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रेल पटरी टूटते ही बजेगा अलार्म, ये खास टेक्‍नोलॉजी रोकेगी एक्‍सीडेंट

मोदी सरकार पटरी टूटने से होने वाले एक्‍सीडेंट्स को रोकने के लिए एक लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी का सहारा लेने जा रही है

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नई दिल्‍ली। रेल एक्‍सीडेंट का बड़ा कारण होता है, रेल की पटरी को टूटना। जरूरी नहीं कि किसी व्‍यक्ति को तोड़ने से ही पटरी टूट जाए। सर्दियों में सिकुड़ने या गर्मियों में फैलने के कारण भी पटरियां ट्रेन के दबाव के कारण टूट जाती हैं। या लंबे समय तक रिपेयर न होने के कारण भी पटरी टूट जाती है। यही वजह है कि मोदी सरकार पटरी टूटने से होने वाले एक्‍सीडेंट्स को रोकने के लिए एक लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी का सहारा लेने जा रही है। रेलवे का दावा है कि इस टेक्‍नोलॉजी के अपनाने से पटरी टूटने से होने वाली एक्‍सीडेंट्स पर 100 फीसदी रोक लग जाएगी। 

 

क्‍या है इस टैक्‍नीक का नाम 
इस टेक्‍नोलॉजी को अल्‍ट्रासोनिक ब्रोकन रेल डिटेक्‍शन सिस्‍टम (यूपीआरडी) कहा जाता है। इस टेक्‍नोलॉजी को आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्‍टैंडर्डस ऑर्गनाइजेशन) ने डेवलप किया 

है। रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे और नार्थ सेंट्रल रेलवे के दो डिवीजन इलाहाबाद डिवीजन और मुरादाबाद डिवीजन में ट्रायल शुरू कर दिया है। ट्रायल के लिए 25-25 किलोमीटर का सेक्शन 

चुना गया है। जहां इस सिस्टम को लगाया गया है। ट्रायल के जल्द पूरा होने की उम्मीद है। जिसके बाद इनका इस्तेमाल शुरू हो सकेगा। 

 

क्‍या है खास 
इस टेक्‍नोलॉजी की खासियत है कि पटरियों की देखरेख अल्‍ट्रासोनिक किरणों से की जाएगी। जैसे कि पटरियों पर 25 किलोमीटर दूरी पर एक जगह वेब अमीटर लगाया जाएगा और दूसरी ओर रिसीवर लगाया जाएगा। इस बीच पटरियों पर अल्‍ट्रासोनिक किरणें वेब करेंगी। ऐसे में यदि पटरी टूट जाती है तो वेब अमीटर से रिसीवर तक आवाज न पहुंचने के कारण रेलवे स्‍टेशन पर लगा अलार्म बज उठेगा। यह काम सेकेंड्स में होगा। इस वजह से रेलवे मास्‍टर या अधिकारी तुरंत सचेत हो जाएंगे और ट्रेक पर गाड़‍ि़यों को रुकवा कर पटरी की मरम्‍मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। 

 

क्‍या होती है अल्‍ट्रासोनिक वेब 
एक्‍सपर्ट्स बताते हैं कि एक आदमी की अधिकतम सुनने की क्षमता 20 हजार हर्ट्स है, लेकिन अल्‍ट्रासोनिक वेब का अमीटर इससे कई गुणा अधिक क्षमता से सुन सकता है, वेब अमीटर से रिसीवर तक आवाज सुनाई देती रहेगी, लेकिन जैसे ही पटरी टूटेगी, यह आवाज आनी बंद हो जाएगी। 

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