बिज़नेस न्यूज़ » Personal Finance » Income Tax » Updateइनकम टैक्‍स विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों पर उठे सवाल, डाटा मिसयूज का डर

इनकम टैक्‍स विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों पर उठे सवाल, डाटा मिसयूज का डर

इनकम टैक्‍स विभाग के अंदर से ही आउटसोर्स और कांट्रैक्‍ट वर्कर्स की संवेदनशील जगहों पर पोस्टिंग के खिलाफ आवाज उठने लगी ह

1 of

नई दिल्‍ली। ऐसे समय में जब मोदी सरकार टैक्‍स बेस बढ़ाने और इनकम टैक्‍स वसूली में तेजी लाने पर जोर दे रही है इनकम टैक्‍स विभाग के अंदर से ही आउटसोर्स और कांट्रैक्‍ट वर्कर्स की संवेदनशील  जगहों पर पोस्टिंग के खिलाफ आवाज उठने लगी है। इनकम टैक्‍स विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि विभाग की पॉलिसी के खिलाफ संवेदनशील जगहों पर आउटसोर्स और कांट्रैक्‍ट वर्कर्स काम कर रहे हैं। इसकी वजह से इनकम टैक्‍स डाटा के मिसयूज का खतरा है। नॉन गजटेड कर्मचारियों के संगठन इनकम टैक्‍स इम्‍पलॉयज फेडरेशन इन (आईटीईएफ) ने सीबीडीटी चेयरमैन को पत्र लिख कर इस पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र की कॉपी moneybhaskar.com के पास है। 

 

10 साल से एक ही जगह पर काम रहे हैं कांट्रैक्‍ट वर्कर्स 

 

आईटीईएफ के सेक्रेटरी जनरल रूपक सरकार द्वारा सीबीडीटी चेयरमैन को लिखे पत्र में कहा गया है कि 14 जून 2017 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया था कि असेसमेंट ओर इन्‍वेस्‍टीगेशन से जुड़े काम में आउटसोर्स और कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को नहीं लगाया जाएगा। लेकिन किसी भी प्रिंसिपल चीफ कमिश्‍नर ऑफ इनकम टैक्‍स ने इसका  संज्ञान नहीं लिया है और ज्‍यादातर जगहों पर असेसमेंट यूनिट में कांट्रैक्‍ट वर्कर नियुक्‍त हैं। ये वर्कर एक ही जगह पर 10-15 सालों से पोस्‍ट हैं जबकि इनकम टैक्‍स विभाग के रेगुलर कर्मचारियों का पॉलिसी के तहत नियमित तौर पर ट्रांसफर किया जाता है। 

 

डाटा मिस यूज का खतरा 

 

पत्र में कहा गया है कि कांट्रैक्‍ट वर्कर्स एक ही जगह पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। इसकी वजह से ये वर्कर्स ऐसी अनडिजायरेबल गतिविधियों में शामिल हैं जिससे इनकम टैक्‍स विभाग की इमेज खराब होती है। संवेदनशील नेचर के काम में आउटसोर्स और कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को लगाए जाने की वजह से डाटा मिसयूज का खतरा भी है। पत्र में कहा गया है कि इस मुद्दे पर आपसे चर्चा हो चुकी है और आपने इस मामले पर चिंता भी जताई थी। ऐसे मे आपसे एक बार फिर से अनुरोध है कि आप इस पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी निर्देश जारी करें। 

 

कांट्रैक्‍ट वर्कर्स एक जगह पर ज्‍यादा समय तक न करें काम 

 

पत्र में मांग की गई है कि कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को एक ही जगह पर काम न करने दिया जाए और इन वर्कर्स को दो साल में एक बार या तो डिस्‍कांटीन्‍यू किया जाए या बदला जाए। इससे कांट्रैक्‍ट वर्कर्स ऐसी अनडिजायारेबल गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाएंगे जो विभाग की इमेज को खराब करती हैं। 

 

आउटसोर्सिंग से बचें 

आईटीईएफ ने मांग की है कि इनकम टैक्‍स विभाग में काम का नेचर काफी संवेदनशील है ऐसे में जहां तक संभव हो आउटसोर्सिंग से बचा जाना चाहिए और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को तभी काम पर लगाया जाना चाहिए जब रेग्‍युलर स्‍टॉफ की बहुत ज्‍यादा कमी हो। पत्र में कहा गया है कि जब सीधी भर्ती के जरिए खाली पदों को भरा जाए तो उसी अनुपात में आउटसोर्से कर्मचारियों की संख्‍या में कमी की जानी चाहिए। 

 

आगे पढें- कमेटी चेक करे क्‍या काम कर रहे हैं कांट्रैक्‍ट वर्कर्स 

कमेटी चेक करे क्‍या काम कर रहे हैं कांट्रैक्‍ट वर्कर्स 

 

पत्र में कहा गया है कि हर रीजन में एक कमेटी का गठन किया जा सकता है जो यह चेक कर सकती है कि कांट्रैक्‍ट वर्कर्स क्‍या काम कर रहे हैं। इसके अलावा कांट्रैक्‍ट और आउटसोर्स वर्कर्स के लिए फंड का अलॉटमेंट उस चार्ज की वास्‍तविक जरूरत के अधार पर किया जाना चाहिए। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट