फायदा /क्रेडिट-डेबिट कार्ड समेत इन पांच उपायों से पा सकते हैं 50 लाख रुपए तक का फ्री इंश्योरेंस कवर

  • कई फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स पर आपको फ्री इंश्योरेंस कवर मिलता है
  • कुछ शर्तों का पालन करके आप इस कवर का फायदा उठा सकते हैं

Moneybhaskar.com

Sep 17,2019 01:24:00 PM IST

नई दिल्ली. मौजूदा समय में इंश्योरेंस हर व्यक्ति की जरूरत बन गया है। बाजार में आपकी जरूरत के मुताबिक आपको कई तरह के इंश्योरेंस मिल जाएंगे। लेकिन अगर आप थोड़े एक्टिव रहते हैं तो आपको इंश्योरेंस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप अगर किसी फाइनेंशियल प्रोडक्ट में निवेश करते हैं या क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इनमें इंश्योरेंस कवर मिलने की संभावना है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको यह फायदा उठाने के लिए अलग से कुछ खर्च करने की जरूरत नहीं है। हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के बारे में जो कुछ शर्तों के साथ आपको फ्री इंश्योरेंस कवर मुहैया कराएंगे।

1. क्रेडिट कार्ड

अलग-अलग क्रेडिट टाइप के आधार पर क्रेडिट कार्ड लिमिट और सर्विस प्रोवाइडर के ऑफर को ध्यान में रखते हुए क्रेडिट कार्ड पर इंश्योरेंस कवर ऑफर किया जाता है। हर क्रेडिट कार्ड के साथ एक वेलकम किट मिलती है। वेलकम किट में ही क्रेडिट कार्ड कंपनी के इंश्योरेंस ऑफर की डिटेल्स रहती है। आमतौर पर भारत में क्रेडिट कार्ड कंपनियां 50 लाख तक का कॉमप्लिमेंट्री इंश्योरेंस ऑफर करती हैं। यह लिमिट किसी-किसी मामले में बढ़ भी सकती है। स्नैपडील HDFC बैंक और HDFC मनीबैक क्रेडिट कार्ड पर 50 लाख तक का एक्सिडेंटल डेथ इंश्योरेंस मिलता है। जबकि जेट एयरवेज इंडसइंड बैंक वोयेज क्रेडिट कार्ड पर 25 लाख तक का कॉम्प्लिमेंट्री एयर एक्सिडेंट इंश्योरेंस कवर मिलता है।

2. डेबिट कार्ड

क्रेडिट कार्ड की तरह ही, कई डेबिट कार्ड पर भी इंश्योरेंस कवर की सुविधा भी दी जाती है। अलग-अलग तरह के इंश्योरेंस कवर में पर्सनल एक्सिडेंट कवर, पर्चेस प्रोटेक्शन कवर और पर्मानेंट डिसएबिलिटी कवर आदि शामिल हैं। हालांकि इंश्योरेंस कवर ऑफर करते वक्त अलग-अलग कंपनियों की अलग-अलग शर्त हो सकती है। आपको अपने खाते में एक मिनिमम बैलेंस भी मेंटेन रखना पड़ना सकता है। या फिर किसी घटना के दौरान या क्लेम करते वक्त डेबिट कार्ड का एक्टिव रहना जरूरी जैसी शर्त हो सकती है। कुछ मामलों में निर्धारित समयसीमा के अंदर क्लेम न करना, लापरवाही या कानून के उल्लंघन के आधार पर आपके क्लेम को रिजेक्ट भी किया जा सकता है।

3. म्युचुअल फंड्स

कुछ म्युचुअल फंड कंपनियां हैं जो एसआईपी स्कीम के साथ कॉम्पलीमेंट्री इंश्योरेंस कवर की सुविधा देती हैं। यदि किसी निवेशक की एसआईपी का कार्यकाल पूरा होने से पहले मृत्यु हो जाती है, तो बाकी की एसआईपी किश्तों का भुगतान बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है। इससे नॉमिनी पर SIP का बोझ नहीं पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बीमा से जुड़े कुछ नियम और शर्तें हैं। इंश्योरेंस की सुविधा लेने के लिए पहले आपको एक निश्चित अवधि के लिए एसआईपी का भुगतान करना पड़ सकता है। एसआईपी का कार्यकाल पूरा होने पर, इंश्योरेंस प्रोटेक्शन भी खत्म हो जाती है।

4. बैंक डिपॉजिट

जो लोग निवेश में रिस्क नहीं लेना चाहते हैं उनके लिए बैंक डिपॉजिट, खासकर कि फिक्स्ड डिपॉजिट, हमेशा पसंदीदा ऑप्शन रहेगा। हालांकि, बहुत से लोगों को पता नहीं है कि बैंक डिपॉजिट में इनबिल्ट इंश्योरेंस कवर भी होता है। बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (DIGCI) द्वारा 1 लाख रुपए तक के बैंक डिपॉजिट पर फिक्स्ड डिपॉजिट पर गारंटी दी जाती है। इसलिए, अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है, तो आपका बैंक डिपॉजिट या 1 लाख रुपए तक की एफडी सुरक्षित रहेगी।

5. EPF

अगर आप एक नौकरी करते हैं और EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के सदस्य हैं यानी अगर आप ईपीएफ में योगदान करते हैं और इसके एक्टिव मेंबर हैं, तो आप 6 लाख रुपए तक के इंश्योरेंस कवर के लिए भी एलिजिबल हैं। अगर आपकी सर्विस पीरियड के दौरान मृत्यु हो जाती है तो आपके वारिस या नॉमिनी को 6 लाख तक की बीमा कवर की रकम मिलेगी। इस बीमा कवर को कर्मचारी जमा बीमा योजना (EDLI) कहा जाता है। कवर मृत्यु से पहले रोजगार के पिछले बारह महीनों के दौरान निकाले गए वेतन पर निर्भर करता है।

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