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चाय बेचकर 'गुरु' बना आसाराम, ऐसे खड़ा किया 2300 करोड़ का साम्राज्‍य

कभी लाखों भक्‍तों के बीच आलीशान जिंदगी जीने वाला आसाराम नाबालिग बच्‍ची के साथ रेप के मामले में दोषी करार दिया गया है।

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नई दिल्‍ली।  कभी लाखों भक्‍तों के बीच आलीशान जिंदगी जीने वाला आसाराम नाबालिग बच्‍ची के साथ रेप के मामले में दोषी करार दिया गया है। साढ़े चार साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आसाराम को जोधपुर की एक अदालत ने रेप मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। आसाराम खुद को जितना बड़ा धर्म गुरु बताता रहा है उससे कहीं ज्‍यादा उसकी लाइफ लग्‍जरी है।  आपको जानकर हैरानी होगी कि आसराम कभी चाय बेचता था लेकिन आज उसके पास अरबों का साम्राज्‍य है। आसाराम के पास 2300 करोड़ की संपत्ति है। हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट में 10 हजार करोड़ तक की संपत्ति होने का दावा किया जाता है। बहरहाल, आज हम आसाराम की चाय बेचने से लेकर धर्म गुरु बनकर अरबों का साम्राज्‍य खड़ा करने की दिलचस्‍प कहानी बताते हैं।

 

 

 


पाकिस्तान में हुआ जन्म


आसाराम का जन्म 1941 को पाकिस्तान के नवाबशाह जिले के बरानी गांव में हुआ। पिता थिउमल और मां मेहंगी ने अपने इस बेटे का नाम आसुमल रखा। बंटवारे के दौरान उनका मकान उजड़ गया और परिवार अहमदाबाद के पास मणिनगर आकर बस गया। यहां आने के कुछ समय बाद ही पिता की मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी आसुमल पर आ गई।


शुरु किया चाय बेचना 


इस घटना के कुछ दिन बाद आसुमल परिवार समेत मणिनगर से वीजापुर आकर बस गया। आसुमल ने यहां चाय की दुकान शुरू की। चाय बेचने से काम नहीं चला तो उसने अवैध शराब का धंधा शुरू कर दिया। आसाराम पर शराब के नशे में एक युवक की हत्या का आरोप लगा। थोड़े समय जेल भी रहना पड़ा, लेकिन बाद में वह बरी हो गया।


शराब का बड़ा कारोबारी 
साठ के दशक में वो परिवार सहित अजमेर से अहमदाबाद चला गया। यहां उसने फिर से शराब का कारोबार शुरू कर दिया। उसने कई लोगों से पैसा उधार लिया। जब कर्ज नहीं चुका पाया तो फिर से भागकर परिवार समेत अजमेर आ गया। यहां उसने तांगा चलाना शुरू कर दिया। यहीं पर उसने लक्ष्मी देवी नाम की महिला से शादी कर ली। उसके दो बच्चे नारायण साईं और पुत्री भारती देवी का जन्म हुआ। बच्चों के जन्म के बाद आसुमल यहां से गायब हो गया। 

 - आसाराम ने 1972 में अहमदाबाद के पास मोटेरा में साबरमती नदी के किनारे अपना पहला आश्रम बनाया। आसाराम ने सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्र के गरीब और पिछड़ों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। इसके बाद उसका प्रवचन सुनने गुजरात के बाहर से भी लोग आने लगे।

- प्रवचन और देसी दवा का गठजोड़ ऐसा चला कि देखते ही देखते चन्द सालों में आसाराम ने अपना विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया। देशभर में उसने चार सौ आश्रम खड़े कर लिए। इन आश्रमों की जमीन ही अरबों रुपए की है। अपने करोड़ों साधकों के बीच आसाराम अपने कई उत्पाद बेचने लगा और उसकी मोटी कमाई का जरिया शुरू हो गया। आगे भी पढ़ें - ऐसे हासिल की संपत्ति

 

 

 

 

ऐसे हासिल की संपत्ति
आसाराम की मिल्कियत वाली काफी प्रॉपर्टी गैरकानूनी हैं। इन जमीनों को गलत दस्तावेज रखने वाले भक्तों को फुसलाकर और अतिक्रमण के जरिए हासिल किया गया। आसाराम के पास 400 ट्रस्ट हैं। उसके जरिए वह अपने पूरे साम्राज्य पर नियंत्रण रखता था।

 

आश्रम हड़प कर हासिल की संपत्ति 
आसाराम की संस्थाओं द्वारा बेची जाने वाली पत्रिकाओं, प्रार्थना पुस्तकों, सीडी, साबुन, धूपबत्ती और तेल जैसे उत्पादों की बिक्री, श्रद्धालुओं के चंदे और आश्रम की हड़पी हुई जमीन पर खेती से भी आश्रम के खजाने में मोटी रकम आई। धन बटोरने का सबसे बड़ा जरिया अनुयायियों को प्रवचन देना था। इसके लिए करीब 50 सत्संग हुआ करते थे। दो या तीन दिनों के हरेक प्रवचन में उत्पादों की बिक्री से ही 1 करोड़ रुपए जुटा लिए जाते थे।


200 करोड़ तक चंदा लिया जाता था 
सबसे ज्यादा धन उगलने वाले तीन या चार सालाना गुरुपूर्णिमा के कार्यक्रम हुआ करते थे। आसाराम के करीबी बताते हैं कि हर साल 10 से 20 भंडारे किए जाते थे। उनके लिए 150 करोड़ से लेकर 200 करोड़ तक चंदा लिया जाता था। इसकी तुलना में खाना बनाने और बांटने में खर्च की गई रकम नाममात्र की हुआ करती थी। 


156 करोड़ रुपए का निवेश 
11000 योग वेदांत सेवा समितियों के जरिए चंदा इकट्ठा होता था। बेनामी जमीन-जायदाद के सौदों के तहत उसका करीब 2200 करोड़ रुपया ब्याज पर चल रहा है। 500 से अधिक लोगों को उसने ये पैसा दिया है। अमेरिकी कंपनी सोहम इंक और कोस्टास इंक में आसाराम ने करीब 156 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

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