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सरकार ने जारी की 9491 NBFCs की लिस्‍ट, ब्लैकमनी को व्हाइट करने का कर रही थीं खेल

वित्‍त मंत्रालय ने 9,491 नॉन बैकिंग फाइनें‍स कंपनियों को हाई रिस्‍क कैटेगरी में रखा है।

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नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्रालय ने 9,491 नॉन बैकिंग फाइनें‍स कंपनियों (एनबीएफसी) को हाई रिस्‍क कैटेगरी में रखा है। इन कंपनियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट के नियमों का अनुपालन न करने की वजह से हाई रिस्‍क कैटेगरी में रखा गया है। फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट ने इन कंपनियों की लिस्‍ट जारी की है। 

नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद कई एनबीएफसी कंपनियां और रूरल व अरबन कोऑपरेटिव बैंक इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट और प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर आए थे। इन कंपनियों ओर बैंकों ने लोगों की ब्‍लैकमनी को नए नोट में बदला था। इस तरह से लोगों ने अपने काले धन को सफेद किया। 

 

 

नोटबंदी के बाद बदली अवैध करंसी 

जांच एजेंसियों ने पाया है कि ये एनबीएफसी कंपनियां और कोऑपरेटिव बैंक प्रतिबंधित करेंसी नोट को कैश डिपॉजिट के तौर पर ले रहे थे बैक डेट की फिक्‍स्ड डिपॉजिट और चेक जारी कर रहे थे। रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों और कोऑपरेटिव बैंकों को ऐसी डिपॉजिट लेने से मना किया था। इसके बावजूद इन कंपनियों ने ऐसा किया। 

 

 

पीएमएलए के तहत एनबीएफसी के लिए क्‍या करना है जरूरी 

पीएमएलए के तहत सभी एनबीएफसी कंपनियों को प्रिंसिपल ऑफीसर नियुक्‍त करना होता है और 10 लाख व इससे अधिक के संदिग्‍ध और कैश ट्रांजैक्‍शन की रिपोर्ट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को देनी होती है। इसके अलावा इन कंपनियों को सभी ट्रांजैक्‍शन का रिकॉर्ड भी मेनेटेन करना होता है। कंपनियों को 5 साल तक ट्रांजैक्‍शन का रिकॉर्ड ओर क्‍लाइंट की पहचान को सुरक्षित रखना होता है। 

 

 

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