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हर साल 5 करोड़ भारतीय इस वजह से बन जाते हैं गरीब, जानें अपना स्‍टेटस

भारत में हेल्‍थ सर्विसेज इतना महंगा है कि इस कारण हर साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं।

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नई दिल्‍ली। भारत में गरीबी को लेकर समय - समय पर कई खबरें आती रही हैं लेकिन अब वर्ल्‍ड बैंक की एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसमें दावा किया गया है कि हर साल भारत में 5 करोड़ लोग गरीब हो रहे हैं। इस रिपोर्ट में गरीबी की जो वजह बताई गई है उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल, वर्ल्‍ड बैंक के इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हेल्‍थ सर्विसेज इतना महंगा है कि इस कारण हर साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं।  वर्ल्‍ड बैंक और वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्ग्‍नाइजेशन की यह रिपोर्ट हर साल ट्रैकिंग यूनिवर्सल हेल्‍थ कवरेज : 2017 ग्‍लोबल मॉनेटरिंग रिपोर्ट के नाम से जारी होती है। तो आइए जानते हैं क्‍या कहा गया है रिपोर्ट में। 

 

इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत दुनिया की आधी आबादी जरुरी स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं लेने में अक्षम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्‍वास्‍थय सर्विसेज पर खर्चे के कारण हर साल 10 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं। उनमें से अकेले भारत में 5 करोड़ लोग हैं। आगे पढ़ें - हर 6वां परिवार कर रहा बड़ा खर्च 

 

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हर छठवां घर 10 फीसदी से ज्‍यादा कर रहा खर्च 


रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में भारत में हर छठवां घर घरेलू आय का 10 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍सा ईलाज पर खर्च कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 4.2% और 4.6% परिवार स्‍वास्‍थ्‍य पर खर्च के कारण दो अलग - अलग गरीबी रेखाओं के आधार पर गरीब है। यह मानते हुए कि भारत में 24 करोड़ घर हैं, इसका मतलब है कि लगभग 1 करोड़ घर या लगभग 5 करोड़ की आबादी स्‍वास्‍थ्‍य खर्च के कारण गरीब हो रही है। 

 

बेचनी पड़ती है जमीन जायदाद 


भारत सरकार की संस्‍था नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस एनएसएसओ के 2014 के सर्वे के अनुसार 86 फीसदी ग्रामीण मरीज और 82 फीसदी शहरी मरीजों को नियोक्‍ता द्वारा मुहैया कराया जाने वाले इंन्‍श्‍योरेंस कवर या राज्‍य सरकारों के खर्च पर इन्‍श्‍योरेंस कवर उपलब्‍ध नहीं है। ऐसे में बड़े पैमाने पर मरीजों को अपना इलाज अपने पैसे से कराना पड़ता है। ऐसे में हर साल लाखों लोगों को इलाज के लिए अपनी जमीन या दूसरी असेट तक बेचनी पड़ती है और ऐसे मामलों में लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने की स्थिति में आ जाते हैं। 

लाइफस्‍टाइल डिसीज की वजह से बढ़ रहा है इलाज पर खर्च 

 

मौजूदा समय में लाइफस्‍टाइल डिसीज जैसे डायबिटीज, हाइरपरटेंशन का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। यह ऐसी बीमारियां हैं जिसमें कांपलीकेशन पैदा होने पर इलाज का खर्च 10 लाख से भी अधिक हो सकता है। ऐसे में हेल्‍थ इन्‍श्‍श्‍योरेंस कवर न होने पर मरीज का इलाज कराना आर्थिक तौर पर बहुत कठिन होता है।  

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