जीवन बीमा /30 नवंबर से स्थगित होंगी जीवन आनंद, जीवन उमंग जैसी कई एलआईसी पॉलिसी

  • पॉलिसी की शर्तों में होगा बदलाव, इरडा के निर्देशों के अनुरूप बनाकर फिर की जाएगी पेश
  • जीवन आनंद, जीवन उमंग, जीवन लक्ष्य और जीवन लाभ जैसी पॉलिसी नहीं मिलेगी

Moneybhaskar.com

Nov 07,2019 12:13:17 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की कुछ लोकप्रिय पॉलिसी 30 नवंबर के बाद ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी। इन पॉलिसी में जीवन आनंद, जीवन उमंग, जीवन लक्ष्य और जीवन लाभ जैसी पॉलिसी शामिल हैं। कंपनी इन योजनाओं की शर्तों में बदलाव बदलाव करेगी, ताकि इन्हें भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के दिशानिर्देशों के अनुरूप ढाला जा सके। 30 नवंबर से जिन बीमा उत्पादों को कंपनी वापस ले रही है, उनमें करीब 20-25 व्यक्तिगत बीमा उत्पाद, आठ समूह बीमा उत्पाद और कुछ सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि 30 नवंबर तक बिक चुकी योजनाएं पुरानी शर्तों के साथ ही लागू रहेंगी।

बदलाव के बाद इन योजनाओं को फिर से किया जाएगा लांच

द न्यूज मिनट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीमा योजनाओं में जरूरी संशोधन करने के बाद इन योजनाओं को पुराने नाम से ही या किसी अन्य नाम से दोबारा पेश किया जाएगा। एलआईसी के एक अधिकारी ने कहा कि इन योजनाओं में संशोधन करना, पॉलिसी दस्तावेज तैयार करना, लाभ से जुड़े विवरणों को संशोधित करना, सॉफ्टवेयर में बदलाव करना और इन कार्यों के पूरा हो जाने के बाद इन्हें बेचने के लिए एजेंटों को प्रशिक्षण देना काफी कठिन काम है।

योजनाओं में बदलाव की प्रक्रिया होगी काफी चुनौतीपूर्ण

इन कार्यों को समय पर पूरा करना, लॉजिस्टिक्स से जुड़े मुद्दों को प्रबंधित करना और नए रूप में योजनाओं को लागू करना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। योजनाओं का प्रीमियम बढ़ सकता है। भविष्य में एलआईसी द्वारा लाई जाने वाली योजनाओं का प्रीमियम अधिक हो सकता है। बोनस की राशि घट सकती है।

इरडा ने इसी साल 8 जुलाई को जारी किया था दिशानिर्देश

इरडा ने इसी साल 8 जुलाई को दिशानिर्देश जारी किया था। इसमें यूनिट-लिंक्ड बीमा उत्पादों और नॉन-लिंक्ड बीमा उत्पादों के मुद्दों का समाधान किया गया था। नए नियमों के पीछे सोच यह थी कि भोले भाले लोगों को निवेश विकल्प के रूप में बीमा पॉलिसी की सेलिंग या मिस-सेलिंग की प्रथा खत्म की जाए। विशेषज्ञों लंबे समय से सलाह दे रहे थे कि बीमा उत्पादों की पहचान निवेश उपकरणों के तौर पर स्थापित न किया जाए, बल्कि इसे किसी भी आपात स्थिति में सिर्फ एक सहारे के तौर पर देखा जाए।

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