नया नियम /मानसिक रोगों, मोतियाबिंद समेत कई बीमारियों के इलाज को ना नहीं कह पाएंगी बीमा कंपनियां

  • इरडा ने जारी की नई गाइडलाइन, लाखों बीमाधारकों को होगा फायदा

Moneybhaskar.com

Oct 01,2019 11:55:00 AM IST

नई दिल्ली. अब बीमा कंपनियां अपनी मर्जी के मुताबिक कई बीमारियों को बीमा की सूची से बाहर नहीं कर पाएंगी। बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें बीमा कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे काम की जोखिम-भरी गतिविधियों, आर्टिफिशियल लाइफ मेंटेनेंस से होने वाली बीमारियों, मानसिक रोगों के इलाज, बढ़ती उम्र के साथ आनी वाली समस्याओं और जन्मजात बीमारियों के इलाज को भी बीमा में शामिल करें। इरडा के इस कदम से लाखों बीमाधारकों को फायदा होने की उम्मीद है।

इन बीमारियों को भी बीमा कवर में किया जाए शामिल

इरडा ने सोमवार को कहा कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मोतियाबिंद, घुटना बदलने की सर्जरी, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी याददाश्त संबंधी बीमारियों पर भी बीमा कवर दिया जाए। इसके साथ ही फैक्ट्री वर्कर जो जोखिमभरी परिस्थितियों में काम करते हैं, जिससे उनकी सेहत पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ता है, उनकी श्वसन संबंधी और त्वचा संबंधी बीमारियों को बीमा में शामिल करने से मना नहीं किया जा सकता है।

बीमा धारक द्वारा पहले से बताई गई सभी बीमारियों को कवर करना होगा

इरडा ने बीमारियों को दायरे से बाहर करने का मानकीकरण भी कर दिया है। इसके तहत अगर बीमा कंपनी एपिलेप्सी, किडनी की गंभीर बीमारी या एचआईवी या एड्स को कवर नहीं करना चाहती हैं, तो इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल होंगे और एक खास वेटिंग पीरियड (30 दिन से एक साल) होगा, फिर कवर शुरू होगा। इन कदमों से उन बीमाधारकों को बड़े स्तर पर फायदा मिलेगा, जो पहले से मौजूद अपनी बीमारियों का खुलासा करते हैं। इरडा का कहना है कि सभी बीमा कंपनियों के प्रोडक्ट्स में बीमाधारकों द्वारा बताई गई सभी प्री-एक्जिस्टिंग बीमारियों को कवर करना होगा।

बीमा कंपनी बदलते समय ग्राहक को नहीं करना होगा ज्यादा इंतजार

स्वास्थ्य नियामकों का मानकीकरण करने से बीमाधारकों को एक पॉलिसी से दूसरी पॉलिसी में शिफ्ट होने में समय मिलेगा। इरडा ने कहा है कि सभी अगर कोई बीमाधारक एक बीमा कंपनी से ट्रांसफर होकर दूसरी बीमा कंपनी में आता है और वेटिंग पीरियड की अवधि पूरी कर चुका है, तो नई बीमा कंपनी बीमाधारक को सिर्फ बचा हुआ वेटिंग पीरियड पूरा करने को कह सकती है। यह समय भी बीमा कंपनी ट्रांसफर करने की पहली तारीख से लेकर 48 घंटों से ज्यादा नहीं होना चाहिए।


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