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आपकी फैमिली के बच जाएंगे लाखों रु, अगर कर लिया ये काम

आपके पास अगर लाखों रुपए की सेविंग है तो आप खुद को पैसों के लिहाज से मजबूत समझते होंगे।

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नई दिल्ली। आपके पास अगर लाखों रुपए की सेविंग है तो आप खुद को पैसों के लिहाज से मजबूत समझते होंगे। लाखों की सेविंग होने पर एक अलग तरह का कान्‍फीडेंस भी होता है। लेकिन अगर आपने खुद को और अपनी फैमिली को हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस का कवर नहीं दिया है तो फ्यूचर में आपकी लाखों की सेविंग बरबाद  हो सकती है। अक्‍सर लोग सेविंग पर तो ध्‍यान देते हैं लेकिन ये खुद को और अपने परिवार के लिए मेडिकल खर्च को पूरा करने के लिए किसी ऑप्‍शन पर गौर नहीं करते हैं। 

 

कैसे सेविंग हो जाएगी बरबाद
 

आपकी लाखों की सेविंग कैसे बरबाद हो जाएगी इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं। अगर मनोज के पास लगभग 20 लाख का फंड जिसे उसने रिटायरमेंट प्‍लानिंग के तौर पर सालों में जमा किया है। आने वाले समय में यह फंड और बढ़ेगा। राम ने अपने और अपने परिवार के लिए कोई हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर नहीं लिया है। अगर राम को या उसके परिवार में किसी को गंभीर बीमारी हो जाती है। मौजूदा समय में गंभीर बीमारी पर औसत खर्च 10 लाख के आसपास है तो मनोज को अपनी सेविंग से ही इलाज का खर्च पूरा करना होगा। हाल में दिल्‍ली के एक पांच सितारा अस्‍पताल ने डेंगू के इलाज का बिल 25 लाख रुपए दिया था। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि डेंगू जैसी बीमारी में भी लाखों का खर्च आ सकता है। 

 

लाखों लोगों को इलाज के लिए बेचनी पड़ती है जमीन जायदाद 

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भारत सरकार की संस्‍था नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस एनएसएसओ के 2014 के सर्वे के अनुसार 86 फीसदी ग्रामीण मरीज और 82 फीसदी शहरी मरीजों को नियोक्‍ता द्वारा मुहैया कराया जाने वाले इंन्‍श्‍योरेंस कवर या राज्‍य सरकारों के खर्च पर इन्‍श्‍योरेंस कवर उपलब्‍ध नहीं है। ऐसे में बड़े पैमाने पर मरीजों को अपना इलाज अपने पैसे से कराना पड़ता है। ऐसे में हर साल लाखों लोगों को इलाज के लिए अपनी जमीन या दूसरी असेट तक बेचनी पड़ती है और ऐसे मामलों में लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने की स्थिति में आ जाते हैं। 

 

सेविंग बचाने के लिए जरूरी है हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर 
 

ऐसे में अगर आप अपनी सेविंग को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आप खुद को और अपने परिवार के लिए हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर खरीदें। हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर आ जितनी जल्‍दी खरीदेंगे यह उतना ही सस्‍ता पड़ता है। उदाहरण के तौर पर 35 साल के एक व्‍यक्ति को जिसके परिवार में पत्‍नी और एक बच्‍चा है 12 हजार रुपए सालाना प्रीमियम  में 4 से 5 लाख रुपए तक का हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर मिल सकता है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का जोखिम बढ़ता जाता है और इसके साथ ही हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस प्रीमियम भी बढ़़ता जाता है।

टॉप अप भी है एक विकल्‍प 
 

ओरिएंटल इन्‍श्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड के पूर्व डीजीएम एनके सिंह का कहना है कि अगर आपके पास बेसिक हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर है तो आप टॉप अप कवर भी ले सकते हैं।  35 साल की एज ग्रुप के लिए टॉप अप कवर सस्‍ता पड़ता है और आप 6 7 हजार रुपए सालाना प्रीमियम में 10 लाख रुपए तक कवर ले सकते हैं। जब बेसिक हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर में दी गई राशि खत्‍म हो जाती है तब टॉप अप कवर से इलाज के लिए पैसा जाता है। उदाहरण के लिए आपने 4 लाख रुपए का बेसिक हेल्‍थ इंन्‍श्‍योरेंस कवर ले रखा है और आपके पास 10 लाख रुपए का टॉप अप कवर है तो मेडिकल इमजरजेंसी होने पर पहले बेसिक हेल्‍थ इन्‍श्‍योंरेस पॉलिसी से इलाज का खर्च वहन होगा। अगर इलाज का खर्च 4 लाख रुपए से अधिक होता है तब वहां टॉप अप कवर काम आएगा।


लाइफस्‍टाइल डिसीज की वजह से बढ़ रहा है इलाज पर खर्च 

 

मौजूदा समय में लाइफस्‍टाइल डिसीज जैसे डायबिटीज, हाइरपरटेंशन का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। यह ऐसी बीमारियां हैं जिसमें कांपलीकेशन पैदा होने पर इलाज का खर्च 10 लाख से भी अधिक हो सकता है। ऐसे में हेल्‍थ इन्‍श्‍श्‍योरेंस कवर न होने पर मरीज का इलाज कराना आर्थिक तौर पर बहुत कठिन होता है।  

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