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पाकिस्‍तान में होते गांधी-नेहरू के अकाउंट, अगर भारत नहीं आता यह बैंक

नई दिल्‍ली। बंटवारे के बाद अगर भारत नहीं आता यह बैंक तो आज पाकिस्‍तान में गांधी-नेहरू के अकाउंट होते। यह वही बैंक है, जो इन दिनों 11 हजार करोड़ के बड़े फ्रॉड की वजह से चर्चा में है। आज भारत के करीब-करीब हर जिले में अपनी पैठ बना चुके इस बैंक ने भारत-पाकिस्‍तान बंटवारे के बाद लाहौर से नई दिल्‍ली का रुख किया। भारत का आज वह दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक और एसेट (संपत्ति) के लिहाज से तीसरा सबसे बड़ा बैंक है। हम बात कर रहे हैं पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की। आइए जानते हैं पीएनबी का लाहौर से नई दिल्‍ली तक का सफर -


 लाहौर के अनारकली बाजार में शुरू हुआ PNB
भारत में पंजाब नेशनल बैंक को आज हर कोई जानता है। इस बैंक का पंजीकरण भारतीय कंपनी कानून के तहत 19 मई 1894 को लाहौर के अनारकली बाजार में हुआ था। 1947 में भारत विभाजन के बाद पीएनबी को लाहौर से अलविदा कहना पड़ा। 
 
92 ऑफिस करने पड़े थे बंद
भारत-पाक बंटवारे के बाद पीएनबी को पश्चिमी पाकिस्तान में 92 दफ्तरों को बंद करना पड़ा जिसमें 40 फीसदी जमा राशि मौजूद थी। हालांकि, पीएनबी ने पहले से ही सोच लिया था कि वह लाहौर छोड़ भारत में रजिस्‍ट्रेशन कराएगा। उसे 20 जून 1947 को लाहौर हाई कोर्ट से मंजूरी मिल गई और उसने अपना नया मुख्यालय नई दिल्ली में बनाया। आगे पढ़ें - किसका खुला पहला अकाउंट 

 

 

 

 

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