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नुकसान /नए टैक्स स्लैब से घट सकती है बीमा एजेंटों की कमाई

  • आमतौर पर लोग टैक्स बचाने के लिए बीमा योजना खरीदते हैं
  • नए टैक्स स्लैब में खत्म कर दिए गए हैं कई डिडक्शन व एक्जेंप्शन

Moneybhaskar.com

Feb 04,2020 06:36:00 PM IST

नई दिल्ली. बजट में प्रस्तावित नए टैक्स स्लैब से आम करदाताओं पर टैक्स का बोझ भले ही कुछ घट जाए, लेकिन जीवन या साधारण बीमा और पोस्ट ऑफिस बचत योजना बेचने वाले एजेंटों को इससे नुकसान हो सकता है। एलआईसी एजेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के महासचिव पीजी दिलीप ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत में जीवन बीमा योजना बेची जाती है। खरीदी नहीं जाती। यह सामाजिक सुरक्षा योजना है। नए टैक्स स्लैब में करदाताओं को टैक्स बचाने वाले उपाय किए बिना टैक्स का भुगतान करने का विकल्प दिया गया है। पुराने टैक्स स्लैब में करदाताओं के पास जीवन या स्वास्थ्य बीमा खरीदकर या पीपीएफ या अन्य उपकरणों में निवेश कर टैक्स बचाने का विकल्प मौजूद था।

एजेंट के लिए बीमा योजना बेचना अधिक कठिन हो जाएगा

दिलीप ने बताया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में करीब 11.89 लाख एजेंट काम करते हैं। देश में एक लाख रुपए से पांच लाख रुपए तक सम एस्योर्ड वाली योजनाएं अधिक बेची जाती हैं। प्रस्तावित नया टैक्स स्लैब के तहत करदाताओं पर टैक्स का बोझ कुछ घट सकता है और उन्हें टैक्स बचाने के लिए बीमा योजना खरीदने की जरूरत नहीं पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि इसके कारण एजेंट के लिए बीमा योजना बेचना अधिक कठिन हो जाएगा।

देश में बीमा का दायरा घटेगा

चार्टर्ड अकाउंटेंट पीएस प्रभाकर ने कहा कि नए टैक्स स्लैब से बीमा कंपनियों को बड़ा धक्का लगेगा, क्योंकि बीमा कवर बेचे जाते हैं। खरीदे नहीं जाते हैं। करदाता टैक्स बचाने के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा खरीदते हैं। यह स्वाभाविक है कि विकल्प मिलने पर करदाता बीमा योजना नहीं खरीदेगा। एक निजी जीवन बीमा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इससे देश में बीमा का दायरा घटेगा।

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