्टी के इनवैलिडेट होने का खतरा पैदा हो गया है। अटैच प्रॉपर्टी को जब्‍त करने का फैसला एडजुकेटिंग अथॉरिटी ही कर सकती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या मोदी सरकार में बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाने के लिए जरूरी इच्‍छा शक्ति का अभाव है। क्‍या सरकार बड़े नेताओं, नौकरशाहों, बिजनेसमैन और प्रभावशाली लोगों के दबाव में है। आम तौर पर माना जाता है कि भ्रष्‍टाचार से कमाए गए काले धन को लोग बेनामी प्रॉपर्टी लगाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में पीएम मोदी बेनामी प्रॉपर्टी पर एक्‍शन के लिहाज से सुस्‍त क्‍यों दिख रहे हैं।  

 

 

शक के दायरे में मोदी सरकार की नीयत 

इकोनॉमिस्‍ट और  जेएनयू के प्रोफेसर प्रोफेसर अरुण कुमार ने moneybhaskar.com को बताया कि बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट के तहत 1.5 साल के बाद भी एडजुकेटिंग अथॉरिटी का गठन न होने से यह साफ पता चलता है कि मोदी सरकार कालेधन और बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों पर सख्‍त कदम नहीं उठाना चाहती है। पीएम मोदी नोटबंदी के बाद खुद कई बार बेनामी प्रॉपर्टी के खिलाफ अभियान चलाने की बात कह चुके हैं, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ दिखता नहीं है। शायद मोदी सरकार को लगता है कि ऐसा करने से उनके नेता और करीबी लोग ही फंस सकते हैं। ऐसे में काले धन को लेकर मोदी सरकार की नीयत पर भी सवाल उठते हैं। 

 

 

बेनामी प्रॉपर्टी पर पीएम मोदी का राजीव गांधी मोमेंट 

प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार 1986 में बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों के खिलाफ एक्‍शन के लिए एक कानून का मसौदा लेकर आई थी लेकिन इसे संसद से पारित नहीं कराया जा सका। पीएम मोदी ने खुद कई बार कहा है कि कांग्रेस ने जानबूझ कर इस कानून को लटका कर रखा। उन्‍होंने कांग्रेस पर बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों की रक्षा करने का आरोप भी लगाया। अब मोदी सरकार ने बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट को संसद में पारित कराके लागू तो कर दिया है लेकिन जरूरी एडजुकेटिंग अथॉरिटी न बना कर क्‍या वे इस कानून को कमजोर नहीं कर रहे हैं। ऐसे में इसे बेनामी प्रॉपर्टी पर पीएम मोदी का राजीव गांधी मोमेंट भी कहा जा सकता है। 1986 के मसौदे को लेकर पीएम मोदी कांग्रेस को शर्मिदा करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। ऐसे में मोदी सरकार ने अब विपक्ष को भी एक बड़ा मौका दे दिया है। 

 

 

नोटबंदी के बाद बेनामी प्रॉपर्टी पर शिकंजा कसने का वादा 

मोदी सरकार ने नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू की थी। मोदी सरकार का दावा था कि इससे कैश के तौर पर काला धन रखने वाले लोग सिस्‍टम की पकड़ में आएंगे। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने कहा था कि बड़े पैमाने पर काला धन बेनामी प्रॉपर्टी में लगा हुआ है। अब सरकार बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों पर शिकंजा कसेगी। लेकिन नोटबंदी हुए भी 1.5 साल से ज्‍यादा का समय हो गया है लेकिन ऐसा नहीं लगता है कि सरकार बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों के खिलाफ कोई बड़ा अभियान चला रही है। हालांकि इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट रूटीन में अपने स्‍तर पर कुछ कदम उठा रहा है लेकिन इससे बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों में कोई खास डर पैदा हुआ है हो। ऐसा नहीं लगता है। 

 

 

नहीं दिखती है सरकार की गंभीरता 

इकोनॉमिस्‍ट पई पनिंदकर का कहना है कि बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट के तहत अब तक अथॉरिटी का गठन न होना यह दिखाता है कि सरकार बेनामी प्रॉपर्टी को लेकर गंभीर नहीं है। अगर सरकार बेनामी प्रॉपर्टी पर सख्‍त कदम उठाती है तो बड़े नौकरशाह से लेकर सांसद विधायक सब फंसेंगे। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए इस मोचे पर बड़ा कदम उठाना आसान नहीं है लेकिन मोदी खुद दावा करते रहे हैं कि वे बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों के खिलाफ एक्‍शन लेंगे। लेकिन अब वे अपनी बात पर खरे नहीं उतर रहे हैं। 


आगे पढें -क्‍या है बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट 

क्‍या है बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट
 
बेनामी लेन-देन पर रोक लगाने के लिए बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिशन) एक्‍ट – 1988 लागू था, जिसमें बेनामी लेनदेन करने पर तीन साल की जेल और जुर्माना या दोनों का प्रावधान था,  लेकिन मोदी सरकार ने इसे नाकाफी मानते हुए बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिशन) (अमेंडमेंड) एक्‍ट – 2016 लागू किया है। इस नए एक्‍ट में सजा को कठोर कर दिया गया है। 

 

किसे कहते हैं बेनामी प्रॉपर्टी
 
बेनामी यानी ऐसी प्रॉपर्टी, जिसे खरीदते वक्‍त लेन-देन उस व्‍यक्ति के नाम पर नहीं होता, जिसने इस प्रॉपर्टी की कीमत चुकाई है। मतलब प्रॉपर्टी का रजिस्‍ट्रेशन किसी और नाम पर होता है और पैसे का भुगतान कोई और करता है। ऐसी प्रॉपर्टी पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी जाती है। इतना ही नहीं, कई लोग अपने नौकरों, दोस्‍तों के नाम पर भी ऐसी प्रॉपर्टी खरीदते हैं। ऐसी प्रॉपर्टी जिस व्‍यक्ति के नाम खरीदी जाती है, उसे बेनामदार कहा जाता है।

 

कैसे होगी कार्रवाई
 
एक्‍ट में प्रावधान किया गया है कि सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी को लगता है कि आपके कब्‍जे की प्रॉपर्टी बेनामी है तो वह आपको नोटिस जारी कर आपसे प्रॉपर्टी के कागजात तलब कर सकता है। इस नोटिस के तहत आपको 90 दिन के भीतर अपनी प्रॉपर्टी के कागजात अधिकारी को दिखाने होंगे।

 

7 साल की कठोर सजा का प्रावधान 

 

 नए कानून के तहत बेनामी प्रॉपर्टी पाए जाने पर सरकार उसे जब्‍त कर सकती है। या बेनामी लेन-देन पाए जाने पर 3 से 7 साल की कठोर कैद की सजा और प्रॉपर्टी की बाजार कीमत पर 25 फीसदी जुर्माने का प्रावधान है। ये दोनों सजा साथ-साथ दी जा सकती है। जो लोग जानबूझकर गलत सूचना देते हैं उन पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का 10 फीसदी तक जुर्माना और 6 माह से लेकर 5 साल तक का जुर्माने का प्रावधान है। जैसे कि ज्‍वाइंट प्रॉपर्टी में आपका नाम है और आप ने जानबूझ कर इसको डिक्‍लेयर नहीं किया तो यह अपराध इस श्रेणी में आ सकता है। ये दोनों सजा साथ-साथ दी जा सकती है।

 

 

 

 

 

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